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भदोही में 300 दलितों ने किया धर्मांतरण, अपनाया बौद्ध धर्म
ब्यूरो,अमर उजाला,भदोही
Updated Mon, 23 Oct 2017 02:06 PM IST
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भदोही के कसिदहां गांव की दलित बस्ती का मामला
- फोटो : demo
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यूपी के भदोही जिले के एक गांव की दलित बस्ती में तीन दिन में 300 लोगों ने बौर्ध धर्म अपना लिया। सारनाथ से आए बौद्ध धर्म के अनुयायी की देखरेख में पूरी कवायद की गई। उसके बाद बस्ती के लोगों ने हिंदू देवी-देवताओं के चित्र नहर में विसर्जित कर दिए।
ज्ञानपुर से करीब पांच किमी दूर स्थित कसिदहां गांव की दलित बस्ती में रविवार को 100 लोगों ने हिंदू धर्म त्याग कर बौद्ध धर्म अपना लिया। पिछले तीन दिनों में पूरी बस्ती के कुल 300 लोगों ने बौद्ध धर्म अपनाया है।
सारनाथ से आए बुद्ध घोष राम वचन, विश्व बौद्ध महासभा के अध्यक्ष आलोक बौद्ध, अरविंद बौद्ध की देखरेख में बस्तीवासियों ने धर्म परिवर्तन किया।
बस्ती के कोमल राम, सुरेंद्र कुमार, कृपाशंकर महेंद्र कुमार, जगदीश कुमार, राजकुमार, रामजीत, कैैलाश, चिरंजीव, रमाशंकर, संतोष कुमार, राम नारायण, संदीप, प्रदीप, राजन, राजू समेत अन्य लोगों ने बौद्ध धर्म अपनाया। रविवार को जुलूस की शक्ल में बस्ती के लोगों ने हिंदू देवी देवताओं के चित्र और प्रतिमाएं नहर में विसर्जित कर दीं।
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ज्ञानपुर से करीब पांच किमी दूर स्थित कसिदहां गांव की दलित बस्ती में रविवार को 100 लोगों ने हिंदू धर्म त्याग कर बौद्ध धर्म अपना लिया। पिछले तीन दिनों में पूरी बस्ती के कुल 300 लोगों ने बौद्ध धर्म अपनाया है।
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सारनाथ से आए बुद्ध घोष राम वचन, विश्व बौद्ध महासभा के अध्यक्ष आलोक बौद्ध, अरविंद बौद्ध की देखरेख में बस्तीवासियों ने धर्म परिवर्तन किया।
बस्ती के कोमल राम, सुरेंद्र कुमार, कृपाशंकर महेंद्र कुमार, जगदीश कुमार, राजकुमार, रामजीत, कैैलाश, चिरंजीव, रमाशंकर, संतोष कुमार, राम नारायण, संदीप, प्रदीप, राजन, राजू समेत अन्य लोगों ने बौद्ध धर्म अपनाया। रविवार को जुलूस की शक्ल में बस्ती के लोगों ने हिंदू देवी देवताओं के चित्र और प्रतिमाएं नहर में विसर्जित कर दीं।
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इस कारण से बदला अपना धर्म
ग्राम प्रधान लौधर मौर्य का कहना है कि गांव की दलित बस्ती में बौद्ध धर्म के कुछ अनुयायी आए थे। वह किसलिए आए थे, इसकी जानकारी नहीं है। इस मामले में भाजपा जिलाध्यक्ष हौसिला पाठक ने कहा कि वह बस्ती में जाकर लोगों की समस्याएं सुनेंगे। उन्हें समझाने का प्रयास किया जाएगा।
कसिदहां दलित बस्ती निवासी एवं बौद्ध धर्म अपनाने वाले अधिवक्ता कोमल राम और सुरेंद्र कुमार ने कहा कि हिंदू धर्म से उनका कोई बैर नहीं था। उत्पीड़न से बचने के लिए धर्म परिवर्तन किया।
कहा कि कहीं सुनवाई नहीं हो रही थी। हर वर्ग के लोग दलितों को प्रताड़ित करते थे। इससे परेशान होकर बस्ती के लोगों ने बौद्ध धर्म अपना लिया।
कसिदहां दलित बस्ती निवासी एवं बौद्ध धर्म अपनाने वाले अधिवक्ता कोमल राम और सुरेंद्र कुमार ने कहा कि हिंदू धर्म से उनका कोई बैर नहीं था। उत्पीड़न से बचने के लिए धर्म परिवर्तन किया।
कहा कि कहीं सुनवाई नहीं हो रही थी। हर वर्ग के लोग दलितों को प्रताड़ित करते थे। इससे परेशान होकर बस्ती के लोगों ने बौद्ध धर्म अपना लिया।