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महिलाओं ने किया गौरीतप व्रत
Updated Fri, 07 Dec 2018 01:48 AM IST
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वाराणसी। पुत्र कामना के अलावा अपनी सभी मनोकामनाओं के लिए महिलाओं ने गुरुवार को गौरी तप व्रत रखा। मार्गशीर्ष माह में होने वाले आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गौरी मंदिरों में पूजा पाठ किया।
महिलाओं ने उपवास कर मंदिर में गौरी का पूजन किया। साथ ही गणेश पूजन, कार्तिकेय पूजन का भी महात्म्य है। इसलिए श्रद्धालुओं ने तांबे और मिट्टी के दीपक जलाकर पूजन किया। इसके बाद तांबे, पीतल के बने धातुओं में हलुआ, पूरी पुआ का भोजन किया। ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र ने कहा कि यह पर्व वर्ष में मार्गशीर्ष के अमावस्या से, दूसरे प्रतिपदा और तीसरे में द्वितीया से इस क्रम से चौथे-पांचवें आदि वर्षों मे तृतीया चतुर्थी आदि तिथियों को व्रत करके सोलहवें वर्ष के मार्गशीर्ष पूर्णिमा को पूरा किया जाता है। इसमें गौरी और शिव का पूजन किया जाता है। जिसमें नैवेद्य में सुहाली, कसार, पुआ, पूरी, खीर, घी, शर्करा और मोदक इन आठ पदार्थों का भोग लगाया गया। इस व्रत के करने से स्त्रियों को पुत्रादि की कामना पूर्ति होती है।
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महिलाओं ने उपवास कर मंदिर में गौरी का पूजन किया। साथ ही गणेश पूजन, कार्तिकेय पूजन का भी महात्म्य है। इसलिए श्रद्धालुओं ने तांबे और मिट्टी के दीपक जलाकर पूजन किया। इसके बाद तांबे, पीतल के बने धातुओं में हलुआ, पूरी पुआ का भोजन किया। ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र ने कहा कि यह पर्व वर्ष में मार्गशीर्ष के अमावस्या से, दूसरे प्रतिपदा और तीसरे में द्वितीया से इस क्रम से चौथे-पांचवें आदि वर्षों मे तृतीया चतुर्थी आदि तिथियों को व्रत करके सोलहवें वर्ष के मार्गशीर्ष पूर्णिमा को पूरा किया जाता है। इसमें गौरी और शिव का पूजन किया जाता है। जिसमें नैवेद्य में सुहाली, कसार, पुआ, पूरी, खीर, घी, शर्करा और मोदक इन आठ पदार्थों का भोग लगाया गया। इस व्रत के करने से स्त्रियों को पुत्रादि की कामना पूर्ति होती है।
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