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मोरारी बापू ने चखा डोमराज के घर का बना भोजन
Updated Sun, 29 Oct 2017 01:50 AM IST
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वाराणसी। धर्मनगरी काशी में रामकथा मर्मज्ञ संत मोरारी बापू ने शनिवार को सामाजिक सद्भाव की मिसाल कायम की। डोमराज के घर का बना भोजन चखकर सामाजिक गैर बराबरी और जाति पात के भेदभाव को दूर करने का बड़ा संदेश दिया। वह डोमराज परिवार की मुखिया बड़की मालकिन के हाथ का बना भोजन पाकर भावुक हो उठे। बापू ने कहा कि जन्म से कोई बड़ा छोटा नहीं होता।
बड़की मालकिन के नाम से जानी जाने वाली डोमराज परिवार की मुखिया जमुना देवी अपने भतीजों जगदीश चौधरी और विश्वनाथ चौधरी के साथ शनिवार की सुबह नौ बजे कथा स्थल पर पहुंचीं। उन्होंने बापू के लिए अपने हाथ से पूड़ी, सब्जी और हलवा बनाया था। जब बड़की मालकिन का संदेश बापू को मिला तो उन्होंने तत्काल उन्हें आदर पूर्वक बुलवाया।
बापू ने व्यासपीठ पर ही बड़की मालकिन के हाथों से भोजन प्राप्त किया। इस दौरान कथा पंडाल में उमड़ी हजारों की तादाद में भीड़ हर हर महादेव के जयकारे लगाने लगी। बापू भावुक हो उठे। कथा के बाद उन्होंने बड़की मालकिन के हाथ का बना भोजन ग्रहण किया। बापू ने संदेश दिया कि कोई छोटा-बड़ा या अछूत नहीं होता। मसान ही सत्य और शुद्ध है। इससे पहले शुक्रवार की शाम मोरारी बापू मणिकर्णिका महाश्मशान के दर्शन के लिए पहुंचे थे। उस दौरान उन्होंने जमुना देवी से ‘भिक्षा’ (भोजन) पाने की इच्छा जताई थी।
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बड़की मालकिन के नाम से जानी जाने वाली डोमराज परिवार की मुखिया जमुना देवी अपने भतीजों जगदीश चौधरी और विश्वनाथ चौधरी के साथ शनिवार की सुबह नौ बजे कथा स्थल पर पहुंचीं। उन्होंने बापू के लिए अपने हाथ से पूड़ी, सब्जी और हलवा बनाया था। जब बड़की मालकिन का संदेश बापू को मिला तो उन्होंने तत्काल उन्हें आदर पूर्वक बुलवाया।
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बापू ने व्यासपीठ पर ही बड़की मालकिन के हाथों से भोजन प्राप्त किया। इस दौरान कथा पंडाल में उमड़ी हजारों की तादाद में भीड़ हर हर महादेव के जयकारे लगाने लगी। बापू भावुक हो उठे। कथा के बाद उन्होंने बड़की मालकिन के हाथ का बना भोजन ग्रहण किया। बापू ने संदेश दिया कि कोई छोटा-बड़ा या अछूत नहीं होता। मसान ही सत्य और शुद्ध है। इससे पहले शुक्रवार की शाम मोरारी बापू मणिकर्णिका महाश्मशान के दर्शन के लिए पहुंचे थे। उस दौरान उन्होंने जमुना देवी से ‘भिक्षा’ (भोजन) पाने की इच्छा जताई थी।
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