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कालीन नगरी में सूखे की आहट से किसान सहमे
Updated Fri, 20 Jul 2018 12:52 AM IST
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ज्ञानपुर। मानसून की दगाबाजी के कारण कालीन नगरी पर सूखे का संकट मंडराने लगा है। बरसात के मौसम में भी किसान पानी के लिए तरस रहे हैं। जून में बारिश न के बराबर बारिश। जुलाई में भी अब तक मामला रिमझिम बरसात तक ही सीमित रहा। कुल मिलाकर इस सीजन में अब तक केवल 134 मिली मीटर बरसात हुई है, जो सामान्य से काफी कम है। इससे खरीफ की खेती प्रभावित हो रही है। यही वजह है कि जिले भर में अब तक महज 18 फीसदी ही धान की रोपाई हो पाई है।
पर्याप्त बारिश न होने से भदोही जिला सूखे की चपेट में आ गया है। हर रोज आसमान में बादल छाने के बाद भी बारिश नहीं हो रही। जून में दो बार मामूली बूंदाबांदी होने के बाद मानसून बेदम साबित होने लगा। जुलाई में अब तक तीन बार बारिश हुई। जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार अब तक जिले में 134 मिमी बारिश हुई है, जो निर्धारित बरसात का लगभग 51 फीसदी है। अर्थात सामान्य से 49 फीसदी बारिश कम हुई है। मानक के अनुसार अब तक 256 मिमी. बरसात होनी चाहिए थी। मौसम के मिजाज को देखते हुए बेहतर बारिश की उम्मीद धूमिल पड़ती जा रही है। इसका असर धान की खेती पर साफ देखा जा रहा है। धान की खेती का लक्ष्य 28 हजार हेक्टेयर है लेकिन अब तक महज 18 फीसदी ही रोपाई हो पाई है। केवल ऐसे ही किसान रोपाई कर पाए हैं, जिनके खेत नहरों के आसपास हैं या सिंचाई के निजी साधन हैं। अगर जल्द बारिश न हुई तो धान की उपज प्रभावित होगी। उड़द, मूंग, बाजरा, मक्का और ज्वार की खेती पर भी असर पड़ेगा। बरसात के मौसम में खेतों में जमीनें सूखकर दरारें पड़ने लगीं हैं। यह देखकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। हालांकि किसानों को अब भी उम्मीद है कि बहुत जल्द झमाझम बरसात होगी और हालात सुधर जाएंगे।
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पर्याप्त बारिश न होने से भदोही जिला सूखे की चपेट में आ गया है। हर रोज आसमान में बादल छाने के बाद भी बारिश नहीं हो रही। जून में दो बार मामूली बूंदाबांदी होने के बाद मानसून बेदम साबित होने लगा। जुलाई में अब तक तीन बार बारिश हुई। जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार अब तक जिले में 134 मिमी बारिश हुई है, जो निर्धारित बरसात का लगभग 51 फीसदी है। अर्थात सामान्य से 49 फीसदी बारिश कम हुई है। मानक के अनुसार अब तक 256 मिमी. बरसात होनी चाहिए थी। मौसम के मिजाज को देखते हुए बेहतर बारिश की उम्मीद धूमिल पड़ती जा रही है। इसका असर धान की खेती पर साफ देखा जा रहा है। धान की खेती का लक्ष्य 28 हजार हेक्टेयर है लेकिन अब तक महज 18 फीसदी ही रोपाई हो पाई है। केवल ऐसे ही किसान रोपाई कर पाए हैं, जिनके खेत नहरों के आसपास हैं या सिंचाई के निजी साधन हैं। अगर जल्द बारिश न हुई तो धान की उपज प्रभावित होगी। उड़द, मूंग, बाजरा, मक्का और ज्वार की खेती पर भी असर पड़ेगा। बरसात के मौसम में खेतों में जमीनें सूखकर दरारें पड़ने लगीं हैं। यह देखकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। हालांकि किसानों को अब भी उम्मीद है कि बहुत जल्द झमाझम बरसात होगी और हालात सुधर जाएंगे।
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