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संविधान और आरक्षण की रक्षा के लिए दौड़े बौद्ध अनुयायी
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वाराणसी। संविधान बचाओ, एससी/एसटी एक्ट बचाओ के नारों के साथ बौद्ध अनुयायियों ने रन फार आंबेडकर में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। बाबा साहेब के चित्र वाले कैप, टीशर्ट पहने प्रतिभागी बाबा साहेब अमर रहे के नारों के साथ दौड़ में शामिल हुए। सोमवार को रन फार आंबेडकर को अंतरराष्ट्रीय सामाजिक कार्यकर्ता एमएस बहल ने पंचशील का झंडा दिखाकर रवाना किया। दौड़ कचहरी स्थित आंबेडकर पार्क से शुरू होकर गिलट बाजार होते हुए कचहरी पर समाप्त हुई।
यात्रा समाप्त होने के बाद शास्त्री घाट पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से बौद्ध अनुयायी शामिल हुए। मुख्य अतिथि एमएस बहल व अखिल भारतीय अनुसूचित जाति, जनजाति कर्मचारी कल्याण एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबा पी भोसले ने कहा कि आपको अपने पाठ्यक्रम के अलावा बाबा साहेब के साहित्य का अध्ययन अवश्य करना चाहिए। बुद्धमित्र मुसाफिर ने कहा कि आज जिस रूप में हम जी रहे हैं उसका सारा श्रेय बाबा साहेब को जाता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता लालमन बौद्ध, संचालन नीलम बौद्ध व गोपाल राम तथा विजय कुमार राव व ओमकारनाथ शास्त्री ने धन्यवाद ज्ञापन किया। संगोष्ठी को अरुण कुमार प्रेमी, बृजेश कुमार भारतीय, नीलम बौद्ध, डॉ. एमजी निगम, डॉ. राहुल राज, अशोक प्रबुद्ध, जयप्रकाश, सत्यप्रकाश, डॉ. प्रमोद, डॉ. राकेश, शुभावती, किरन, सुनीता, अनिता, मालती आदि ने संबोधित किया। मालती राव, मुन्नीलाल ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया।
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यात्रा समाप्त होने के बाद शास्त्री घाट पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से बौद्ध अनुयायी शामिल हुए। मुख्य अतिथि एमएस बहल व अखिल भारतीय अनुसूचित जाति, जनजाति कर्मचारी कल्याण एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबा पी भोसले ने कहा कि आपको अपने पाठ्यक्रम के अलावा बाबा साहेब के साहित्य का अध्ययन अवश्य करना चाहिए। बुद्धमित्र मुसाफिर ने कहा कि आज जिस रूप में हम जी रहे हैं उसका सारा श्रेय बाबा साहेब को जाता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता लालमन बौद्ध, संचालन नीलम बौद्ध व गोपाल राम तथा विजय कुमार राव व ओमकारनाथ शास्त्री ने धन्यवाद ज्ञापन किया। संगोष्ठी को अरुण कुमार प्रेमी, बृजेश कुमार भारतीय, नीलम बौद्ध, डॉ. एमजी निगम, डॉ. राहुल राज, अशोक प्रबुद्ध, जयप्रकाश, सत्यप्रकाश, डॉ. प्रमोद, डॉ. राकेश, शुभावती, किरन, सुनीता, अनिता, मालती आदि ने संबोधित किया। मालती राव, मुन्नीलाल ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया।
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