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शर्मा बंधुओं के सुरों से बदली फिजा
Updated Mon, 01 Jan 2018 02:37 AM IST
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वाराणसी। वाराणसी। सूरज की गर्मी से तपते हुए तन को मिल जाए तरुवर की छाया....। 70 के दशक में आई फिल्म ‘परिणय’ में गाए इस भजन को शर्मा बंधुओं ने रविवार की शाम जब संकट मोचन के दरबार में पेश किया तो सैकड़ों श्रद्धालु झूम उठे। वातावरण सुर-लय के ऊंचे मानकों पर स्थापित हुआ। सुमिरन कर ले मेरे मन...। जिनके हृदय में श्रीराम बसे... जैसे भजनों की गूंज पर संकट मोचन के दरबार में सुरों की गंगा प्रवाहित हो गई। संकट मोचन फाउंडेशन की ओर से यह प्रस्तुति आयोजित की गई थी।
दीप प्रज्ज्वलन के बाद संकट मोचन के दरबार में सजे भव्य मंच पर शर्मा बंधुओं के पहुंचते ही हर हर महादेव के जयकारे गूंजने लगे। लोगों ने करतलध्वनि से स्वागत किया। शर्मा बंधु के नाम से प्रसिद्ध गोपाल शर्मा, सुखदेव शर्मा, कौशलेंद्र शर्मा, राघवेंद्र शर्मा ने शुरुआत की संत तुलसी की ‘विनय पत्रिका’ से। भजन के बोल थे- मोह तम तरिणी हर रुद्र शंकर शरणम् ... । इसके बाद उन्होंने दूसरी बंदिश-जाने जाने है सारा जग जाने महिमा हनुमान की... की प्रस्तुति की। फिर फिल्म ‘परिणय’ में गाए भजन- सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाए तरुवर की छाया...की प्रस्तुति कर संगीत रसिकों को मुग्ध कर दिया। अंत में भजन के बोल- रामनाम को अनमोल खजाना...की प्रस्तुति से उन्होंने विदा ली। तबले पर बलराम कौशिक, ढोलक पर विनोद कुमार,की -बोर्ड ओम प्रकाश वर्मा ने संगत की। शर्मा बंधुओं ने इस मौके कहा कि संकट मोचन हनुमान जी के दरबार में भजन पेश करने की बहुत अरसे से इच्छा थी। महंत जी ने आखिरकार उनकी यह मुराद पूरी कर दी। संकट मोचन के महंत ने कलाकारों को अंगवस्त्रम भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने नए वर्ष में नई उम्मीदों और सपनों को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाने की अपील की।
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दीप प्रज्ज्वलन के बाद संकट मोचन के दरबार में सजे भव्य मंच पर शर्मा बंधुओं के पहुंचते ही हर हर महादेव के जयकारे गूंजने लगे। लोगों ने करतलध्वनि से स्वागत किया। शर्मा बंधु के नाम से प्रसिद्ध गोपाल शर्मा, सुखदेव शर्मा, कौशलेंद्र शर्मा, राघवेंद्र शर्मा ने शुरुआत की संत तुलसी की ‘विनय पत्रिका’ से। भजन के बोल थे- मोह तम तरिणी हर रुद्र शंकर शरणम् ... । इसके बाद उन्होंने दूसरी बंदिश-जाने जाने है सारा जग जाने महिमा हनुमान की... की प्रस्तुति की। फिर फिल्म ‘परिणय’ में गाए भजन- सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाए तरुवर की छाया...की प्रस्तुति कर संगीत रसिकों को मुग्ध कर दिया। अंत में भजन के बोल- रामनाम को अनमोल खजाना...की प्रस्तुति से उन्होंने विदा ली। तबले पर बलराम कौशिक, ढोलक पर विनोद कुमार,की -बोर्ड ओम प्रकाश वर्मा ने संगत की। शर्मा बंधुओं ने इस मौके कहा कि संकट मोचन हनुमान जी के दरबार में भजन पेश करने की बहुत अरसे से इच्छा थी। महंत जी ने आखिरकार उनकी यह मुराद पूरी कर दी। संकट मोचन के महंत ने कलाकारों को अंगवस्त्रम भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने नए वर्ष में नई उम्मीदों और सपनों को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाने की अपील की।
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