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337 शिक्षक मिलें तो सुधरे पठन-पाठन
Updated Tue, 26 Jun 2018 12:36 AM IST
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ज्ञानपुर। जिले के वित्तपोषित और राजकीय इंटर कॉलेजों में शिक्षकों की कमी से पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। इसमें सुधार के लिए 337 प्रधानाचार्य, प्रवक्ता, सहायक अध्यापकों की जरूरत है। ऐसे में माध्यमिक शिक्षा विभाग सेवानिवृत्त शिक्षकों को मानदेय पर रखने की तैयारी कर रहा है।
जिले में करीब 35 राजकीय, 25 वित्तपोषित और 100 से अधिक वित्तविहीन माध्यमिक और इंटर कॉलेज संचालित हैं। वित्तविहीन स्कूलों में कम मानदेय पर प्रबंधक खुद ही शिक्षक रख लेेते हैं लेकिन वित्तपोषित और राजकीय स्कूलों में चयन आयोग से शिक्षक आते हैं। वित्तपोषित विद्यालयों में समय-समय पर शिक्षकों के आने से उनमें मात्र 50 शिक्षकों की कमी है जबकि राजकीय स्कूलों में करीब 280 प्रवक्ता, सहायक अध्यापकों की कमी है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के आंकड़ो पर गौर किया जाए तो सहायता प्राप्त स्कूलों में प्रवक्ताओं के 137 पद के सापेक्ष 31 कम हैं और सहायक अध्यापक 19 कम हैं। राजकीय में प्रधानाचार्यों के 21, प्रवक्ता के 49 और सहायक अध्यापक के 217 पद रिक्त हैं। सबसे खराब स्थिति 33 उच्चीकृत राजकीय हाईस्कूल हैं। इनमें दो से तीन शिक्षकों के सहारे कई साल से विद्यालय संचालित हो रहे हैं। शिक्षकों की नई नियुक्ति न होने पर शासन ने सेवानिवृत्त 70 साल से कम उम्र के प्रवक्ताओं और सहायक अध्यापकों को संविदा पर रखने का निर्देश दिया है। अब तक सेवानिवृत्त 51 शिक्षकों ने आवेदन किया है। जिला विद्यालय निरीक्षक अशोक कुमार चौरसिया ने कहा कि राजकीय स्कूलों में शिक्षकों की काफी कमी है। सेवानिवृत्त शिक्षकों को रखने की प्रक्रिया चल रही है।
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जिले में करीब 35 राजकीय, 25 वित्तपोषित और 100 से अधिक वित्तविहीन माध्यमिक और इंटर कॉलेज संचालित हैं। वित्तविहीन स्कूलों में कम मानदेय पर प्रबंधक खुद ही शिक्षक रख लेेते हैं लेकिन वित्तपोषित और राजकीय स्कूलों में चयन आयोग से शिक्षक आते हैं। वित्तपोषित विद्यालयों में समय-समय पर शिक्षकों के आने से उनमें मात्र 50 शिक्षकों की कमी है जबकि राजकीय स्कूलों में करीब 280 प्रवक्ता, सहायक अध्यापकों की कमी है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के आंकड़ो पर गौर किया जाए तो सहायता प्राप्त स्कूलों में प्रवक्ताओं के 137 पद के सापेक्ष 31 कम हैं और सहायक अध्यापक 19 कम हैं। राजकीय में प्रधानाचार्यों के 21, प्रवक्ता के 49 और सहायक अध्यापक के 217 पद रिक्त हैं। सबसे खराब स्थिति 33 उच्चीकृत राजकीय हाईस्कूल हैं। इनमें दो से तीन शिक्षकों के सहारे कई साल से विद्यालय संचालित हो रहे हैं। शिक्षकों की नई नियुक्ति न होने पर शासन ने सेवानिवृत्त 70 साल से कम उम्र के प्रवक्ताओं और सहायक अध्यापकों को संविदा पर रखने का निर्देश दिया है। अब तक सेवानिवृत्त 51 शिक्षकों ने आवेदन किया है। जिला विद्यालय निरीक्षक अशोक कुमार चौरसिया ने कहा कि राजकीय स्कूलों में शिक्षकों की काफी कमी है। सेवानिवृत्त शिक्षकों को रखने की प्रक्रिया चल रही है।
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