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दुर्लभ संयोग में हुआ अस्थि विसर्जन
Updated Sun, 26 Aug 2018 01:36 AM IST
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वाराणसी। चतुर्दशी तिथि का शोभन योग, सावन माह, शिव की नगरी, शनिवार का दिन, मां गंगा की गोद, मूसलाधार बारिश...। इस दुर्लभ संयोग में भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थियों को मोक्ष की कामना से यहां विसर्जित किया गया।
बीएचयू के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश प्रसाद मिश्र और ज्योतिषी कंचन चतुर्वेदी ने बताया कि शिव पुराण में उल्लेख है कि तिथियों में चतुर्दशी शंकर का दिन है। शाम पौने छह से सवा छह बजे के बीच अस्थि विसर्जन के दौरान शोभन योग था। इसे शुभ माना जाता है। शनिवार के दिन चंद्रमा राशि पर मोक्षदायिनी गंगा में बारिश के बीच विसर्जन बहुत शुभ है। अस्थियां विसर्जित होने के बाद बारिश की रफ्तार कम हुई।
इससे पूर्व फूलपुर से राजेंद्र प्रसाद घाट के बीच कई स्थानों पर 11, 21 और 51 ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना कराई। जिले की सीमा में प्रवेश के साथ ही कभी धीमी तो कभी तेज गति से मेघ बरसने के बावजूद लोग यात्रा से लोग जुड़ते चले गए और कारवां बन गया। कोई गाड़ी तो कोई पैदल ही यात्रा के साथ चला। 32 स्थानों पर पुष्पार्चन के अलावा घाट तक महिलाएं छतों से पुष्पवर्षा कर रही थीं। सपा, कांग्रेस सहित कई पार्टियों ने जगह-जगह पुष्प चढ़ाएं। कई जगह हिंदुओं के साथ-साथ मुस्लिमों के साथ-साथ सिख और ईसाई समुदाय के लोगों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए।
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बीएचयू के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश प्रसाद मिश्र और ज्योतिषी कंचन चतुर्वेदी ने बताया कि शिव पुराण में उल्लेख है कि तिथियों में चतुर्दशी शंकर का दिन है। शाम पौने छह से सवा छह बजे के बीच अस्थि विसर्जन के दौरान शोभन योग था। इसे शुभ माना जाता है। शनिवार के दिन चंद्रमा राशि पर मोक्षदायिनी गंगा में बारिश के बीच विसर्जन बहुत शुभ है। अस्थियां विसर्जित होने के बाद बारिश की रफ्तार कम हुई।
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इससे पूर्व फूलपुर से राजेंद्र प्रसाद घाट के बीच कई स्थानों पर 11, 21 और 51 ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना कराई। जिले की सीमा में प्रवेश के साथ ही कभी धीमी तो कभी तेज गति से मेघ बरसने के बावजूद लोग यात्रा से लोग जुड़ते चले गए और कारवां बन गया। कोई गाड़ी तो कोई पैदल ही यात्रा के साथ चला। 32 स्थानों पर पुष्पार्चन के अलावा घाट तक महिलाएं छतों से पुष्पवर्षा कर रही थीं। सपा, कांग्रेस सहित कई पार्टियों ने जगह-जगह पुष्प चढ़ाएं। कई जगह हिंदुओं के साथ-साथ मुस्लिमों के साथ-साथ सिख और ईसाई समुदाय के लोगों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए।
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