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‘विकास के लिए एकात्म मानववाद का मार्ग जरूरी’
Updated Fri, 31 Aug 2018 01:48 AM IST
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वाराणसी। बीएचयू सामाजिक विज्ञान संकाय स्थित दीनदयाल पीठ की ओर से गुरुवार को आयोजित व्याख्यान में वक्ताओं ने दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद पर विस्तार से चर्चा की। बतौर मुख्य अतिथि मानव संसाधन विकास मंत्रालय से जुड़े नेशनल रिसर्च प्रोफेसर प्रो. गजानन मोदक ने कहा कि समाज के सर्वांगीण विकास के लिए एकात्म मानववाद के मार्ग पर चलना होगा। इसी मार्ग को अपनाकर हम विकास के रास्ते पर आगे बढ़ सकते हैं।
दीनदयाल जयंती समारोह के अवसर पर संबोधि सभागार में ‘एकात्म मानववाद : अवधारणा एवं विशिष्टता’ विषयक व्याख्यान में प्रो. मोदक ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय के दर्शन को वाद की श्रेणी में रखा ही नहीं जा सकता, क्योंकि यह निर्विवाद है। एकात्म मानववाद वह विचारधारा ह,ै जो यह बताती है कि मनुष्य का केवल सुखी होना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसमें विश्व कल्याण का बोध होना चाहिए।
प्रो. रामनिवास पाठक ने कहा कि धर्म निहित व्यवस्था अर्थव्यस्था की नींव भी तैयार कर सकती है, जो दीनदयाल जी के एकात्म मानववाद का स्त्रोत रहा है। पीठ के चेयर प्रोफेसर श्याम कार्तिक मिश्र ने अतिथियों का स्वागत किया। समारोह में प्रो. चंद्रकला पड़िया, प्रो. दीनानाथ सिंह, प्रो. अरविंद, प्रो. अशोक पॉल, स्वर्ण सुमन, डॉ. सीमा मिश्रा आदि लोग मौजूद रहे।
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दीनदयाल जयंती समारोह के अवसर पर संबोधि सभागार में ‘एकात्म मानववाद : अवधारणा एवं विशिष्टता’ विषयक व्याख्यान में प्रो. मोदक ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय के दर्शन को वाद की श्रेणी में रखा ही नहीं जा सकता, क्योंकि यह निर्विवाद है। एकात्म मानववाद वह विचारधारा ह,ै जो यह बताती है कि मनुष्य का केवल सुखी होना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसमें विश्व कल्याण का बोध होना चाहिए।
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प्रो. रामनिवास पाठक ने कहा कि धर्म निहित व्यवस्था अर्थव्यस्था की नींव भी तैयार कर सकती है, जो दीनदयाल जी के एकात्म मानववाद का स्त्रोत रहा है। पीठ के चेयर प्रोफेसर श्याम कार्तिक मिश्र ने अतिथियों का स्वागत किया। समारोह में प्रो. चंद्रकला पड़िया, प्रो. दीनानाथ सिंह, प्रो. अरविंद, प्रो. अशोक पॉल, स्वर्ण सुमन, डॉ. सीमा मिश्रा आदि लोग मौजूद रहे।
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