{"_id":"5a0a017a4f1c1b59678bb89a","slug":"61510605178-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दवाओं की अधिकता सेहत के लिए खतरनाक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दवाओं की अधिकता सेहत के लिए खतरनाक
Updated Tue, 14 Nov 2017 02:02 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। किसी भी बीमारी में दवा सेवन के लिए निर्धारित मानक से अधिकता भी सेहत के लिए खतरनाक हो सकती है। ऐसे में मानक से कम डोज देने से भी संबंधित बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है। इससे मरीज की सेहत के साथ-साथ उसका आर्थिक बचत भी होगा। एम्स नई दिल्ली के जैव सांख्यिकी विभाग में हुए शोध में ये परिणाम आए हैं। सोमवार को बीएचयू सांख्यिकी विभाग में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में भाग लेने आए प्रोफेसर डॉ. एसएन द्विवेदी ने बातचीत में ये जानकारी दी।
विज्ञान संस्थान के संगोष्ठी संकुल में उद्घाटन समारोह के बाद बातचीत में डॉ. द्विवेदी ने बताया कि दवाओं के निर्माण, उसके सेवन की मात्रा का निर्धारण सहित इससे जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों में सांख्यिकी का योगदान अहम है। बताया कि विभाग में थायरायड कैंसर की बीमारी के इलाज को लेकर हुए शोध के बाद 2012में एक जर्नल में इसे प्रकाशित भी कराया जा चुका है। इसमें यह पाया गया है कि थायरायड की बीमारी में वर्तमान में दिए जाने वाले दवाओं के डोज को अगर कम कर दिया जाए तो भी इसका कोई साइडिफेक्ट नहीं होगा। अमूमन मानक से अधिक डोज पर साइडिफेक्ट का खतरा अधिक रहता है। कम डोज में भी इससे निजात मिल सकता है। इस विधि को लागू किया जाए तो यह आमजन के लिए हितकर होगा। उधर संगोष्ठी के उदघाटन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि एलएन मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.एसके सिंह ने बिग डाटा के विश्लेषण, विभिन्न सांख्यिकी सॉफ्टवेयर के अनुप्रयोग और सामान्य जनजीवन में सांख्यिकी की महत्ता पर प्रकाश डाला। इस दौरान आईसीएमआर दिल्ली के पूर्व डायरेक्टर जनरल प्रो. पद्म सिंह, प्रो. सीएम पांडेय, प्रो.ज्ञान प्रकाश सिंह, डॉ.बृजेश प्रताप सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे। अतिथियों का स्वागत विभागाध्यक्ष प्रो. बीपी सिंह और धन्यवाद ज्ञापन प्रो.केके सिंह ने किया।
विज्ञापन
विज्ञान संस्थान के संगोष्ठी संकुल में उद्घाटन समारोह के बाद बातचीत में डॉ. द्विवेदी ने बताया कि दवाओं के निर्माण, उसके सेवन की मात्रा का निर्धारण सहित इससे जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों में सांख्यिकी का योगदान अहम है। बताया कि विभाग में थायरायड कैंसर की बीमारी के इलाज को लेकर हुए शोध के बाद 2012में एक जर्नल में इसे प्रकाशित भी कराया जा चुका है। इसमें यह पाया गया है कि थायरायड की बीमारी में वर्तमान में दिए जाने वाले दवाओं के डोज को अगर कम कर दिया जाए तो भी इसका कोई साइडिफेक्ट नहीं होगा। अमूमन मानक से अधिक डोज पर साइडिफेक्ट का खतरा अधिक रहता है। कम डोज में भी इससे निजात मिल सकता है। इस विधि को लागू किया जाए तो यह आमजन के लिए हितकर होगा। उधर संगोष्ठी के उदघाटन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि एलएन मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.एसके सिंह ने बिग डाटा के विश्लेषण, विभिन्न सांख्यिकी सॉफ्टवेयर के अनुप्रयोग और सामान्य जनजीवन में सांख्यिकी की महत्ता पर प्रकाश डाला। इस दौरान आईसीएमआर दिल्ली के पूर्व डायरेक्टर जनरल प्रो. पद्म सिंह, प्रो. सीएम पांडेय, प्रो.ज्ञान प्रकाश सिंह, डॉ.बृजेश प्रताप सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे। अतिथियों का स्वागत विभागाध्यक्ष प्रो. बीपी सिंह और धन्यवाद ज्ञापन प्रो.केके सिंह ने किया।
विज्ञापन