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कैमरा और रिकार्डिगिं युक्त पहला रेल इंजन तैयार
Updated Mon, 15 Jan 2018 02:33 AM IST
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वाराणसी। डीरेका ने कैमरा और रिकॉर्डिगिं सिस्टम से लैस पहला डीजल रेल इंजन तैयार कर लिया है। 4500 हार्स पॉवर क्षमता के इस रेल इंजन का एक-दो दिन में ट्रायल किया जाएगा। कैमरा और रिकॉर्डिगिं सिस्टम से रेल इंजन के लैस होने से दुर्घटना से बचाव की संभावना अधिक रहेगी। साथ ही दुर्घटना होने के बाद में कारणों का पता चल सकेगा।
डुअल मोड रेल इंजन में कुल छह कैमरे और रिकॉर्डिगिं सिस्टम लगाए गए हैं। एक कैब में दो कैमरे अंदर और एक बाहर लगाया गया है। दोनों कैब मिलाकर कुल छह कैमरे हैं। रेल हादसों को रोकने के लिए रेल मंत्रालय ने ट्रेन के इंजन में कैमरा लगाने का निर्णय लिया है। ट्रेन के इंजन में अलार्म सिस्टम के साथ कैमरे में चेहरा पहचानने वाले सॉफ्टवेयर्स भी लगाए जाएंगे। इससे रेल दुर्घटना में कमी आएगी क्योंकि ये सॉफ्टवेयर पायलट के सोने पर कंट्रोल रूम को अलर्ट भजेंगे। यह तकनीक डीजल लोकोमोटिव वर्क्स वाराणसी द्वारा विकसित की गई है।
लोको कैब वीडियो एंड वॉइस रिकॉर्डिंग सिस्टम (एलसीवीआर) नाम की इस तकनीक में वीडियो कैमरा, माइक्रोफोन और डिजिटल वीडियो रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल किया जाएगा। ये तकनीक दुर्घटना के बाद जांच-पड़ताल में भी काम आ सकेगी। इसके अलावा दुर्घटना का जोखिम महसूस होने पर फेस रिकगनिशन सॉफ्टवेयर लोको कैब्स और ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर को सुरक्षा कार्य मुहैया कराने के लिए अलर्ट भेज देगा। एलसीवीआर के अलावा डीजल लोकोमोटिव वर्क्स ने पूरे देश में इंजनों की निगरानी के लिए एक प्रणाली विकसित की है। इससे इंजनों पर निगरानी रखी जा सकेगी। रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने पिछले दिनों डीरेका आगमन के दौरान इस रेल इंजन की तकनीक आदि को देखा था और इसकी प्रशंसा की थी।
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उपमहाप्रबंधक, नितिन मेहरोत्रा ने बताया कि एलसीवीआर तकनीक से लैस रेल इंजन तैयार कर लिया गया है। जल्द ही इसका ट्रायल होगा।
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डुअल मोड रेल इंजन में कुल छह कैमरे और रिकॉर्डिगिं सिस्टम लगाए गए हैं। एक कैब में दो कैमरे अंदर और एक बाहर लगाया गया है। दोनों कैब मिलाकर कुल छह कैमरे हैं। रेल हादसों को रोकने के लिए रेल मंत्रालय ने ट्रेन के इंजन में कैमरा लगाने का निर्णय लिया है। ट्रेन के इंजन में अलार्म सिस्टम के साथ कैमरे में चेहरा पहचानने वाले सॉफ्टवेयर्स भी लगाए जाएंगे। इससे रेल दुर्घटना में कमी आएगी क्योंकि ये सॉफ्टवेयर पायलट के सोने पर कंट्रोल रूम को अलर्ट भजेंगे। यह तकनीक डीजल लोकोमोटिव वर्क्स वाराणसी द्वारा विकसित की गई है।
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लोको कैब वीडियो एंड वॉइस रिकॉर्डिंग सिस्टम (एलसीवीआर) नाम की इस तकनीक में वीडियो कैमरा, माइक्रोफोन और डिजिटल वीडियो रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल किया जाएगा। ये तकनीक दुर्घटना के बाद जांच-पड़ताल में भी काम आ सकेगी। इसके अलावा दुर्घटना का जोखिम महसूस होने पर फेस रिकगनिशन सॉफ्टवेयर लोको कैब्स और ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर को सुरक्षा कार्य मुहैया कराने के लिए अलर्ट भेज देगा। एलसीवीआर के अलावा डीजल लोकोमोटिव वर्क्स ने पूरे देश में इंजनों की निगरानी के लिए एक प्रणाली विकसित की है। इससे इंजनों पर निगरानी रखी जा सकेगी। रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने पिछले दिनों डीरेका आगमन के दौरान इस रेल इंजन की तकनीक आदि को देखा था और इसकी प्रशंसा की थी।
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उपमहाप्रबंधक, नितिन मेहरोत्रा ने बताया कि एलसीवीआर तकनीक से लैस रेल इंजन तैयार कर लिया गया है। जल्द ही इसका ट्रायल होगा।