{"_id":"5c7d89c0bdec2213f32f61ac","slug":"21551731136-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"माता गौरा संग ब्याह रचाने निकले बाबा भोलेनाथ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
माता गौरा संग ब्याह रचाने निकले बाबा भोलेनाथ
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। शिवरात्रि पर महादेव माता गौरा संग ब्याह रचाने के लिए निकले। बरती में बाबा भूत, पिशाच, राक्षस, बैताल लेकर जब नगर में निकली तो हर कोई बस देखता रह गया।
शिव बरात सोमवार को शाम सात बजे दारानगर स्थित महा मृत्युंजय मंदिर और तिलभांडेश्वर मंदिर से निकली, जिसमे हाथी, घोड़ा, ऊंट, रथों पर सवार बाबा भोले नाथ और विदेशी अतिथि शामिल रहे। इसमें डमरू दल से लेकर करीब एक दर्जन बैंड पार्टियां शामिल रही। बैलगाड़ी पर किन्नर नृत्य करते हुए चल रहे थे । बाबा की बारात में बज रहे डीजे पर श्रद्धालु बाबा का भक्ति की मस्ती में झूमते हुए चल रहे थे।
बरात दारानगर स्थित महामृत्युंजय, मैदागिन, बुलानाला, नीची बाग, चौक होते हुए डेढ़सी के पुल पर जाकर समाप्त हुई। बारात में मदारी और सपेरे थे जो गले मे सर्प लटकाकर बाबा के बाराती बने हुए थे। इस बारात में देवस्वरूप की झांकिया थीं जिसमे सभी देवस्वरूप शामिल रहे। बारातियों का स्वागत बनारसी ठंडई से किया गया। बारात को देखने के लिए लोग सड़कों के किनारे खड़े रहे और बाबा के बारात का आनन्द लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
शिव बरात सोमवार को शाम सात बजे दारानगर स्थित महा मृत्युंजय मंदिर और तिलभांडेश्वर मंदिर से निकली, जिसमे हाथी, घोड़ा, ऊंट, रथों पर सवार बाबा भोले नाथ और विदेशी अतिथि शामिल रहे। इसमें डमरू दल से लेकर करीब एक दर्जन बैंड पार्टियां शामिल रही। बैलगाड़ी पर किन्नर नृत्य करते हुए चल रहे थे । बाबा की बारात में बज रहे डीजे पर श्रद्धालु बाबा का भक्ति की मस्ती में झूमते हुए चल रहे थे।
विज्ञापन
बरात दारानगर स्थित महामृत्युंजय, मैदागिन, बुलानाला, नीची बाग, चौक होते हुए डेढ़सी के पुल पर जाकर समाप्त हुई। बारात में मदारी और सपेरे थे जो गले मे सर्प लटकाकर बाबा के बाराती बने हुए थे। इस बारात में देवस्वरूप की झांकिया थीं जिसमे सभी देवस्वरूप शामिल रहे। बारातियों का स्वागत बनारसी ठंडई से किया गया। बारात को देखने के लिए लोग सड़कों के किनारे खड़े रहे और बाबा के बारात का आनन्द लिया।
विज्ञापन