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अपनों को सलामत देख छलके खुशी के आंसू
Updated Sat, 30 Dec 2017 02:21 AM IST
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वाराणसी। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर डिरेलमेंट के बाद लगभग सात घंटे देरी से जैसे ही नई दिल्ली-मंडुवाडीह सुपरफास्ट बनारस पहुंची तो स्टेशन परिसर में भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। जहां दर्दभरा सफर पूरा करने पर यात्रियों के चेहरे पर राहत साफ झलक रही थी, तो वहीं अपनाें को सुरक्षित और सकुशल पाकर परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। यात्री, अपनों से ऐसे लिपटे जैसे लंबी यात्रा से लौटे हों तो कई परिवारीजनों की आंखें डबडबा गईं। स्टेशन पर हर तरफ डिरेलमेंट और उसके बाद सात घंटे के अतिरिक्त सफर को लेकर चर्चा होती रही। नई दिल्ली स्टेशन के प्लेटफार्म पर बृहस्पतिवार की शाम वाराणसी के लिए रवाना होने के कुछ देर बाद इस ट्रेन के छह डिब्बों के पटरी से उतरने के बाद अफरा तफरी मच गई थी।
नई दिल्ली में डिरेलमेंट के बाद रात लगभग डेढ़ बजे सुपरफास्ट वहां से रवाना हुई। इधर डिरेलमेंट की सूचना मिलने के बाद परिजन यात्रा कर रहे अपने लोगों से लगातार उनकी कुशलता और स्थिति पूछते रहे। ट्रेन देरी से चलने और कोहरे की वजह से लेट होती चली गई और सुबह साढ़े ग्यारह के बजाय पौने सात बजे शाम को पहुंची। वहीं ट्रेन में यात्रा कर रहे लोगों के परिजन रेलवे स्टेशन और ऑनलाइन ट्रेन की स्थिति की जानकारी लेते रहे। शाम पांच बजते-बजते बड़ी संख्या में लोग रेलवे स्टेशन पर पहुंच गए थे। कंट्रोल से बार-बार लोग ‘ट्रेन कहां पहुंची’ ‘कब आएगी’ पूछते रहे। शाम 6:40 बजे ट्रेन मंडुवाडीह के प्लेटफार्म नंबर तीन पर आई। परिवारीजन अपने लोगाें की एक झलक पाने के लिए उतावले दिखे। कोई वातानुकूलित बोगी की ओर लपका तो कोई स्लीपर की ओर। कुछ लोग जनरल बोगी के खड़े होने के स्थान पर पहले से ही मौजूद रहे। जैसे ही अपनों के चेहरे नजर आए, चेहरे पर संतुष्टि के भाव जवां हो गए। पहुंचते ही पहले गले से लगा लिया तो कुछ लोगों ने ‘कोई दिक्कत नही हुई’ कहकर अपनों को ढाढस बंधाया। मिलते ही डिरेलमेंट की चर्चा शुरू हो गई। यात्रियों ने बताया कि ट्रेन प्लेटफार्म से चली ही थी कि छह बोगियां डिरेल हो गई। यात्रियों को तगड़ा झटका महसूस हुआ। हालांकि कोई घायल नही नजर आया। यात्री इस घटना से घबरा गए थे। साथ ही इस बात को लेकर चिंतित थे कि अब ट्रेन कितने बजे रवाना होगी? बाद में फिर से ट्रेन को प्लेटफार्म पर लाया गया और उसे रवाना किया गया। यात्रियों ने बताया कि सात-आठ घंटे देरी से पहुंचने ने उन्हें ज्यादा परेशान किया।
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नई दिल्ली में डिरेलमेंट के बाद रात लगभग डेढ़ बजे सुपरफास्ट वहां से रवाना हुई। इधर डिरेलमेंट की सूचना मिलने के बाद परिजन यात्रा कर रहे अपने लोगों से लगातार उनकी कुशलता और स्थिति पूछते रहे। ट्रेन देरी से चलने और कोहरे की वजह से लेट होती चली गई और सुबह साढ़े ग्यारह के बजाय पौने सात बजे शाम को पहुंची। वहीं ट्रेन में यात्रा कर रहे लोगों के परिजन रेलवे स्टेशन और ऑनलाइन ट्रेन की स्थिति की जानकारी लेते रहे। शाम पांच बजते-बजते बड़ी संख्या में लोग रेलवे स्टेशन पर पहुंच गए थे। कंट्रोल से बार-बार लोग ‘ट्रेन कहां पहुंची’ ‘कब आएगी’ पूछते रहे। शाम 6:40 बजे ट्रेन मंडुवाडीह के प्लेटफार्म नंबर तीन पर आई। परिवारीजन अपने लोगाें की एक झलक पाने के लिए उतावले दिखे। कोई वातानुकूलित बोगी की ओर लपका तो कोई स्लीपर की ओर। कुछ लोग जनरल बोगी के खड़े होने के स्थान पर पहले से ही मौजूद रहे। जैसे ही अपनों के चेहरे नजर आए, चेहरे पर संतुष्टि के भाव जवां हो गए। पहुंचते ही पहले गले से लगा लिया तो कुछ लोगों ने ‘कोई दिक्कत नही हुई’ कहकर अपनों को ढाढस बंधाया। मिलते ही डिरेलमेंट की चर्चा शुरू हो गई। यात्रियों ने बताया कि ट्रेन प्लेटफार्म से चली ही थी कि छह बोगियां डिरेल हो गई। यात्रियों को तगड़ा झटका महसूस हुआ। हालांकि कोई घायल नही नजर आया। यात्री इस घटना से घबरा गए थे। साथ ही इस बात को लेकर चिंतित थे कि अब ट्रेन कितने बजे रवाना होगी? बाद में फिर से ट्रेन को प्लेटफार्म पर लाया गया और उसे रवाना किया गया। यात्रियों ने बताया कि सात-आठ घंटे देरी से पहुंचने ने उन्हें ज्यादा परेशान किया।
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