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जनता कहे-सिस्टम बेकार, साहब बोले- बनें होशियार
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वाराणसी। शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए पहले चरण में चार चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल सिस्टम लगाया गया है। नई व्यवस्था कितनी कारगर साबित हो रही है, इसकी पड़ताल करने गुरुवार को अमर उजाला टीम निकली। पहले दिन टीम रथयात्रा चौराहे पर गई तो यहां जिम्मेदारों की लापरवाही, अव्यवस्था और मनमानी दिखी। लिहाजा व्यस्ततम रहने वाला यह चौराहा जाम के चंगुल से बाहर निकलते ही फिर फंस जा रहा था। यहां से गुजर रहे लोगों ने कहा कि पूरा सिस्टम ही बेकार है, वहीं एसपी ट्रैफिक ने लोग अभी अभ्यस्त हो रहे हैं।
गुरुवार दोपहर इस चौराहे पर तैनात ट्रैफिक पुलिस, बूथ के आसपास खड़ी नजर आईं। सिग्नल सिस्टम तैयार कर रहे कर्मचारियों के मुताबिक, कैंट से लंका जाने वालों के लिए 75 सेकेंड और मडुवाडीह से गौदोलिया की ओर जाने के लिए 35 सेकेंड का मौका दिया गया है, जबकि हकीकत में कैंट, मडुवाडीह से लंका की ओर जाने के लिए लोगों को करीब एक मिनट 40 सेकेंड तक मौका दे दिया जा रहा था। इसी तरह लंका से सिगरा और मडुवाडीह की ओर जाने के लिए करीब 45-50 सेंकेड ही मिल रहे थे। सिग्नल की सटीक जानकारी न होने के कारण पुलिस रेड लाइट जलने पर भी कुछ देर तक लोगों को जाने की इजाजत तक देती नजर आई। उधर, इस अव्यवस्था के कारण लोग जेब्रा लाइन क्रास बीच चौराहे तक पहुंच रहे थे, जिससे लोग परेशान नजर आ रहे थे। कई बार दो गाड़ियां आमने-सामने हो जा रही थी।
शाम को फिर वही हाल
यही हालत शाम साढ़े पांच बजे से करीब एक घंटे तक अमर उजाला टीम को दिखी। पहले की तरह पुलिस बूथ की ओर नजर आई, जबकि लोग आड़े-तिरछे गाड़ियों को लेकर आ-जा रहे थे। हालांकि टीम पुलिस के पास पहुंची तो वे हरकत में आ गए, लेकिन नियमोें का पालन कराने के दौरान वे अपने कर्तव्यों से विमुख ही रहे। पुलिस के न टोकने, सिग्नल सिस्टम में अंतराल, जागरूकता की कमी और सड़क की चौड़ाई कम होने से चौराहा जाम से निजात नहीं पा रहा था।
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दो दिन से सात चौराहों के सिग्नल बंद
स्मार्ट सिटी में द्वितीय चरण में सात चौराहों को लिया गया है। इसमें प्रमुख रूप से लहरतारा चौराहा, मंडुवाडीह चौराहा शामिल हैं। यहां ट्रायल के तौर ट्रैफिक सिस्टम चालू किया गया, लेकिन नई व्यवस्था दो दिन से ठप है। इससे जाम की समस्या जस की तस बनी हुई है।
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गुरुवार दोपहर इस चौराहे पर तैनात ट्रैफिक पुलिस, बूथ के आसपास खड़ी नजर आईं। सिग्नल सिस्टम तैयार कर रहे कर्मचारियों के मुताबिक, कैंट से लंका जाने वालों के लिए 75 सेकेंड और मडुवाडीह से गौदोलिया की ओर जाने के लिए 35 सेकेंड का मौका दिया गया है, जबकि हकीकत में कैंट, मडुवाडीह से लंका की ओर जाने के लिए लोगों को करीब एक मिनट 40 सेकेंड तक मौका दे दिया जा रहा था। इसी तरह लंका से सिगरा और मडुवाडीह की ओर जाने के लिए करीब 45-50 सेंकेड ही मिल रहे थे। सिग्नल की सटीक जानकारी न होने के कारण पुलिस रेड लाइट जलने पर भी कुछ देर तक लोगों को जाने की इजाजत तक देती नजर आई। उधर, इस अव्यवस्था के कारण लोग जेब्रा लाइन क्रास बीच चौराहे तक पहुंच रहे थे, जिससे लोग परेशान नजर आ रहे थे। कई बार दो गाड़ियां आमने-सामने हो जा रही थी।
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शाम को फिर वही हाल
यही हालत शाम साढ़े पांच बजे से करीब एक घंटे तक अमर उजाला टीम को दिखी। पहले की तरह पुलिस बूथ की ओर नजर आई, जबकि लोग आड़े-तिरछे गाड़ियों को लेकर आ-जा रहे थे। हालांकि टीम पुलिस के पास पहुंची तो वे हरकत में आ गए, लेकिन नियमोें का पालन कराने के दौरान वे अपने कर्तव्यों से विमुख ही रहे। पुलिस के न टोकने, सिग्नल सिस्टम में अंतराल, जागरूकता की कमी और सड़क की चौड़ाई कम होने से चौराहा जाम से निजात नहीं पा रहा था।
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दो दिन से सात चौराहों के सिग्नल बंद
स्मार्ट सिटी में द्वितीय चरण में सात चौराहों को लिया गया है। इसमें प्रमुख रूप से लहरतारा चौराहा, मंडुवाडीह चौराहा शामिल हैं। यहां ट्रायल के तौर ट्रैफिक सिस्टम चालू किया गया, लेकिन नई व्यवस्था दो दिन से ठप है। इससे जाम की समस्या जस की तस बनी हुई है।