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काशी को बचाने के लिए बनना होगा शिव
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वाराणसी। काशी में रहना, बाबा विश्वनाथ की पूजा, गंगा जल का आचमन और संत समागम ये चार सुख अद्भुत हैं। यहां एक अद्भुत चुम्बकीय शक्ति है जो लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। काशी की भूगर्भीय संरचना ऐसी है कि वो गंगा को अपने पास रखती है। गंगा पूरे भारत को आपस में जोड़ने की अद्भुत सांस्कृतिक कड़ी है। गंगा बनारस की लाइफ लाइन है। उक्त बातें काशीकथा कार्यशाला के चौथे दिन प्रो. एसएन उपाध्याय ने कहीं।
कार्यशाला के प्रथम सत्र में काशी में पर्यावरण और जल प्रबंधन विषय पर विचार व्यक्त करते हुए प्रो. उपाध्याय ने कहा कि 19 वीं शताब्दी तक बनारस में तालाबों की एक लंबी शृंखला थी। जिसमें गोदावरी (गोदौलिया), मत्स्योदरी (मछोदरी) आदि थे। बनारस के भूगर्भीय जल का क्षेत्र अब कम हो रहा है। जिसे बचाना होगा। इसके लिए हम सभी को शिव बनना होगा।
दूसरा सत्र युवाओं के नाम रहा जिसमें बनारस की धरोहरों पर छायाचित्र के माध्यम से व्याख्या प्रस्तुत की गई। जिसमें रामनगर की रामलीला पर अरविंद कुमार मिश्र तथा बलराम यादव द्वारा प्रस्तुति दी गई। साथ ही अजय रतन बनर्जी द्वारा बनारस के अन्य ऐतिहासिक धरोहरों के महत्व को छायाचित्र द्वारा बताया गया। अध्यक्षता प्रो. पीके मिश्र, संचालन डॉ. अवधेश दीक्षित तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. विकास सिंह ने किया। इस दौरान आचार्य योगेंद्र, अजय कुमार मौर्य, विनीता, डॉ. कृष्णा सिंह, दीपक तिवारी, विकास गुप्ता, हेबा सईद, अभिषेक यादव, जय प्रकाश चतुर्वेदी, प्रकाश चंद्र पांडेय, उपेंद्र दीक्षित आदि उपस्थित थे।
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कार्यशाला के प्रथम सत्र में काशी में पर्यावरण और जल प्रबंधन विषय पर विचार व्यक्त करते हुए प्रो. उपाध्याय ने कहा कि 19 वीं शताब्दी तक बनारस में तालाबों की एक लंबी शृंखला थी। जिसमें गोदावरी (गोदौलिया), मत्स्योदरी (मछोदरी) आदि थे। बनारस के भूगर्भीय जल का क्षेत्र अब कम हो रहा है। जिसे बचाना होगा। इसके लिए हम सभी को शिव बनना होगा।
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दूसरा सत्र युवाओं के नाम रहा जिसमें बनारस की धरोहरों पर छायाचित्र के माध्यम से व्याख्या प्रस्तुत की गई। जिसमें रामनगर की रामलीला पर अरविंद कुमार मिश्र तथा बलराम यादव द्वारा प्रस्तुति दी गई। साथ ही अजय रतन बनर्जी द्वारा बनारस के अन्य ऐतिहासिक धरोहरों के महत्व को छायाचित्र द्वारा बताया गया। अध्यक्षता प्रो. पीके मिश्र, संचालन डॉ. अवधेश दीक्षित तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. विकास सिंह ने किया। इस दौरान आचार्य योगेंद्र, अजय कुमार मौर्य, विनीता, डॉ. कृष्णा सिंह, दीपक तिवारी, विकास गुप्ता, हेबा सईद, अभिषेक यादव, जय प्रकाश चतुर्वेदी, प्रकाश चंद्र पांडेय, उपेंद्र दीक्षित आदि उपस्थित थे।
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