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बाबा विश्वनाथ को लगेगा 108 किलो खिचड़ी का भोग
Updated Sat, 13 Jan 2018 02:09 AM IST
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वाराणसी। मकर संक्रांति पर बाबा विश्वनाथ के दरबार में 108 किलो खिचड़ी का भोग लगाया जाएगा। संक्रांति के दिन मध्याह्न आरती में बाबा को भोग लगाने के बाद खिचड़ी का वितरण भक्तों में किया जाएगा। खिचड़ी का भोग पकाने के लिए ज्ञानवापी परिसर स्थित मिर्जापुर मठ के पास ही चूल्हा लगाया जाएगा। यह जानकारी मुख्य कार्यपालक अधिकारी एस.एन. त्रिपाठी ने दी। उन्होंने बताया कि मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण मुख्य यजमान होंगे।
कमिश्नर ने बताया कि विश्वनाथ मंदिर के इतिहास में यह पहला मौका होगा जब बाबा को मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी का भोग लगाया जाएगा। हर त्योहार पर विशेष भोग लगता और उसे भक्तों में वितरित किया जाता है। काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए यह एक नई पहल होगी। विश्वनाथ मंदिर का खिचड़ी से कोई खास सरोकार कभी नहीं रहा है, जबकि गोरक्षनाथ मंदिर और खिचड़ी के बीच गहरा संबंध है। ऐसे में गोरक्षनाथ मंदिर में मकर संक्रांति को विशेष उत्सव मनाया जाता है।
श्रद्धालुओं का रेला उमड़ता है वो बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाते हैं और मंदिर प्रशासन की ओर से भक्तों के बीच खिचड़ी का प्रसाद वितरित किया जाता है। वहां यह मेला महीने भर तक चलता है। इस बार यह व्यवस्था भी की जाएगी कि सरस्वती फाटक और ढुंढिराज गणेश की ओर से विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश करने वाले दर्शनार्थी ज्ञानवापी द्वार से बाहर निकलें। बाहर निकलते समय भक्तों को प्रसाद दिया जाएगा। इन भक्तों की निकासी छत्ताद्वार और नीलकंठ द्वार से प्रस्तावित है।
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कमिश्नर ने बताया कि विश्वनाथ मंदिर के इतिहास में यह पहला मौका होगा जब बाबा को मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी का भोग लगाया जाएगा। हर त्योहार पर विशेष भोग लगता और उसे भक्तों में वितरित किया जाता है। काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए यह एक नई पहल होगी। विश्वनाथ मंदिर का खिचड़ी से कोई खास सरोकार कभी नहीं रहा है, जबकि गोरक्षनाथ मंदिर और खिचड़ी के बीच गहरा संबंध है। ऐसे में गोरक्षनाथ मंदिर में मकर संक्रांति को विशेष उत्सव मनाया जाता है।
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श्रद्धालुओं का रेला उमड़ता है वो बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाते हैं और मंदिर प्रशासन की ओर से भक्तों के बीच खिचड़ी का प्रसाद वितरित किया जाता है। वहां यह मेला महीने भर तक चलता है। इस बार यह व्यवस्था भी की जाएगी कि सरस्वती फाटक और ढुंढिराज गणेश की ओर से विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश करने वाले दर्शनार्थी ज्ञानवापी द्वार से बाहर निकलें। बाहर निकलते समय भक्तों को प्रसाद दिया जाएगा। इन भक्तों की निकासी छत्ताद्वार और नीलकंठ द्वार से प्रस्तावित है।
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