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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   38 days later did not even know who was driving

38 दिन बाद भी नहीं पता गाड़ी चला कौन रहा था

Mon, 06 Feb 2017 02:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Mon, 06 Feb 2017 02:29 AM IST
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जौनपुर की सदर सीट से कांग्रेस विधायक एवं प्रत्याशी नदीम जावेद जिस प्राडो गाड़ी से चलते हैं, उसके असली नंबर की जांच के मामले में पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। इस बीच हादसे के 38 दिन बाद पुलिस उस समय गाड़ी चला रहे व्यक्ति का भी पता नहीं लगा सकी है। यह हाल तब है जब विधायक की गाड़ी में मौजूद एक शख्स की ओर दर्ज कराए गए मुकदमे में स्पष्ट उल्लेख था कि दुर्घटना के समय गाड़ी में नदीम जावेद, दो गनर समेत चार लोग सवार थे। कागजों में दर्ज प्राडो के मालिक जावेद इकबाल से विधायक से क्या रिश्ते हैं, इस बाबत भी पुलिस को कुछ नहीं पता। बहरहाल, पुलिस ने प्राडो गाड़ी के अज्ञात चालक के खिलाफ पूर्व में दर्ज मुकदमे में धारा 419, 420, 467, 468 बढ़ा दी है। मुकदमे में गाड़ी मालिक जावेद इकबाल का नाम भी शामिल किया गया जाएगा। चालक पर हादसे और मालिक पर धोखाधड़ी और जालसाजी का आरोप है। 
 

 

विधायक नदीम जावेद 30 दिसंबर को प्राडो गाड़ी से बाबतपुर एयरपोर्ट से जौनपुर जा रहे थे। बाबतपुर के  पास रमईपुर में सामने से आ रही आल्टो कार से प्राडो की टक्कर हो गई। हादसे में विधायक समेत गाड़ी में सवार चारो लोग जख्मी हो गए। आल्टो कार सवार गाजीपुर  के शेरपुर निवासी शिक्षक प्रवीण कुमार राय और उनके मित्र कमलेश भी जख्मी हो गए। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ (नाम, पता अज्ञात) फूलपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया।  

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प्रवीण के अधिवक्ता का आरोप था कि प्राडो पर फर्जी नंबर लगा है। मामले की जांच डीआईजी रेंज विजय भूषण को सौंपी गई। जांच में एक टीम चंडीगढ़ गई। पता चला कि एचआर 72 0010 नंबर गुड़गांव के राजेश यादव की फार्च्यूनर का है। प्राडो का नंबर (एचआर 70 सी 7425) है। जांच में फर्जीवाड़ा सामने आने पर पुलिस ने अज्ञात चालक के  खिलाफ धोखाधड़ी की धाराएं तो बढ़ाई लेकिन चालक का पता नहीं लगा सकी। रजिस्ट्रेशन पेपर के मुताबिक प्राडो के मालिक गुड़गांव निवासी जावेद इकबाल हैं। बताया जाता रहा कि जावेद इकबाल और नदीम जावेद रिश्तेदार हैं, लेकिन रिश्ते की पड़ताल पुलिस नहीं कर सकी है। बता दें नदीम जावेद ने 2012 के विधानसभा चुनाव में नामांकन पत्र में पिता का नाम जावेद इकबाल भरा था।

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30 दिसंबर को हादसे के बाद दोनों तरफ से क्रॉस एफआईआर दर्ज कराई गई थी। प्राडो सवार जौनपुर निवासी मुकेश पांडेय की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे में बताया गया था कि घटना के दौरान गाड़ी में उनके अलावा विधायक नदीम जावेद, दो गनर आफताब और इंतखाब थे। गाड़ी इन्हीं चारो में से कोई एक चला रहा था। 13 जनवरी को जौनपुर के खेतासराय निवासी एहसान अहमद की ओर से एसीजेएम षष्टम की अदालत में आवेदन देकर कहा गया कि वह प्राडो लैंड क्रूजर का चालक है। हादसे के समय वही गाड़ी चल रहा था। हादसे में उसका कोई अपराध नहीं है। 


 

 

सूत्रों की मानें तो एहसान अहमद ने खुद को चालक बताकर जमानत के लिए ऐसा किया है। सवाल यह है कि हादसे के दौरान प्राडो में चार लोग सवार थे और चारों लोग घायल हो गए थे तो उनमें से गाड़ी कौन चला रहा था? क्या गाड़ी चलाने वाले के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस था? अगर इनमें सभी के पास वैध लाइसेंस थे तो इन चारों को बचाने के लिए दुर्घटना के बाद नियोजित तरीके से हादसे की जिम्मेदारी लेने के लिए नए व्यक्ति को तो आगे नहीं किया जा रहा है?

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