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पचबहनी स्नान के लिए आस्था का रेला
Updated Wed, 17 Jan 2018 02:29 AM IST
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चौबेपुर। मौनी अमावस्या पर लगने वाले पचबहनी स्नान पर्व पर आस्था का रेला उमड़ पड़ा। महिलाएं सिर पर गठरी लिए मां गंगा के गीत गाते हुए पचबहनी स्नान के घाट की ओर बढ़ रहीं थी। गंगा में डुबकी लगा कर श्रद्धालुओं ने जरूरतमंद लोगों को अन्नदान किया। गौराउपरवार, चन्द्रावती, परनापुर, रामपुर, सरसौल बलुआ घाट पर करीब पांच लाख लोगों ने मिनी कुंभ में डुबकी लगाई।
प्रसिद्ध एतिहासिक पचबहनी स्नान पर्व का काफी महत्व है। यह वही स्थान है जहां मां गंगा की जिद पर भगीरथ को पश्चिम दिशा में जाना पड़ा। बलुआ सरसौल से परनापुर, मुरीदपुर, गौराउपरवार, रामपुर, चंद्रावती तक गंगा पश्चिम दिशा में बहती हैं। यहां स्नान करने के लिए पूर्वांचल भर से लोग आते हैं और अपने परिवार के लिए मन्नत करते हैं। भोर के चार बजे के बाद ही गंगा तटों पर ठहरे लोग कोहरे व ठंड की परवाह किए बगैर आस्था का गोता लगाने लगे। सुबह आठ बजे के बाद लगातार घाटों पर भीड़ लगने लगी जो दोपहर दो बजे तक चली। दोपहर बाद स्नानार्थियों का रेला आसपास के कस्बों चौबेपुर, जाल्हूपुर, भगतुआ, सोनबरसां, चंद्रावती आदि जगहों पर मेले के रूप में परिवर्तित हो गया। महिलाओं ने घरेलू सामानों की जमकर खरीदारी की। घाटों पर सुरक्षा के लिए पुलिस के जवान निगहबानी करते रहे। वहीं गंगा घाटों पर एनडीआरएफ के जवान डटे रहे। पुलिस ने कादीपुर रेलवे क्रासिंग के पास बैरिकेडिंग लगाकर वाहनों को रोक दिया गया था। वहां से महिलाएं गौराउपरवार घाट व परनापुर घाट करीब चार से पांच किलोमीटर पैदल जाकर स्नान कीं। घाटों पर कपड़े बदलने की व्यवस्था न होने से महिलाओं को परेशानी उठानी पड़ी। सोनबरसां में भाजपा कार्यकर्ताओं ने चाय व एनडीआरएफ व कादीपुर खुर्द प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की तरफ से नि:शुल्क चिकित्सा की व्यवस्था थी। वही ग्रामीणों ने भी जगह जगह पुआल व अलाव की व्यवस्था की थी।
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प्रसिद्ध एतिहासिक पचबहनी स्नान पर्व का काफी महत्व है। यह वही स्थान है जहां मां गंगा की जिद पर भगीरथ को पश्चिम दिशा में जाना पड़ा। बलुआ सरसौल से परनापुर, मुरीदपुर, गौराउपरवार, रामपुर, चंद्रावती तक गंगा पश्चिम दिशा में बहती हैं। यहां स्नान करने के लिए पूर्वांचल भर से लोग आते हैं और अपने परिवार के लिए मन्नत करते हैं। भोर के चार बजे के बाद ही गंगा तटों पर ठहरे लोग कोहरे व ठंड की परवाह किए बगैर आस्था का गोता लगाने लगे। सुबह आठ बजे के बाद लगातार घाटों पर भीड़ लगने लगी जो दोपहर दो बजे तक चली। दोपहर बाद स्नानार्थियों का रेला आसपास के कस्बों चौबेपुर, जाल्हूपुर, भगतुआ, सोनबरसां, चंद्रावती आदि जगहों पर मेले के रूप में परिवर्तित हो गया। महिलाओं ने घरेलू सामानों की जमकर खरीदारी की। घाटों पर सुरक्षा के लिए पुलिस के जवान निगहबानी करते रहे। वहीं गंगा घाटों पर एनडीआरएफ के जवान डटे रहे। पुलिस ने कादीपुर रेलवे क्रासिंग के पास बैरिकेडिंग लगाकर वाहनों को रोक दिया गया था। वहां से महिलाएं गौराउपरवार घाट व परनापुर घाट करीब चार से पांच किलोमीटर पैदल जाकर स्नान कीं। घाटों पर कपड़े बदलने की व्यवस्था न होने से महिलाओं को परेशानी उठानी पड़ी। सोनबरसां में भाजपा कार्यकर्ताओं ने चाय व एनडीआरएफ व कादीपुर खुर्द प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की तरफ से नि:शुल्क चिकित्सा की व्यवस्था थी। वही ग्रामीणों ने भी जगह जगह पुआल व अलाव की व्यवस्था की थी।
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