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विश्व मोहन भट्ट की गूंजेगी मोहन वीणा
Updated Tue, 31 Oct 2017 01:58 AM IST
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वाराणसी। गंगा के सुरम्य तट पर मंगलवार की शाम गंगा महोत्सव के मुख्य आयोजन का आगाज गायन, वादन और नृत्य की मोहक प्रस्तुतियों से होगा। शहनाई की मंगलध्वनि के साथ ही सुर, लय, ताल की धारा बह निकलेगी। पहली निशा में जाने माने वीणा वादक पं. विश्व मोहन भट्ट मोहन वीणा के तार झंकृत होंगे तो डॉ. वैंकटेश कुमार का ख्याल गायन यादगार बनेगा। राजेंद्र गंगानी कथक नृत्य की भावपूर्ण थिरकन से संगीत निशा में चार चांद लगाएंगे।
चार दिवसीय महोत्सव में जाने माने कलाकारों की प्रस्तुतियां होंगी। एक नवंबर की शाम महोत्सव की दूसरी निशा की शुरुआत अश्विनी भिड़े देशपांडे के गायन से होगी। वह ख्याल के अलावा ठुमरी, दादरा की भी बंदिशें पेश करेंगी। पं. रोनू मजूमदार की बांसुरी और पं. देबज्योति बोस के सरोद की जुगलबंदी होगी। तबले पर संगत करेंगे पं. कुमार बोस। इनके बाद अंत में गीता चंद्रन भरत नाट्यम की थिरकन से मन मोहेंगी। दो नवंबर की शाम तीसरी निशा लोक और शास्त्रीय नृत्य के नाम समर्पित होगी। इसमें अनु सिन्हा का कथक नृत्य होगा। इनके बाद तेरह ताली, भवई नृत्य अवं मांगड़यार गायन गंगा देवी समूह की ओर से किया जाएगा। तीन नवंबर को आखिरी निशा में संजीव अभयंकर का गायन होगा। इनके बाद पं. भजन सोपोरी और अभय रुस्तम सोपोरी संतूर वादन पेश करेंगे। विशाल कृष्ण के कथक नृत्य से महोत्सव की संगीत निशा विराम लेगी।
18 विद्यालयों से शुरू हुआ सफर के साथी बनेंगे18 जिले
वाराणसी। माध्यमिक शिक्षा परिषद के सांस्कृतिक आयोजन का आकार अब प्रदेश स्तरीय होने जा रहा है। 18 विद्यालयों से शुरू हुआ महोत्सव का सफर अब 18 जिलों तक पहुंच गया है। आगामी गंगा महोत्सव अब प्रदेश स्तर पर आयोजित किया जाएगा। उक्त जानकारी महोत्सव के संयोजन डा. विश्वनाथ दूबे ने दी।
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उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में होेने वाले गंगा महोत्सव में वाराणसी, फैजाबाद, देवीपाटन और मिर्जापुर मंडल भी प्रतिभाग करेगी। इसकी रूपरेखा तैयार कर ली गई है। इसमें चार मंडलों से 18 जिलों के छात्र-छात्राएं हिस्सा लेंगे। गंगा महोत्सव का सफर 2007 में एक सांस्कृति संकुल की परिकल्पना के साथ शुरू हुआ था। इसका उद्देश्य काशी में संगीत की नर्सरी को जिंदा रखना था। 2008 में गंगा महोत्सव चंदा मांगकर शुरू किया गया लेकिन धीरे-धीरे इसने अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी। पहले यह प्रतियोगिता चार दिन की होती थी लेकिन बाद में इसका समय घटाकर तीन दिन कर दिया गया। 2013-14 तक 45 विद्यालयों के आठ सौ छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लेना शुरू कर दिया था। 2015 में ऐसा लगा कि यह आयोजन बंद करना पड़ेगा लेकिन जिला प्रशासन का सहयोग मिला और इसे संजीवनी मिल गई। 2017 में हमने गंगा महोत्सव की यात्रा पर आधारित पत्रिका त्रिपथगा का विमोचन किया। अगले वर्ष की पत्रिका की थीम काशी से अदृश्य चीजों, धरोहरों आदि के बारे में होगी।
युवा कलाकारों ने छोड़ी छाप
वाराणसी। गंगा महोत्सव के मंच पर फाइनल राउंड में प्रतिभागियों ने अव्वल स्थान पाने के लिए जमकर मेहनत की। सोमवार को अंतिम दिन सांस्कृतिक संकुल में गायन, वादन और नृत्य की त्रिवेणी में प्रतिभागियों का हुनर देखकर दर्शक भी मंत्रमुग्ध हो गए। बतौर मुख्य अतिथि जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया।
कनिष्ठ वर्ग की भजन प्रतियोगिता में बंगाली टोला इंटर कॉलेज के प्रियांश कुमार दास, वरिष्ठ वर्ग में दुर्गाचरण गर्ल्स इंटर कॉलेज की अनिन्दिता भट्टाचार्या को प्रथम स्थान हासिल हुआ। कनिष्ठ वर्ग की लोकगीत प्रतियोगिता में बंगाली टोला इंटर कॉलेज के अनिंदो सेन, अभिजीत चक्रवर्ती, सौरभ, आदित्य तिवारी व वरिष्ठ वर्ग में सीएम एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज के दीपक यादव, हिमांशु कुमार, त्रिभुवन दीक्षित, अजीत शुक्ला की टीम ने बेहतरीन प्रस्तुति देकर प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। कनिष्ठ वर्ग के एकल नृत्य में सरस्वती इंटर कॉलेज सुड़िया की शालिनी सेठ और वरिष्ठ वर्ग में बंगाली टोला इंटर कॉलेज के अमन पांडेय ने बेहतरीन नृत्य प्रस्तुत कर पहला स्थान हासिल किया। कनिष्ठ वर्ग की समूह नृत्य प्रतियोगिता में गोपी राधा बालिका इंटर कॉलेज की टीम विधि, आकषी, शिवांगी, काजल, श्रेया, सारिका, नैंसी व निलाक्षी और वरिष्ठ वर्ग में सीएम एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज की टीम में पीयूष, श्रीनिकेतन, राहुल, संदीप, सूरज, हर्ष व रवि गुप्ता ने शानदार प्रस्तुतियां देकर प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके पूर्व प्रतियोगिता के अंतिम दिन कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आर.के. भारद्वाज, विशिष्ट अतिथि विकास अधिकारी सुनील वर्मा ने मां सरस्वती के प्रतिकृति के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया । डॉ. अरुण कुमार शर्मा, डॉ. हरेंद्र कुमार राय, डॉ. श्रीप्रकाश सिंह आदि ने अतिथियों को माल्यार्पण व बैज अलंकरण कर स्वागत किया। मुख्य अतिथि को स्मृति चिह्न व अंगवस्त्रम देकर जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. ओ.पी.राय और नोडल अधिकारी डॉ. विश्वनाथ दूबे ने सम्मानित किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन डॉ. अर्चना उपाध्याय, डॉ. भगवतीधर दुबे, डॉ. राजेश पांडेय ने किया ।
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चार दिवसीय महोत्सव में जाने माने कलाकारों की प्रस्तुतियां होंगी। एक नवंबर की शाम महोत्सव की दूसरी निशा की शुरुआत अश्विनी भिड़े देशपांडे के गायन से होगी। वह ख्याल के अलावा ठुमरी, दादरा की भी बंदिशें पेश करेंगी। पं. रोनू मजूमदार की बांसुरी और पं. देबज्योति बोस के सरोद की जुगलबंदी होगी। तबले पर संगत करेंगे पं. कुमार बोस। इनके बाद अंत में गीता चंद्रन भरत नाट्यम की थिरकन से मन मोहेंगी। दो नवंबर की शाम तीसरी निशा लोक और शास्त्रीय नृत्य के नाम समर्पित होगी। इसमें अनु सिन्हा का कथक नृत्य होगा। इनके बाद तेरह ताली, भवई नृत्य अवं मांगड़यार गायन गंगा देवी समूह की ओर से किया जाएगा। तीन नवंबर को आखिरी निशा में संजीव अभयंकर का गायन होगा। इनके बाद पं. भजन सोपोरी और अभय रुस्तम सोपोरी संतूर वादन पेश करेंगे। विशाल कृष्ण के कथक नृत्य से महोत्सव की संगीत निशा विराम लेगी।
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18 विद्यालयों से शुरू हुआ सफर के साथी बनेंगे18 जिले
वाराणसी। माध्यमिक शिक्षा परिषद के सांस्कृतिक आयोजन का आकार अब प्रदेश स्तरीय होने जा रहा है। 18 विद्यालयों से शुरू हुआ महोत्सव का सफर अब 18 जिलों तक पहुंच गया है। आगामी गंगा महोत्सव अब प्रदेश स्तर पर आयोजित किया जाएगा। उक्त जानकारी महोत्सव के संयोजन डा. विश्वनाथ दूबे ने दी।
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उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में होेने वाले गंगा महोत्सव में वाराणसी, फैजाबाद, देवीपाटन और मिर्जापुर मंडल भी प्रतिभाग करेगी। इसकी रूपरेखा तैयार कर ली गई है। इसमें चार मंडलों से 18 जिलों के छात्र-छात्राएं हिस्सा लेंगे। गंगा महोत्सव का सफर 2007 में एक सांस्कृति संकुल की परिकल्पना के साथ शुरू हुआ था। इसका उद्देश्य काशी में संगीत की नर्सरी को जिंदा रखना था। 2008 में गंगा महोत्सव चंदा मांगकर शुरू किया गया लेकिन धीरे-धीरे इसने अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी। पहले यह प्रतियोगिता चार दिन की होती थी लेकिन बाद में इसका समय घटाकर तीन दिन कर दिया गया। 2013-14 तक 45 विद्यालयों के आठ सौ छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लेना शुरू कर दिया था। 2015 में ऐसा लगा कि यह आयोजन बंद करना पड़ेगा लेकिन जिला प्रशासन का सहयोग मिला और इसे संजीवनी मिल गई। 2017 में हमने गंगा महोत्सव की यात्रा पर आधारित पत्रिका त्रिपथगा का विमोचन किया। अगले वर्ष की पत्रिका की थीम काशी से अदृश्य चीजों, धरोहरों आदि के बारे में होगी।
युवा कलाकारों ने छोड़ी छाप
वाराणसी। गंगा महोत्सव के मंच पर फाइनल राउंड में प्रतिभागियों ने अव्वल स्थान पाने के लिए जमकर मेहनत की। सोमवार को अंतिम दिन सांस्कृतिक संकुल में गायन, वादन और नृत्य की त्रिवेणी में प्रतिभागियों का हुनर देखकर दर्शक भी मंत्रमुग्ध हो गए। बतौर मुख्य अतिथि जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया।
कनिष्ठ वर्ग की भजन प्रतियोगिता में बंगाली टोला इंटर कॉलेज के प्रियांश कुमार दास, वरिष्ठ वर्ग में दुर्गाचरण गर्ल्स इंटर कॉलेज की अनिन्दिता भट्टाचार्या को प्रथम स्थान हासिल हुआ। कनिष्ठ वर्ग की लोकगीत प्रतियोगिता में बंगाली टोला इंटर कॉलेज के अनिंदो सेन, अभिजीत चक्रवर्ती, सौरभ, आदित्य तिवारी व वरिष्ठ वर्ग में सीएम एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज के दीपक यादव, हिमांशु कुमार, त्रिभुवन दीक्षित, अजीत शुक्ला की टीम ने बेहतरीन प्रस्तुति देकर प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। कनिष्ठ वर्ग के एकल नृत्य में सरस्वती इंटर कॉलेज सुड़िया की शालिनी सेठ और वरिष्ठ वर्ग में बंगाली टोला इंटर कॉलेज के अमन पांडेय ने बेहतरीन नृत्य प्रस्तुत कर पहला स्थान हासिल किया। कनिष्ठ वर्ग की समूह नृत्य प्रतियोगिता में गोपी राधा बालिका इंटर कॉलेज की टीम विधि, आकषी, शिवांगी, काजल, श्रेया, सारिका, नैंसी व निलाक्षी और वरिष्ठ वर्ग में सीएम एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज की टीम में पीयूष, श्रीनिकेतन, राहुल, संदीप, सूरज, हर्ष व रवि गुप्ता ने शानदार प्रस्तुतियां देकर प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके पूर्व प्रतियोगिता के अंतिम दिन कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आर.के. भारद्वाज, विशिष्ट अतिथि विकास अधिकारी सुनील वर्मा ने मां सरस्वती के प्रतिकृति के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया । डॉ. अरुण कुमार शर्मा, डॉ. हरेंद्र कुमार राय, डॉ. श्रीप्रकाश सिंह आदि ने अतिथियों को माल्यार्पण व बैज अलंकरण कर स्वागत किया। मुख्य अतिथि को स्मृति चिह्न व अंगवस्त्रम देकर जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. ओ.पी.राय और नोडल अधिकारी डॉ. विश्वनाथ दूबे ने सम्मानित किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन डॉ. अर्चना उपाध्याय, डॉ. भगवतीधर दुबे, डॉ. राजेश पांडेय ने किया ।