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80 हजार परिवारों का अनाज डकार रहे कोटेदार
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 07 Jan 2017 01:58 AM IST
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राशन कार्ड का अपग्रेडेशन
- फोटो : file photo
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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत जिले के हर गरीब को खाद्यान्न मिलना हाल-फिलहाल संभव नहीं है। कारण, पात्रता सूची में दर्ज होने के बावजूद 80 हजार लोगों को पात्र गृहस्थी कार्ड नहीं मिला है। कोटेदार के यहां जाने पर बगैर कार्ड वालों को भगाया जा रहा है। इस तरह हर महीने 30 से 40 लाख रुपये मूल्य के गरीबों का खाद्यान्न कोटेदार हजम कर रहे हैं। औसतन एक गरीब परिवार को 75-100 रुपये में महीने भर का खाद्यान्न (गेहूं और चावल) कोटेदार के यहां से मिलता है। अनुमान है कि 80 हजार लोगों में आधे को भी कोटेदारों द्वारा खाद्यान्न नहीं देने पर कोटेदार 30 से 40 लाख रुपये की कालाबाजारी कर लेते हैं।
अंगूठे के निशान (बायोमैट्रिक) से राशन देने की शुरुआत तीन माह पूर्व आशुतोष नगर कॉलोनी से कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण और तत्कालीन डीएम विजय किरन आनंद ने की थी। मंशा थी कि इससे कालाबाजारी पर रोक लगेगी। पर 10 प्रतिशत दूकानदारों के पास भी ऑटोमेशन मशीन नहीं होने के कारण न तो व्यवस्था प्रभावी नहीं हो पा रही है। कॉलोनी के कैलाश और विभा देवी ने बताया कि अब तक उनका राशन कार्ड ही नहीं बना है। ऐसे हजारों लोग हैं, जिन्हेें कोटेदार भगा देते हैं। यही नहीं, जिन लोगों का कार्ड बना है उनके यहां भी परिवार के हर सदस्य का नाम नहीं है। दरअसल, तीन साल से पात्र और अपात्र की सूची का सत्यापन कार्य पूरा नहीं हुआ है।
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अंगूठे के निशान (बायोमैट्रिक) से राशन देने की शुरुआत तीन माह पूर्व आशुतोष नगर कॉलोनी से कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण और तत्कालीन डीएम विजय किरन आनंद ने की थी। मंशा थी कि इससे कालाबाजारी पर रोक लगेगी। पर 10 प्रतिशत दूकानदारों के पास भी ऑटोमेशन मशीन नहीं होने के कारण न तो व्यवस्था प्रभावी नहीं हो पा रही है। कॉलोनी के कैलाश और विभा देवी ने बताया कि अब तक उनका राशन कार्ड ही नहीं बना है। ऐसे हजारों लोग हैं, जिन्हेें कोटेदार भगा देते हैं। यही नहीं, जिन लोगों का कार्ड बना है उनके यहां भी परिवार के हर सदस्य का नाम नहीं है। दरअसल, तीन साल से पात्र और अपात्र की सूची का सत्यापन कार्य पूरा नहीं हुआ है।
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