{"_id":"5ad509a94f1c1b9f098b4ed6","slug":"31523911081-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सॉफ्ट स्टोन जाली वर्क, वाल हैंगिंग का जीआई पंजीकरण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सॉफ्ट स्टोन जाली वर्क, वाल हैंगिंग का जीआई पंजीकरण
Updated Tue, 17 Apr 2018 02:08 AM IST
विज्ञापन
वाराणसी। हस्तकला और उत्कृष्ट कारीगरी के लिए बनारस सहित पूर्वांचल का दबदबा बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में दुनिया में बढ़ता ही जा रहा है। इसी क्रम में वाराणसी के सॉफ्ट स्टोन जाली वर्क और गाजीपुर के वाल हैंगिंग को देश के बौद्धिक संपदा अधिकार में शामिल कर लिया गया है। जीआई विशेषज्ञ और ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन के निदेशक डॉ. रजनीकांत ने सोमवार को यह जानकारी दी।
डॉ. रजनीकांत ने बताया कि नाबार्ड के सहयोग से सॉफ्ट स्टोन के लिए स्थानीय शिल्पियों की संस्था दी बनारस हैंडीक्राफ्ट डेवलपमेंट सोसाइटी रामनगर व बनारस हैंडीक्राफ्ट डेवलपमेंट इंडस्ट्रियल कोआपरेटिव सोसाइटी और गाजीपुर की वाल हैंगिंग के लिए निशा क्राफ्ट विकास समिति सैदपुर ने 18 जुलाई, 2016 को जीआई रजिस्ट्री चेन्नई में दाखिल किया था।
20 महीने की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद दोनों को जीआई उत्पाद का दर्जा मिल गया है। इसके चलते आने वाले समय में दोनों शिल्पों के लिए प्रदेश और केंद्र सरकार से विशेष सहयोगा मिलेगा। इन दोनों शिल्प की नकल पूरी दुनिया में नहीं की जा सकेगी और निर्यात बढ़ जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
डॉ. रजनीकांत ने बताया कि नाबार्ड के सहयोग से सॉफ्ट स्टोन के लिए स्थानीय शिल्पियों की संस्था दी बनारस हैंडीक्राफ्ट डेवलपमेंट सोसाइटी रामनगर व बनारस हैंडीक्राफ्ट डेवलपमेंट इंडस्ट्रियल कोआपरेटिव सोसाइटी और गाजीपुर की वाल हैंगिंग के लिए निशा क्राफ्ट विकास समिति सैदपुर ने 18 जुलाई, 2016 को जीआई रजिस्ट्री चेन्नई में दाखिल किया था।
विज्ञापन
20 महीने की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद दोनों को जीआई उत्पाद का दर्जा मिल गया है। इसके चलते आने वाले समय में दोनों शिल्पों के लिए प्रदेश और केंद्र सरकार से विशेष सहयोगा मिलेगा। इन दोनों शिल्प की नकल पूरी दुनिया में नहीं की जा सकेगी और निर्यात बढ़ जाएगा।
विज्ञापन