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नवरात्र आज से, सजा मां का दरबार
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वाराणसी। वासंतिक नवरात्र आज से शुरू हो गया है। यह नवरात्र आठ दिन का होगा। इस पर्व को लेकर सभी छोटे बड़े देवी मंदिरों में तैयारियां शुक्रवार को देर रात तक चलती रहीं। वासंतिक नवरात्र पर काशी में गौरी के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इसलिए हर दिन अलग अलग मंदिरों में दर्शन पूजन के लिए श्रद्धालु उमड़ते हैं।
नवरात्र को लेकर दुर्गा कुंड स्थित मां कुष्मांडा देवी मंदिर, शैलपुत्री मंदिर सहित कई अन्य मंदिरों को शुक्रवार को सजा दिया गया है। साफ सफाई से लेकर मंदिरों में भीड़ को देखते हुए बैरिकेडिंग का कार्य किया जा रहा था। कई स्थानों पर पुलिस भी तैनात कर दी गई है ताकि दर्शन पूजन के दौरान किसी प्रकार की कोई दुर्व्यवस्था न हो।
शहर के सभी देवी मंदिरों के बाहर गंदगी और सीवर की परेशानी को लेकर अमर उजाला ने शुक्रवार के अंक में गंदगी को लेकर प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी, इस पर नगर निगम ने सुबह से ही सभी देवी मंदिरों के बाहर साफ सफाई कराकर चूने का छिड़काव कराया। अभियान के रूप में चलाए गए सफाई कार्य में सभी देवी मंदिरों के बाहर की स्थिति एक दिन में बदल गई थी।
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शनिवार को दिनभर वैधृति योग है । वैधृति योग में कलश स्थापन का निषेध है। ऐसे में दिन में 11 बजकर 35 मिनट से दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक अभिजित मुहूर्त में कलश स्थापना की जाएगी। चैत्र शुक्ल नवमी को रामनवमी होती है। मध्याह्न में भगवान राम का जन्म होता है। इसलिए रामनवमी व्रत किया जाता है। इस वर्ष अष्टमी शनिवार 13 अप्रैल को दिन में 8 बजकर 16 मिनट तक ही है। उसके बाद नवमी लग रही है जो मध्याह्न काल में है और दूसरे दिन रविवार को नवमी सुबह 6 बजे तक ही है। जबकि सोमवार को एकादशी व्रत भी है। इस कारण से महाष्टमी और रामनवमी दोनों व्रत शनिवार को ही किया जाएगा और व्रत का पारण 14 अप्रैल को प्रात: 6 बजे के बाद होगा।
नवरात्र पर लोग घरों में भी कलश स्थापना और पूजन करते हैं। शुक्रवार को मिट्टी के कलश और चुनरी के अलावा पूजन सामग्री की खूब बिक्री हुई। इसके लिए बाजार में दुकानें भी खूब सजी रहीं। जहां तहां मिट्टी के बर्तन के दुकानें लगी रहीं। इस बार मिलने वाला कलश 20 रुपये से लेकर 100 रुपये तक का था। इसमें कई कलश के ऊपर ही स्वास्तिक और ओम लिखा हुआ था।
वासंतिक नवरात्र के पहले दिन गौरी मां के स्वरूप मां मुखनिर्मालिका का दर्शन पूजन किया जाता है। इनका मंदिर गायघाट पर स्थित है। यहां जाने के लिए कुल चार मार्ग मछोदरी, विशेश्वरगंज, काल भैरव और त्रिलोचन से होकर वहां तक पहुंच सकते हैं। मंदिर के पुजारी के अनुसार भोर में मंगला आरती के साथ पट खुलता है।
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नवरात्र को लेकर दुर्गा कुंड स्थित मां कुष्मांडा देवी मंदिर, शैलपुत्री मंदिर सहित कई अन्य मंदिरों को शुक्रवार को सजा दिया गया है। साफ सफाई से लेकर मंदिरों में भीड़ को देखते हुए बैरिकेडिंग का कार्य किया जा रहा था। कई स्थानों पर पुलिस भी तैनात कर दी गई है ताकि दर्शन पूजन के दौरान किसी प्रकार की कोई दुर्व्यवस्था न हो।
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शहर के सभी देवी मंदिरों के बाहर गंदगी और सीवर की परेशानी को लेकर अमर उजाला ने शुक्रवार के अंक में गंदगी को लेकर प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी, इस पर नगर निगम ने सुबह से ही सभी देवी मंदिरों के बाहर साफ सफाई कराकर चूने का छिड़काव कराया। अभियान के रूप में चलाए गए सफाई कार्य में सभी देवी मंदिरों के बाहर की स्थिति एक दिन में बदल गई थी।
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शनिवार को दिनभर वैधृति योग है । वैधृति योग में कलश स्थापन का निषेध है। ऐसे में दिन में 11 बजकर 35 मिनट से दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक अभिजित मुहूर्त में कलश स्थापना की जाएगी। चैत्र शुक्ल नवमी को रामनवमी होती है। मध्याह्न में भगवान राम का जन्म होता है। इसलिए रामनवमी व्रत किया जाता है। इस वर्ष अष्टमी शनिवार 13 अप्रैल को दिन में 8 बजकर 16 मिनट तक ही है। उसके बाद नवमी लग रही है जो मध्याह्न काल में है और दूसरे दिन रविवार को नवमी सुबह 6 बजे तक ही है। जबकि सोमवार को एकादशी व्रत भी है। इस कारण से महाष्टमी और रामनवमी दोनों व्रत शनिवार को ही किया जाएगा और व्रत का पारण 14 अप्रैल को प्रात: 6 बजे के बाद होगा।
नवरात्र पर लोग घरों में भी कलश स्थापना और पूजन करते हैं। शुक्रवार को मिट्टी के कलश और चुनरी के अलावा पूजन सामग्री की खूब बिक्री हुई। इसके लिए बाजार में दुकानें भी खूब सजी रहीं। जहां तहां मिट्टी के बर्तन के दुकानें लगी रहीं। इस बार मिलने वाला कलश 20 रुपये से लेकर 100 रुपये तक का था। इसमें कई कलश के ऊपर ही स्वास्तिक और ओम लिखा हुआ था।
वासंतिक नवरात्र के पहले दिन गौरी मां के स्वरूप मां मुखनिर्मालिका का दर्शन पूजन किया जाता है। इनका मंदिर गायघाट पर स्थित है। यहां जाने के लिए कुल चार मार्ग मछोदरी, विशेश्वरगंज, काल भैरव और त्रिलोचन से होकर वहां तक पहुंच सकते हैं। मंदिर के पुजारी के अनुसार भोर में मंगला आरती के साथ पट खुलता है।