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बीएचयू के शताब्दी वर्ष पर डाक टिकट जारी
Updated Thu, 29 Jun 2017 02:23 AM IST
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वाराणसी। बीएचयू के शताब्दी वर्ष की स्मृतियों को संजोने के लिए बुधवार को डाक टिकट जारी किया गया। स्वतंत्रता भवन में आयोजित समारोह में संचार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने रिमोट के जरिए इसका विमोचन किया। पांच और पंद्रह रुपये के डाक टिकट जारी किए गए हैं। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बीएचयू केवल एक विश्वविद्यालय ही नहीं बल्कि राष्ट्र की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। महामना मदन मोहन मालवीय के सपनों को साकार करते हुए इस विश्वविद्यालय ने राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाई है।
संचार मंत्रालय की ओर से आयोजित कार्यक्रम में सिन्हा ने कहा कि दुनिया में कई विश्वविद्यालय सरकारी अनुदानों पर बने हैं लेकिन यह पहला ऐसा विश्वविद्यालय है जो राष्ट्र के सहयोग से बना है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के नाम पर देश में जितने भी संस्थान संचालित हैं, उनको स्थापित करने में बीएचयू के प्रतिभावान छात्रों की बड़ी भूमिका रही है। बीएचयू के पूर्व छात्र के रूप में सिन्हा ने कहा कि संस्थान में आने के बाद स्वर्ग जैसी अनुभूति होती है। कहा-जिस प्रकार मां का ऋण कभी नहीं चुकाया जा सकता, उसी तरह बीएचयू के ऋण से भी उऋण नहीं हुआ जा सकता। बीएचयू में वह क्षमता है, जिसके दम पर वह आने वाले समय में विश्व के सर्वोत्तम विश्वविद्यालय के रूप में अपने को प्रतिस्थापित कर सकता है।
अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने कहा कि बीएचयू की स्थापना राष्ट्र निर्माण के लिए हुई थी और अपने इस उद्देश्य के प्रति विश्वविद्यालय समर्पित है। सरकार ने महामना को भारत रत्न देकर सराहनीय पहल की है। अतिथियों का स्वागत कला संकाय प्रमुख प्रो. कुमार पंकज, धन्यवाद ज्ञापन छात्र अधिष्ठाता प्रो. एम के सिंह ने किया। इस दौरान डाक विभाग के चीफ पोस्ट मास्टर जनरल यूपी सर्किल वाईपी राय, निदेशक सुनील कुमार राय, प्रवर अधीक्षक डाक अभिनव प्रताप सिंह, जीएम बीएसएनएल केपी सिंह, बीएचयू कुलसचिव डॉ. नीरज त्रिपाठी, छन्नू लाल मिश्र, विधायक रविंद्र जायसवाल, सुरेंद्र नारायण सिंह आदि मौजूद थे।
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संचार मंत्रालय की ओर से आयोजित कार्यक्रम में सिन्हा ने कहा कि दुनिया में कई विश्वविद्यालय सरकारी अनुदानों पर बने हैं लेकिन यह पहला ऐसा विश्वविद्यालय है जो राष्ट्र के सहयोग से बना है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के नाम पर देश में जितने भी संस्थान संचालित हैं, उनको स्थापित करने में बीएचयू के प्रतिभावान छात्रों की बड़ी भूमिका रही है। बीएचयू के पूर्व छात्र के रूप में सिन्हा ने कहा कि संस्थान में आने के बाद स्वर्ग जैसी अनुभूति होती है। कहा-जिस प्रकार मां का ऋण कभी नहीं चुकाया जा सकता, उसी तरह बीएचयू के ऋण से भी उऋण नहीं हुआ जा सकता। बीएचयू में वह क्षमता है, जिसके दम पर वह आने वाले समय में विश्व के सर्वोत्तम विश्वविद्यालय के रूप में अपने को प्रतिस्थापित कर सकता है।
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अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने कहा कि बीएचयू की स्थापना राष्ट्र निर्माण के लिए हुई थी और अपने इस उद्देश्य के प्रति विश्वविद्यालय समर्पित है। सरकार ने महामना को भारत रत्न देकर सराहनीय पहल की है। अतिथियों का स्वागत कला संकाय प्रमुख प्रो. कुमार पंकज, धन्यवाद ज्ञापन छात्र अधिष्ठाता प्रो. एम के सिंह ने किया। इस दौरान डाक विभाग के चीफ पोस्ट मास्टर जनरल यूपी सर्किल वाईपी राय, निदेशक सुनील कुमार राय, प्रवर अधीक्षक डाक अभिनव प्रताप सिंह, जीएम बीएसएनएल केपी सिंह, बीएचयू कुलसचिव डॉ. नीरज त्रिपाठी, छन्नू लाल मिश्र, विधायक रविंद्र जायसवाल, सुरेंद्र नारायण सिंह आदि मौजूद थे।
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