{"_id":"6518175a08977f56ce0c1d24","slug":"56-patients-underwent-bone-marrow-transplant-in-homi-bhabha-cancer-hospital-in-one-and-a-half-years-2023-09-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"वाराणसी न्यूज: होमी भाभा कैंसर अस्पताल में डेढ़ साल में 56 मरीजों का हुआ बोन मैरो ट्रांसप्लांट, पढ़ें ये खबर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वाराणसी न्यूज: होमी भाभा कैंसर अस्पताल में डेढ़ साल में 56 मरीजों का हुआ बोन मैरो ट्रांसप्लांट, पढ़ें ये खबर
Sat, 30 Sep 2023 06:11 PM IST
किरन रौतेला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: किरन रौतेला
Updated Sat, 30 Sep 2023 06:11 PM IST
सार
एक कार्यक्रम में बीएमटी यूनिट में कार्यरत डॉ. अनंत गोकर्ण और डॉ. सुमित मिर्घ ने बताया कि इसमें अत्याधुनिक तकनीक की भी जरूरत पड़ती है।
विज्ञापन
होमी भाभा कैंसर अस्पताल में डेढ़ साल में 56 मरीजों का हुआ बोन मैरो ट्रांसप्लांट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
लहरतारा स्थित होमी भाभा कैंसर अस्पताल में डेढ़ साल में 56 मरीजों का बोन मेरो ट्रांसप्लांट किया गया है। इसमें सभी मरीजों की स्थिति बेहतर है। कुछ मरीज तो पूरी तरह ठीक हो चुके हैं। डॉक्टर लगातार मरीज के सेहत की निगरानी कर रहे हैं और समय-समय पर उनकी जांच करने को कहा गया है। सितंबर महीने को ब्लड कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। इसको देखते हुए कैंसर अस्पताल में आने वाले मरीजों को ब्लड कैंसर के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
विज्ञापन
शुक्रवार को एक कार्यक्रम में बीएमटी यूनिट में कार्यरत डॉ. अनंत गोकर्ण और डॉ. सुमित मिर्घ ने बताया कि इसमें अत्याधुनिक तकनीक की भी जरूरत पड़ती है। मल्टीपल माइलोमा, लिंफोमा, अक्यूट ल्यूकेमिया और खून के ऐसे कैंसर जो एक बार ठीक होने के बाद फिर से वापस आ जाए, ऐसे मरीजों को बीएमटी की जरूरत पड़ती है। होमी भाभा कैंसर अस्पताल में 2019 में बीएमटी की शुरुआत हुई थी। हालांकि 2020 में कोविड के कारण कुछ समय के लिए इसे रोक दिया गया था। दिसंबर 2021 से अब तक 56 बीएमटी किया जा चुका है। इसमें 52 ऑटोलोगस ट्रांसप्लांट, जबकि 4 एलोजेनिक ट्रांसप्लांट शामिल है। मरीज की बात करे तो ज्यादातर मरीज 18-50 साल के बीच हैं।
विज्ञापन
ट्रांसप्लांट के बाद अगले 100 दिन मरीजों के लिए बेहद संवेदनशील
डॉक्टर सुमित का कहना है कि ट्रांसप्लांट के बाद अगले 100 दिन मरीजों के लिए बेहद संवेदनशील होता है। अक्सर इसी अवधि में मरीज की स्थिति बिगड़ जाती है और कई बार उनकी मौत भी हो जाती है। बीएमटी एक खर्चीला इलाज है। हालांकि होमी भाभा कैंसर अस्पताल में बाकि अस्पतालों की तुलना में लगने वाला खर्च लगभग एक तिहाई ही होता है।
विज्ञापन
महामना पंडित मदन मोहन मालावीय कैंसर केंद्र एवं होमी भाभा कैंसर अस्पताल के निदेशक डॉ. सत्यजीत प्रधान ने कहा कि हमारा उद्देश्य अस्पताल आने वाले सभी मरीजों को बेहतर सुविधा और इलाज देना है। इस कार्य में डॉ. मालिनी गर्ग, डॉ= सुजीत कुमार, डॉ. नेहा सिंह, डॉ अविनाश गुप्ता, डॉ. सौमित्र और डॉ अक्षय बत्रा सहित अस्पताल के अन्य कर्मचारियों का सहयोग है।