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प्रयागराज के लिए चलाई जाएंगी 1800 विशेष ट्रेनें
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वाराणसी। प्रयागराज में लग रहे कुंभ मेला के मद्देनजर पूरे देशभर में 1800 विशेष ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। प्रमुख स्नान पर्वों पर 50 लाख से ज्यादा भीड़ होने का आकलन किया गया है। इसके लिए विशेष योजना तैयार की गई है। अगर भीड़ बढ़ती है तो इमरजेंसी प्लान भी तैयार है। वहीं ट्रेनों के कई रैक सुरक्षित रहेंगे, जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर चलाया जाएगा। पहली बार काशी पहुंचे रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विनोद कुमार यादव ने गुरुवार को कैंट रेलवे स्टेशन पर पत्रकारों से यह बात कही।
रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि सवा दो सौ करोड़ की लागत से कैंट रेलवे स्टेशन की सेकेंड एंट्री विकसित की जाएगी। वहीं 100 करोड़ रुपये से मंडुवाडीह, सिटी व सारनाथ स्टेशनों का कायाकल्प किया जा रहा है। कैंट रेलवे स्टेशन से मंडुवाडीह के बीच 11 जनवरी को सीआरएस निरीक्षण किया जाएगा। इसके बाद मंडुवाडीह से इलाहाबाद जंक्शन के बीच चल रहे इलेक्ट्रिफिकेशन के कार्य का सीआरएस निरीक्षण 17 व 18 जनवरी को किया होगा। इसके बाद छपरा से इलाहाबाद और फिर नई दिल्ली के बीच इलेक्ट्रिक ट्रेनों का संचालन बेरोकटोक किया जा सकेगा।
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने कहा कि अभी रेल ट्रैक पर क्षमता से ज्यादा ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। डबलिंग का कार्य पूरा हो जाने के बाद दो गुनी ट्रेनों का संचालन किया जा सकेगा। यार्ड रिमॉडलिंग के कार्य को जल्द पूरा करने का भरोसा भी दिलाया। कैंट रेलवे स्टेशन को इंट्रीग्रेटेड सिक्योरिटी सिस्टम से लैस करने की बात भी उन्होंने कही। इससे पूर्व रेलवे बोर्ड के चेयरमैन इलाहाबाद स्टेशन से विंडो ट्रेलिंग करते हुए मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन पहुंचे। उन्होंने रेलवे के अन्य अधिकारियों के साथ मंडुआडीह स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर आठ तथा नवनिर्मित भवन का निरीक्षण किया। इस दौरान भवन के समीप बने फव्वारे के पास पौधरोपण भी किया। अधिकारियों से मंडुवाडीह स्टेशन पर चल रहे विकास कार्यों के प्रगति के बारे में जानकारी ली। उन्होंने यात्रियों की संरक्षा व सुरक्षा का भी जायजा लिया। इसके बाद वे कैंट रेलवे स्टेशन पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले विकास कार्यों पर आधारित नक्शे को देखा। इसके बाद राइट्स के चल रहे कार्य को देखा। इस दौरान पूर्वोत्तर व उत्तर रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि सवा दो सौ करोड़ की लागत से कैंट रेलवे स्टेशन की सेकेंड एंट्री विकसित की जाएगी। वहीं 100 करोड़ रुपये से मंडुवाडीह, सिटी व सारनाथ स्टेशनों का कायाकल्प किया जा रहा है। कैंट रेलवे स्टेशन से मंडुवाडीह के बीच 11 जनवरी को सीआरएस निरीक्षण किया जाएगा। इसके बाद मंडुवाडीह से इलाहाबाद जंक्शन के बीच चल रहे इलेक्ट्रिफिकेशन के कार्य का सीआरएस निरीक्षण 17 व 18 जनवरी को किया होगा। इसके बाद छपरा से इलाहाबाद और फिर नई दिल्ली के बीच इलेक्ट्रिक ट्रेनों का संचालन बेरोकटोक किया जा सकेगा।
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रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने कहा कि अभी रेल ट्रैक पर क्षमता से ज्यादा ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। डबलिंग का कार्य पूरा हो जाने के बाद दो गुनी ट्रेनों का संचालन किया जा सकेगा। यार्ड रिमॉडलिंग के कार्य को जल्द पूरा करने का भरोसा भी दिलाया। कैंट रेलवे स्टेशन को इंट्रीग्रेटेड सिक्योरिटी सिस्टम से लैस करने की बात भी उन्होंने कही। इससे पूर्व रेलवे बोर्ड के चेयरमैन इलाहाबाद स्टेशन से विंडो ट्रेलिंग करते हुए मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन पहुंचे। उन्होंने रेलवे के अन्य अधिकारियों के साथ मंडुआडीह स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर आठ तथा नवनिर्मित भवन का निरीक्षण किया। इस दौरान भवन के समीप बने फव्वारे के पास पौधरोपण भी किया। अधिकारियों से मंडुवाडीह स्टेशन पर चल रहे विकास कार्यों के प्रगति के बारे में जानकारी ली। उन्होंने यात्रियों की संरक्षा व सुरक्षा का भी जायजा लिया। इसके बाद वे कैंट रेलवे स्टेशन पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले विकास कार्यों पर आधारित नक्शे को देखा। इसके बाद राइट्स के चल रहे कार्य को देखा। इस दौरान पूर्वोत्तर व उत्तर रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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