मऊ: जर्जर छात्रावास में पढ़ाई कर रहे 20 छात्र, पीने के पानी तक की किल्लत
मऊ के नरईबांध स्थित राजकीय अनुसूचित जाति छात्रावास में 20 छात्र बदहाल व्यवस्थाओं के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हैं। जर्जर भवन, टूटे दरवाजे, जलभराव और बालू वाले पानी की समस्या से छात्रों को परेशानी हो रही है।
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शहर के बीचोबीच नरईबांध स्थित राजकीय अनुसूचित जाति छात्रावास में रहने वाले छात्र बदहाल व्यवस्थाओं के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हैं। जर्जर भवन, टूटे दरवाजे, जलभराव, गंदे पानी और साफ-सफाई की कमी के बीच छात्र अपने भविष्य को संवारने की कोशिश कर रहे हैं। मंगलवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने छात्रावास का जायजा लिया तो परिसर में जगह-जगह अव्यवस्थाएं देखने को मिलीं।
छात्रावास में कुल 17 कमरे हैं। प्रत्येक कमरे में दो छात्रों के रहने की व्यवस्था है, लेकिन वर्तमान में यहां 20 छात्र रह रहे हैं। इनमें कोई बीएड की पढ़ाई कर रहा है तो कोई इंजीनियरिंग और मेडिकल की तैयारी में जुटा है। छात्रों का कहना है कि सुविधाओं के अभाव के बावजूद वे किसी तरह पढ़ाई जारी रखे हुए हैं।
कमरे में पढ़ाई के साथ खाना बनाने की मजबूरी
छात्रावास के कमरों में छात्रों ने एक तरफ सोने और पढ़ाई की व्यवस्था कर रखी है तो दूसरी तरफ खाना बनाने का इंतजाम है। खाना बनाने के लिए अलग सुरक्षित स्थान की व्यवस्था नहीं होने से हादसे का खतरा बना रहता है। छात्रों का कहना है कि खाना बनाते समय सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं।
भवन के कई दरवाजे जर्जर हैं। छात्रों के मुताबिक बारिश के दिनों में भवन में नमी बढ़ जाती है। इससे कपड़े खराब होने लगते हैं और राशन को सुरक्षित रखना भी मुश्किल हो जाता है।
जलनिकासी की व्यवस्था नहीं, परिसर में भरता है पानी
छात्रावास परिसर में जलनिकासी के लिए नाली की समुचित व्यवस्था नहीं है। बारिश होने पर पूरे परिसर में पानी भर जाता है। ऐसे में छात्रों को आने-जाने के लिए जर्जर पड़े कार्यालय के कमरे का सहारा लेना पड़ता है।
परिसर में घास-फूस भी उगी हुई है। छात्रों के मुताबिक इससे जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बना रहता है। साफ-सफाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से छात्र परेशान हैं।
बालू वाला पानी पीने को मजबूर
छात्रावास में लगे हैंडपंप से साफ पानी नहीं निकलता। पानी के साथ बालू आने की शिकायत छात्रों ने की। इसके चलते उन्होंने हैंडपंप पर कपड़ा बांध रखा है, ताकि पानी को छानकर इस्तेमाल किया जा सके। हालांकि इसके बावजूद पानी पीने और खाना बनाने के लायक नहीं होने की बात छात्र बताते हैं।
पानी की समस्या को देखते हुए छात्रों ने करीब एक साल पहले आपस में चंदा जुटाकर 25 हजार रुपये खर्च किए। इससे मोटर, 500-500 लीटर की दो पानी की टंकियां, टोटियां और टाइल्स लगवाए गए। इसके बाद भी मोटर से बालू वाला पानी आने की समस्या दूर नहीं हुई। पीने और खाना बनाने के लिए छात्रों को बाहर से पानी लाना पड़ता है।
सामान रखने के लिए आलमारी तक नहीं
छात्रों के मुताबिक कमरों में किताबें, कपड़े और अन्य सामान रखने के लिए पर्याप्त आलमारी नहीं है। सीमित जगह में ही उन्हें पढ़ाई, सोने और सामान रखने की व्यवस्था करनी पड़ती है।
छात्रों का कहना है कि छात्रावास में रहने वाले अधिकांश छात्र आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। ऐसे में वे बाहर कमरा लेकर रहने का खर्च वहन नहीं कर सकते। उनका कहना है कि यदि छात्रावास में भवन की मरम्मत, साफ-सफाई, जलनिकासी और स्वच्छ पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएं तो पढ़ाई का माहौल बेहतर हो सकता है।
छात्रों ने जर्जर भवन की मरम्मत कराने, टूटे दरवाजों को बदलने, परिसर की सफाई कराने, जलनिकासी की व्यवस्था करने और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि सुविधाओं के अभाव में उन्हें हर दिन किसी न किसी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन वे इन मुश्किलों के बीच भी अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं।