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परमात्मा से रिश्ता जोड़ लो तर जाओगे : देवकीनंदन ठाकुर0
Updated Sun, 20 May 2018 02:08 AM IST
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वाराणसी। संसार में कोई भी किसी का नहीं है। इस संसार में कोई किसी का है तो वो सिर्फ परमात्मा है। परमात्मा से रिश्ता जोड़ लो तर जाओगे। ये कलयुग है यहां सब त्रस्त हैं, मस्त वो है जो राम के हो गए। उक्त बातें देवकीनंदन ठाकुर ने भारत माता मंदिर में भागवत कथा के दूसरे दिन कहीं। भागवत कथा के दूसरे दिन भागवत आरती और विश्व शांति के लिए हुई प्रार्थना भी हुई।
उन्होेंने कहा कि भागवत वही अमर कथा है जो भगवान शिव ने माता पार्वती को सुनाई थी। बताया कि श्री शुक जी द्वारा चुपके से अमर कथा सुन लेने के कारण जब शंकर जी ने उन्हें मारने के लिए दौड़ाया तो वह एक ब्राह्मणी के गर्भ में छुप गए। कई वर्षों बाद व्यास जी के निवेदन पर भगवान शंकर इस पुत्र के ज्ञानवान होने का वरदान देकर चले गए। व्यास जी ने जब श्री शुक को बाहर आने के लिए कहा तो उन्होंने कहा कि जब तक मुझे माया से सदा मुक्त होने का आश्वासन नहीं मिलेगा मैं नहीं आऊंगा।
तब भगवान नारायण को स्वयं आकर ये कहना पड़ा की श्री शुक आप आओ आपको मेरी माया कभी नहीं लगेगी, तभी वह बाहर आए। आज का मानव तो केवल माया का बंधन ही चारों ओर बांधता फिरता है और बार-बार माया के चक्कर में इस धरती पर अलग- अलग योनियों में जन्म लेता है। कथा पंडाल में मुख्य यजमान एसके सेठ, मोहन लाल सेठ, अयोध्या प्रसाद सेठ, नारायण सेठ, कैलाश यादव ने स्वर्ण दान एवं अनुपम पांडेय ने अभिनंदन किया।
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उन्होेंने कहा कि भागवत वही अमर कथा है जो भगवान शिव ने माता पार्वती को सुनाई थी। बताया कि श्री शुक जी द्वारा चुपके से अमर कथा सुन लेने के कारण जब शंकर जी ने उन्हें मारने के लिए दौड़ाया तो वह एक ब्राह्मणी के गर्भ में छुप गए। कई वर्षों बाद व्यास जी के निवेदन पर भगवान शंकर इस पुत्र के ज्ञानवान होने का वरदान देकर चले गए। व्यास जी ने जब श्री शुक को बाहर आने के लिए कहा तो उन्होंने कहा कि जब तक मुझे माया से सदा मुक्त होने का आश्वासन नहीं मिलेगा मैं नहीं आऊंगा।
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तब भगवान नारायण को स्वयं आकर ये कहना पड़ा की श्री शुक आप आओ आपको मेरी माया कभी नहीं लगेगी, तभी वह बाहर आए। आज का मानव तो केवल माया का बंधन ही चारों ओर बांधता फिरता है और बार-बार माया के चक्कर में इस धरती पर अलग- अलग योनियों में जन्म लेता है। कथा पंडाल में मुख्य यजमान एसके सेठ, मोहन लाल सेठ, अयोध्या प्रसाद सेठ, नारायण सेठ, कैलाश यादव ने स्वर्ण दान एवं अनुपम पांडेय ने अभिनंदन किया।
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