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खून की जांच कराने में बह रहा पसीना
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वाराणसी। बीएचयू में स्वास्थ्य सुविधाओं में बेहतरी का दावा भले ही किया जा रहा हो, लेकिन अभी भी कई ऐसी सुविधाएं हैं, जिसके लिए मरीजों को हर दिन परेशानी झेलनी पड़ती है। ट्रॉमा सेंटर में जहां इमरजेंसी में जहां बेड का इंतजार करना पड़ता है, वहीं खून की जांच के लिए मरीजों, परिजनों को ट्रॉमा सेंटर से लेकर सर सुंदरलाल अस्पताल तक का चक्कर लगाना पड़ता है। ऐसा इसलिए क्योंकि ट्रॉमा सेंटर में खून की जांच करने की व्यवस्था नहीं है।
सड़क एक्सीडेंट सहित अन्य दुघर्टनाओं में मरीजों को तत्काल और बेहतर इलाज मिल सके, इसके लिए ट्रॉमा सेंटर की शुरुआत हुई थी। इसका उद्घाटन 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। वैसे तो ट्रॉमा सेंटर में एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं मिलनी चाहिए, लेकिन अभी भी कई ऐसी सुविधाएं हैं, जिसके लिए मरीजों को हर दिन परेशान होना पड़ता है।
ट्रॉमा सेंटर में चलने वाली ओपीडी में हर दिन करीब 1000 मरीज बनारस और आसपास के जिलों के साथ ही बिहार, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ से आते हैं। इसके अलावा इमरजेंसी में आने वालों की संख्या भी इस समय 100 तक पहुंच गई है। सबसे अधिक परेशानी मरीजों को तब होती है जब चिकित्सक किसी मरीज को खून की जांच लिख देते हैं। ट्रॉमा सेंटर में जांच की कोई व्यवस्था न होने से मरीजों और परिजनों को सर सुंदरलाल अस्पताल तक जाना मजबूरी है।
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सड़क एक्सीडेंट सहित अन्य दुघर्टनाओं में मरीजों को तत्काल और बेहतर इलाज मिल सके, इसके लिए ट्रॉमा सेंटर की शुरुआत हुई थी। इसका उद्घाटन 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। वैसे तो ट्रॉमा सेंटर में एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं मिलनी चाहिए, लेकिन अभी भी कई ऐसी सुविधाएं हैं, जिसके लिए मरीजों को हर दिन परेशान होना पड़ता है।
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ट्रॉमा सेंटर में चलने वाली ओपीडी में हर दिन करीब 1000 मरीज बनारस और आसपास के जिलों के साथ ही बिहार, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ से आते हैं। इसके अलावा इमरजेंसी में आने वालों की संख्या भी इस समय 100 तक पहुंच गई है। सबसे अधिक परेशानी मरीजों को तब होती है जब चिकित्सक किसी मरीज को खून की जांच लिख देते हैं। ट्रॉमा सेंटर में जांच की कोई व्यवस्था न होने से मरीजों और परिजनों को सर सुंदरलाल अस्पताल तक जाना मजबूरी है।
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