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गैंगरेप के मामले में समझौता करने का बनाया जा रहा दबाव
Updated Fri, 06 Jul 2018 02:08 AM IST
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वाराणसी। छावनी क्षेत्र स्थित होटल रेडिसन में 27 मार्च को सामूहिक दुराचार की शिकार पीड़िता का आरोप है कि उस पर समझौता करने का दबाव बनाया जा रहा है। पीड़िता का कहना है कि यदि पुलिस अदालत में प्रभावी तरीके से पैरवी करती तो आरोपियों को कठोर सजा मिलती लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। पीड़िता ने गुरुवार को जारी विज्ञप्ति के माध्यम से बताया कि जिला पुलिस की लचर कार्यशैली से आजिज आकर उसने एडीजी जोन और एसएसपी को शिकायती पत्र देकर आरोपियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की गुहार लगाई है।
बाबतपुर एयरपोर्ट में निजी विमानन कंपनी में कार्यरत युवती के साथ सामूहिक दुराचार का मामला सामने आने पर दो अप्रैल को कैंट थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले को लेकर एयरपोर्ट पर कार्यरत डॉ. आशुतोष अस्थाना और इंडो-थाई विमानन कंपनी के मैनेजर सत्येंद्र सिंह और ट्रेवल एजेंट आबिद को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। आबिद और सत्येंद्र को जमानत मिल गई जबकि डॉ. आशुतोष अभी भी जेल में है। पीड़िता का कहना है कि गैंगेस्टर एक्ट की कार्रवाई के बावजूद आबिद और सत्येंद्र खुले में घूम रहे हैं। इसके साथ ही उस पर समझौता करने का दबाव बनाया जा रहा है और वह खुद की जान बचाते फिर रही है।
पीड़िता ने कहा कि सामूहिक दुराचार की वारदात के बाद उसकी नौकरी छूट गई और वह अपनी पढ़ाई नहीं पूरी कर पाई। इसके साथ ही परिवार से भी दूरी बन गई और पुलिस भी उसकी मदद नहीं कर रही है। ऐसी स्थिति में उसे समझ में नहीं आ रहा है कि वो क्या करे। पीड़िता ने मांग की है कि मामले के आरोपियों के खिलाफ अदालत में प्रभावी पैरवी कर पुलिस उन्हें कठोर सजा दिलाए।
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बाबतपुर एयरपोर्ट में निजी विमानन कंपनी में कार्यरत युवती के साथ सामूहिक दुराचार का मामला सामने आने पर दो अप्रैल को कैंट थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले को लेकर एयरपोर्ट पर कार्यरत डॉ. आशुतोष अस्थाना और इंडो-थाई विमानन कंपनी के मैनेजर सत्येंद्र सिंह और ट्रेवल एजेंट आबिद को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। आबिद और सत्येंद्र को जमानत मिल गई जबकि डॉ. आशुतोष अभी भी जेल में है। पीड़िता का कहना है कि गैंगेस्टर एक्ट की कार्रवाई के बावजूद आबिद और सत्येंद्र खुले में घूम रहे हैं। इसके साथ ही उस पर समझौता करने का दबाव बनाया जा रहा है और वह खुद की जान बचाते फिर रही है।
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पीड़िता ने कहा कि सामूहिक दुराचार की वारदात के बाद उसकी नौकरी छूट गई और वह अपनी पढ़ाई नहीं पूरी कर पाई। इसके साथ ही परिवार से भी दूरी बन गई और पुलिस भी उसकी मदद नहीं कर रही है। ऐसी स्थिति में उसे समझ में नहीं आ रहा है कि वो क्या करे। पीड़िता ने मांग की है कि मामले के आरोपियों के खिलाफ अदालत में प्रभावी पैरवी कर पुलिस उन्हें कठोर सजा दिलाए।
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