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औद्योगिक विकास में आईआईटी देगा तकनीकी सहारा
Updated Sat, 01 Sep 2018 01:32 AM IST
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वाराणसी। आईआईटी(बीएचयू) की तरफ से आयोजित तीन दिवसीय ‘इंडस्ट्री-इंस्टीट्यूट-सोसाइटी कानक्लेव’ की शुरुआत एबीएलटी सभागार में हुई। इस समागम का उद्देश्य यहां से निकले सुझावों व अनुभवों के आधार पर आईआईटी(बीएचयू) समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपना तकनीकी सहयोग देगा।
निदेशक प्रो. प्रमोद कुमार जैन की अध्यक्षता में शुरू हुए तीन दिवसीय कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में डीडीएम नाबार्ड सुशील कुमार तिवारी, उप निदेशक एमएसएमई वीके वर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। आईआईटी(बीएचयू) के निदेशक ने कहा कि समाज के सभी वर्गों से बिना संवाद स्थापित किए किसी प्रकार की तकनीकी संवर्धन अथवा अनुप्रयोग की कोशिशें कभी भी सार्थक नहीं हो सकती। इसीलिए यह आयोजन हो रहा है। समागम के संयोजक प्रो. प्रदीप कुमार मिश्र ने संस्थान-समाज और उद्योग के आपसी संवाद को विकास की पहली शर्त बताया। नवागत निदेशक प्रो. प्रमोद कुमार जैन ने लघु एवं मध्यम उद्योग, किसानों तथा समाजिक क्षेत्र में काम कर रहे गैर-सरकारी संगठनों के तीन दिवसीय इस जुटान की विस्तृत रूप रेखा तथा भूमिका व उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला।
नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक ने उत्पाद के पंजीकरण के रूप में वाराणसी के 17 उत्पादों का उल्लेख किया। कारीगरी को बढ़ावा देने के लिए शिल्पियों के प्रयुक्त औजारों का तकनीकि संवर्धन इस क्षेत्र में आईआईटी(बीएचयू) के मदद तथा मार्ग दर्शन को आवश्यक बताया।
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उपनिदेशक एमएसएमई ने कहा कि बाजार का समुचित ज्ञान (मार्केटिंग) के न होने को कारण कई बार कुशल कारीगर बड़ी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाते हैं। धन्यवाद प्रो. प्रदीप श्रीवास्तव ने किया। इस कार्यक्रम में प्रो. एसएन उपाध्याय, प्रो. आरसी तिवारी, प्रो. एएसके सिन्हा, प्रो. राजीव प्रकाश, प्रो. रमेश चंद्र, प्रो. अनिल चौहान, प्रो. वीके मिश्र, डॉ. जहीर खान, डॉ. रूचिर गुप्ता, डॉ. अवधेश दीक्षित, दया शंकर मिश्र इत्यादि लोग प्रमुख रहे। वहीं
समागम का दूसरा व तीसरा सत्र हस्त शिल्प एवं कुटीर उद्योग तथा कृषि उत्पाद पर केंद्रीय रहा। वाराणसी व आस-पास के जिलों से लगभग 100 की संख्या में संबंधित क्षेत्र से प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा अपनी समस्याएं व आईआईटी(बीएचयू) से अपेक्षाएं बताईं। मृदा वैज्ञानिक प्रो. रमेश चंद्र तिवारी, आईटी बीएचयू के पूर्व निदेशक प्रो एसएन उपाध्याय तो वहीं कारीगरों व कृषकों में राम कुमार राय, जय प्रकाश सिंह, सोनू पाठक, बच्चे लाल मौर्या, कैलाश यादव, चंद्र शेखर आदि शामिल रहे।
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निदेशक प्रो. प्रमोद कुमार जैन की अध्यक्षता में शुरू हुए तीन दिवसीय कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में डीडीएम नाबार्ड सुशील कुमार तिवारी, उप निदेशक एमएसएमई वीके वर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। आईआईटी(बीएचयू) के निदेशक ने कहा कि समाज के सभी वर्गों से बिना संवाद स्थापित किए किसी प्रकार की तकनीकी संवर्धन अथवा अनुप्रयोग की कोशिशें कभी भी सार्थक नहीं हो सकती। इसीलिए यह आयोजन हो रहा है। समागम के संयोजक प्रो. प्रदीप कुमार मिश्र ने संस्थान-समाज और उद्योग के आपसी संवाद को विकास की पहली शर्त बताया। नवागत निदेशक प्रो. प्रमोद कुमार जैन ने लघु एवं मध्यम उद्योग, किसानों तथा समाजिक क्षेत्र में काम कर रहे गैर-सरकारी संगठनों के तीन दिवसीय इस जुटान की विस्तृत रूप रेखा तथा भूमिका व उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला।
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नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक ने उत्पाद के पंजीकरण के रूप में वाराणसी के 17 उत्पादों का उल्लेख किया। कारीगरी को बढ़ावा देने के लिए शिल्पियों के प्रयुक्त औजारों का तकनीकि संवर्धन इस क्षेत्र में आईआईटी(बीएचयू) के मदद तथा मार्ग दर्शन को आवश्यक बताया।
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उपनिदेशक एमएसएमई ने कहा कि बाजार का समुचित ज्ञान (मार्केटिंग) के न होने को कारण कई बार कुशल कारीगर बड़ी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाते हैं। धन्यवाद प्रो. प्रदीप श्रीवास्तव ने किया। इस कार्यक्रम में प्रो. एसएन उपाध्याय, प्रो. आरसी तिवारी, प्रो. एएसके सिन्हा, प्रो. राजीव प्रकाश, प्रो. रमेश चंद्र, प्रो. अनिल चौहान, प्रो. वीके मिश्र, डॉ. जहीर खान, डॉ. रूचिर गुप्ता, डॉ. अवधेश दीक्षित, दया शंकर मिश्र इत्यादि लोग प्रमुख रहे। वहीं
समागम का दूसरा व तीसरा सत्र हस्त शिल्प एवं कुटीर उद्योग तथा कृषि उत्पाद पर केंद्रीय रहा। वाराणसी व आस-पास के जिलों से लगभग 100 की संख्या में संबंधित क्षेत्र से प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा अपनी समस्याएं व आईआईटी(बीएचयू) से अपेक्षाएं बताईं। मृदा वैज्ञानिक प्रो. रमेश चंद्र तिवारी, आईटी बीएचयू के पूर्व निदेशक प्रो एसएन उपाध्याय तो वहीं कारीगरों व कृषकों में राम कुमार राय, जय प्रकाश सिंह, सोनू पाठक, बच्चे लाल मौर्या, कैलाश यादव, चंद्र शेखर आदि शामिल रहे।