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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   56 vehicles of Municipal Corporation are buried in Jalkal complex. Team formed to search the vehicles.

गाड़ियों की कब्रगाह: जलकल परिसर में दफन हैं नगर निगम की 56 गाडियां, खोजबीन के लिए टीम गठित

Sun, 19 Nov 2023 08:45 AM IST
किरन रौतेला गुंजन श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी
गुंजन श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Sun, 19 Nov 2023 08:45 AM IST
सार

नगर निगम के रिकॉर्ड में 56 गाडिय़ों का अता पता नहीं है। इसे खोजने की जहमत किसी ने नहीं उठाई। पूर्व में एफआईआर कराने का निर्णय भी ठंडे बस्ते में चला गया। यहां तक की बैठक में संबंंधित प्रभारी परिवहन अधिकारी अनूप वाजपेयी से कंडम गाडिय़ों के बाबत पूछा गया तो उन्होंने अधिकारियों को बताया था कि पूर्व में 100 गाडिय़ों को चिह्नित किया गया था।

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56 vehicles of Municipal Corporation are buried in Jalkal complex. Team formed to search the vehicles.
जलकल परिसर में दफन हैं नगर निगम की 56 गाडियां - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जलकल परिसर में नगर निगम की गाडिय़ां दफन हैं। यह परिसर गाडिय़ों की कब्रगाह बना हुआ है। यहां पर 56 वाहन लंबे समय से जमीन के नीचे दबे पड़े हैं। जिनकी खोजबीन कवायद शुरू की गई है। इसके लिए नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एनपी सिंह को मेयर अशोक कुमार तिवारी ने जिम्मेदारी दी है।

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नगर निगम के रिकॉर्ड में 56 गाडिय़ों का अता पता नहीं है। इसे खोजने की जहमत किसी ने नहीं उठाई। पूर्व में एफआईआर कराने का निर्णय भी ठंडे बस्ते में चला गया। यहां तक की बैठक में संबंंधित प्रभारी परिवहन अधिकारी अनूप वाजपेयी से कंडम गाडिय़ों के बाबत पूछा गया तो उन्होंने अधिकारियों को बताया था कि पूर्व में 100 गाडिय़ों को चिह्नित किया गया था। वर्तमान में 46 गाडिय़ों का सत्यापन कर लिया गया है। बाकी गाडिय़ों के बारे में वे कोई जानकारी नहीं दे पाए।
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नगर निगम ने अब तक कियाना, इकोपाल, आईएलएंडएफएस, एजी इनवायरो, एटूजेड सहित कई कंपनियों को ठेका दिया था। इन कंपनियों के लिए करोड़ों रुपये के वाहन खरीदे गए। ठेका खत्म होने के बाद कंपनियों ने वाहनों को इधर-उधर खड़ा कर दिया। तकरीबन दस सालों से जलकल परिसर के गड्ढे में गाडिय़ां रखी गईं। इन गड्ढों में मिट्टी डाल दी गई। जिसके चलते कई गाडिय़ां मिट्टी के नीचे दबी पड़ी हैं। इनकी बेहतर ढंग से जांच की गई तो गड़बड़झाला सामने आएगा। इनमें ज्यादातर कूड़ा उठाने वाली गाडिय़ां हैं। जो लंबे समय से रखे-रखे खराब हो चुकी हैं। कईयों के पार्ट्स गायब हो चुके हैं। कुछ के पहिये से टायर खत्म होकर जमीन में धंस चुके हैं।
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वाहनों के रखरखाव से कतराता निगम

नगर निगम के जानकारों के अनुसार वाहनों के रखरखाव बेहतर ढंग से न होने से दिक्कत आती है। अक्सर पुरानी गाडिय़ों की न तो नीलामी होती है। न ही इन गाडिय़ों की खोजबीन की जाती है। यही कारण है ज्यादातार गाडिय़ों में कुछ हजार रुपये खर्च करके काम में लिया जा सकता था। वे अब कबाड़ हो चुकीं हैं। नए वाहनों को खरीदने के लिए करोड़ों रुपये खर्च के लिए फाइल तैयार कर ली जाएगी।


निगम की गाडिय़ों की खोजबीन की जा रही है। सत्यापन के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। जो लोग दोषी होंगे उन पर कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। इन दिनों डाला छठ और देव दीपावली की तैयारी की जा रही है। इसके बाद रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों के पास भेजी जाएगी। - डॉ. एनपी सिंह, नगर स्वास्थ्य अधिकारी व परिवहन प्रभारी

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