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बुद्ध के संदेशों को अपनाने से ही विश्व शांति
Updated Tue, 31 Oct 2017 02:06 AM IST
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सारनाथ। भगवान बुद्ध के संदेशों को अपनाकर ही विश्व में शांति स्थापित की जा सकती है। तथागत के उपदेश पूरी दुनिया में प्रचलित और प्रासंगिक हैं। ये विचार संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यदुनाथ प्रसाद दूबे ने व्यक्त किए।
सोमवार को सारनाथ में महाबोधि सोसाइटी आफ इंडिया के तत्वावधान में शुरू हुए मूलगंध कुटी विहार के 86वें वार्षिकोत्सव में कुलपति ने भगवान बुद्ध के संदेशों पर विस्तृत चर्चा की। वार्षिकोत्सव के तहत शुरू हुई दो दिवसीय बौद्ध दर्शन एवं पाली विषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बुद्ध को समझने के लिए पाली भाषा का ज्ञान जरूरी है। तथागत ने इसी भाषा में अपने उपदेश दिए थे। उनके उपदेश समूचे विश्व के मानव कल्याण के लिए हैं।
मुख्य वक्ता प्रदुम्न दूबे, प्रो. संघसेन सिंह, प्रो. भागचंद्र जैन, प्रो. केटीएस राव, अनिमेश प्रकाश सहित अन्य विद्वानों ने तथागत के प्रासंगिक मार्गों की व्याख्या की। इसके पूर्व भगवान बुद्ध की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन के साथ महोत्सव का शुभारंभ हुआ। सोसाइटी के सचिव भिखु मेदांकर ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन प्रो. रमेश प्रसाद और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. राममोहन पाठक ने किया। इस दौरान कौशलेंद्र सिंह, प्रदीप पांडेय, अखिलेश कुमार मिश्र, प्रो. विमलेंद्र कुमार, राजनारायण यादव, शीलेंद्र सिंह, शैलेश कुमार आदि मौजूद थे।
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सोमवार को सारनाथ में महाबोधि सोसाइटी आफ इंडिया के तत्वावधान में शुरू हुए मूलगंध कुटी विहार के 86वें वार्षिकोत्सव में कुलपति ने भगवान बुद्ध के संदेशों पर विस्तृत चर्चा की। वार्षिकोत्सव के तहत शुरू हुई दो दिवसीय बौद्ध दर्शन एवं पाली विषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बुद्ध को समझने के लिए पाली भाषा का ज्ञान जरूरी है। तथागत ने इसी भाषा में अपने उपदेश दिए थे। उनके उपदेश समूचे विश्व के मानव कल्याण के लिए हैं।
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मुख्य वक्ता प्रदुम्न दूबे, प्रो. संघसेन सिंह, प्रो. भागचंद्र जैन, प्रो. केटीएस राव, अनिमेश प्रकाश सहित अन्य विद्वानों ने तथागत के प्रासंगिक मार्गों की व्याख्या की। इसके पूर्व भगवान बुद्ध की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन के साथ महोत्सव का शुभारंभ हुआ। सोसाइटी के सचिव भिखु मेदांकर ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन प्रो. रमेश प्रसाद और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. राममोहन पाठक ने किया। इस दौरान कौशलेंद्र सिंह, प्रदीप पांडेय, अखिलेश कुमार मिश्र, प्रो. विमलेंद्र कुमार, राजनारायण यादव, शीलेंद्र सिंह, शैलेश कुमार आदि मौजूद थे।
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