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सामाजिक मान्यताओं को बता गया अंधारचा

Wed, 13 Feb 2019 01:54 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 13 Feb 2019 01:54 AM IST
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सामाजिक मान्यताओं को बता गया अंधारचा
वाराणसी। 20वें भारत रंग महोत्सव के दौरान नागरी नाटक मंडली में मंगलवार को अंधरचा नाटक का मंचन किया गया। इसमें जब सामाजिक मान्यताओं से व्यक्ति इतर हटकर कार्य करता है तो उसे कितनी मुसीबतें झेलनी पड़ती है। इस नाटक में बखूबी दर्शाया गया।
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अंधारचा श्रीकांत प्रभाकर भिडे का यह मराठी नाटक एक महान कलाकार की कहानी है, जिन्होने अपने कैरियर यात्रा की शुरुआत मराठी प्रयोगात्मक थिएटर इंडस्ट्री के शुरुआती दौर में की थी। कैरियर के शुरुआती दिनों में उनको एक प्रसिद्ध थिएटर समूह के नाटक में एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। नाटक की कहानी कुछ और थी, लेकिन वास्तविकता से सम्बंधित नहीं थी। नाटक की कहानी वर्तमान में घटित होती है, मगर उसकी नाटकीयता उनके युवा दिनों के क्रियाकलापों के इर्द-गिर्द घूमती है। एक कलाकार अपनी कला विधा को विस्तार करने के साथ साथ सीमाओं को दूर धकेलने का प्रयास करता है। उन बंधनों के हिस्से कुछ लोगों को सामाजिक मान्यताओं से संबंधित लगते हैं जबकि कुछ लोगों को एक सामाजिक मान्यताओं के उल्लंघन की तरह महसूस करते हैं। इससे कलाकार अपने आस पास के माहौल को लेकर उदासीन, बेपरवाह और निर्लिप्त महसूस करने लग जाते हैं।
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