फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   1980s volleyball played even in streets of Varanasi changing times once glorious sport is fading away

Volleyball: 80 के दशक में काशी की गलियों में भी लगती थी वॉली, बदलते दौर में सिमटता एक गौरवशाली खेल

Sun, 11 Jan 2026 03:56 PM IST
अमन विश्वकर्मा प्रशांत शर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
प्रशांत शर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 11 Jan 2026 03:56 PM IST
सार

वॉलीबॉल को लेकर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पूर्व कोच विद्यासागर ने अमर उजाला से खास बातचीत की। इसमें उन्होंने इस खेल का काफी रोचक इतिहास बताया। कहा कि समय के साथ इसके नियम भी बदलते गए।

विज्ञापन
1980s volleyball played even in streets of Varanasi changing times once glorious sport is fading away
सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप में खिलाड़ी। - फोटो : संवाद

विस्तार

वॉलीबॉल से बनारस का रिश्ता नया नहीं बल्कि दशकों पुराना है। यह वह दौर था जब खेल मैदान केवल मैदान नहीं बल्कि मोहल्लों की पहचान हुआ करते थे। चेतगंज में कभी कैंब्रिज क्लब वॉलीबॉल का बड़ा केंद्र हुआ करता था जहां शाम ढलते ही दर्शकों की भीड़ जुट जाती थी । अब वहां पर सेल्स टैक्स ऑफिस है।

विज्ञापन


80 के दशक में बनारस में वॉलीबॉल का क्रेज अपने चरम पर था। उस समय बीएलडब्ल्यू और एनईआर की टीमों के बीच होने वाले मुकाबले कांटे की माने जाते थे। रेलवे की इन टीमों में खेलना गौरव की बात समझी जाती थी। चयन के लिए खिलाड़ी मेहनत करते थे। शहर के अलईपुरा, बीएचयू, लाहतारा, चेतगंज और रेनी आर्ट जैसे इलाकों के खेल मैदान भी वॉलीबॉल मैच के गवाह रहे हैं। 
विज्ञापन


बीएचयू के पूर्व वॉलीबॉल कोच विद्यासागर सिंह ने बताया कि एक समय बनारस में करीब 21 स्थानों पर वॉलीबॉल प्रतियोगिताएं होती थीं। ग्रामीण इलाकों  में सेवापुरी, पिंडरा, चोलापुर आदि क्षेत्रों में वॉलीबॉल बेहद लोकप्रिय रहा जहां मिट्टी के मैदानों पर रात्रिकालीन प्रतियोगिताएं होती थीं। उस दौर में वॉलीबॉल केवल आउटडोर कोर्ट पर खेला जाता था। संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन

कड़े थे तब के नियम
पूर्व वॉलीबॉल कोच विद्यासागर ने बताया कि वॉली पर फिंगर टच होते ही रेफरी फॉल की सीटी बजा देता था। खिलाड़ियों की तैयारी भी सादगी भरी लेकिन दमदार होती थी। चना, दूध और मक्का ही उनकी ताकत का स्रोत था। उस दौर में न सप्लीमेंट थे, न आधुनिक डाइट थी फिर भी खिलाड़ियों में जुनून और जज्बा भरपूर नजर आता था।

इनडोर तक सीमित हुआ खेल
उन्होंने बताया कि अब इंडोर स्टेडियम और प्रोफेशनल लीग का दौर है, तब बनारस का यह स्वर्णिम अध्याय कहीं पीछे छूटता दिख रहा है। लेकिन पुराने खिलाड़ी और खेल प्रेमी आज भी कहते हैं कि वॉलीबॉल ने बनारस को सिर्फ खिलाड़ी नहीं, अनुशासन और एकजुटता भी दी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed