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शाह से मुलाकात के लिए अनुप्रिया और राजभर ने दिल्ली में डेरा डाला
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वाराणसी। लोकसभा चुनाव में पिछड़ी जातियों खासतौर से पटेल और राजभर बिरादरी को साधने के लिहाज से बुधवार का दिन अहम हो सकता है। भाजपा से नाराज चल रहे अपना दल (सोनेलाल) के अध्यक्ष आशीष सिंह पटेल और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के साथ ही सुभासपा अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने अपने-अपने खास नेताओं के साथ दिल्ली में डेरा डाल दिया है।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ‘ऑपरेशन यूपी’ के तहत को आशीष और अनुप्रिया से मुलाकात पहले सोमवार को होने वाली थी लेकिन खास लोगों की प्रारंभिक बातचीत ही हो पाई थी। अगले दौर की बातचीत से पहले पाकिस्तान में भारतीय वायुसेना की एयर स्ट्राइक और शाह के गाजीपुर दौरे के कारण इसे टाल दिया गया। योजना के मुताबिक राजभर की भी शाह से मुलाकात मंगलवार को होनी थी। अब इसे बुधवार को कर दिया गया है। माना जा रहा है कि दोनों दलों के प्रमुख नेताओं से शाह की बातचीत के बाद गठबंधन के बैनर तले लोकसभा चुनाव के बारे में फैसला हो जाएगा।
शाह से मुलाकात के पहले दोनों दलों के नेताओं ने अपने-अपने ‘मांग पत्र’ तैयार कर लिए हैं। जानकारी के मुताबिक अद (एस) अब लोकसभा की तीन सीटें और उप्र के पांच निगम चाहती है। दूसरी ओर सुभासपा दो सीटों पर अड़ी है। पार्टी को तीन निगम देने का आश्वासन पहले ही दिया जा चुका है। कहा जा रहा है कि इसके लिए दोनों दलों ने अपनी-अपनी जातियों के मतदाताओं के साथ-साथ अपने- अपने प्रभाव क्षेत्र का ब्योरा शाह के सामने रखने का मन बना लिया है।
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सूत्रों का कहना है कि सपा-बसपा गठबंधन के बाद प्रदेश के मतदाताओं की सोच पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक के बाद फिर बदल गई है। अब दोनों दल भाजपा पर ‘सीमित दबाव’ ही डाल पाएंगे। भाजपा अब दोनों दलों के साथ 2017 के गठबंधन को लोकसभा में जारी रखने के लिए ज्यादा ‘भाव’ नहीं देगी। पिछड़ों के आरक्षण के मुद्दे पर दोनों दलों की अलग-अलग राय भी भाजपा के पक्ष में है।
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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ‘ऑपरेशन यूपी’ के तहत को आशीष और अनुप्रिया से मुलाकात पहले सोमवार को होने वाली थी लेकिन खास लोगों की प्रारंभिक बातचीत ही हो पाई थी। अगले दौर की बातचीत से पहले पाकिस्तान में भारतीय वायुसेना की एयर स्ट्राइक और शाह के गाजीपुर दौरे के कारण इसे टाल दिया गया। योजना के मुताबिक राजभर की भी शाह से मुलाकात मंगलवार को होनी थी। अब इसे बुधवार को कर दिया गया है। माना जा रहा है कि दोनों दलों के प्रमुख नेताओं से शाह की बातचीत के बाद गठबंधन के बैनर तले लोकसभा चुनाव के बारे में फैसला हो जाएगा।
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शाह से मुलाकात के पहले दोनों दलों के नेताओं ने अपने-अपने ‘मांग पत्र’ तैयार कर लिए हैं। जानकारी के मुताबिक अद (एस) अब लोकसभा की तीन सीटें और उप्र के पांच निगम चाहती है। दूसरी ओर सुभासपा दो सीटों पर अड़ी है। पार्टी को तीन निगम देने का आश्वासन पहले ही दिया जा चुका है। कहा जा रहा है कि इसके लिए दोनों दलों ने अपनी-अपनी जातियों के मतदाताओं के साथ-साथ अपने- अपने प्रभाव क्षेत्र का ब्योरा शाह के सामने रखने का मन बना लिया है।
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सूत्रों का कहना है कि सपा-बसपा गठबंधन के बाद प्रदेश के मतदाताओं की सोच पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक के बाद फिर बदल गई है। अब दोनों दल भाजपा पर ‘सीमित दबाव’ ही डाल पाएंगे। भाजपा अब दोनों दलों के साथ 2017 के गठबंधन को लोकसभा में जारी रखने के लिए ज्यादा ‘भाव’ नहीं देगी। पिछड़ों के आरक्षण के मुद्दे पर दोनों दलों की अलग-अलग राय भी भाजपा के पक्ष में है।