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Varanasi News: विभूति एक्सप्रेस ट्रेन से 1.47 लाख वायल इंजेक्शन बरामद
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कैंट रेलवे स्टेशन पर विभूति एक्सप्रेस से रविवार को 1.47 लाख वायल दर्द निवारक इंजेक्शन बरामद किए गए हैं। इंजेक्शन पार्सल के माध्यम से कोलकाता के हावड़ा से मंगाए गए हैं। दुर्गाकुंड के जिस दुकानदार के नाम से इंजेक्शन आए हैं, वह भी बुलाने पर स्टेशन नहीं पहुंचा। इस कारण जीआरपी ने गड़बड़ी की आशंका जताई है। प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक, दर्द निवारक इंजेक्शन का इस्तेमाल नशे के लिए भी किया जाता है। मामले की जांच की जा रही है।
जीआरपी प्रभारी निरीक्षक हेमंत कुमार सिंह के मुताबिक, ड्रग विभाग के अधिकारियों को बुलाकर इंजेक्शन सौंप दिए गए हैं। दर्द निवारक इंजेक्शन असली हैं या नकली, इसकी पुष्टि लखनऊ स्थित प्रयोगशाला में जांच से होगी। जानकारी के मुताबिक, जीआरपी को मुखबिर से सूचना मिली थी कि विभूति एक्सप्रेस से दर्द निवारक इंजेक्शन की बड़ी खेप सप्लाई की जा रही है। जीआरपी के जवान पहले से सतर्क थे, इसलिए इंजेक्शन बरामद कर लिए गए। दर्द निवारक इंजेक्शन लगाने की दवाएं 49 पेटी में रखी गई थीं। इंजेक्शन हावड़ा की एक कंपनी से मंगाए गए, जिसका ऑर्डर दुर्गाकुंड स्थित एक दुकानदार ने दिया है। इसकी बुकिंग 23 मार्च को पार्सल के माध्यम हुई थी। इसकी सूचना ड्रग विभाग के अधिकारियों को दी गई है।
मामले की जांच जारी
मौके पर पहुंचे ड्रग इंस्पेक्टर चंद्रेश द्विवेदी व संजय दत्त ने बताया कि दर्द होने पर इस दवा का इंजेक्शन लेने पर आराम मिलता है, लेकिन अधिक डोज होने पर नशा होता है। मामले की जांच की जारी है। बरामद इंजेक्शन की कीमत करीब 11 लाख 76 हजार रुपये है।
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पांच दवाओं के नमूने जांच में फेल
एसटीएफ की वाराणसी इकाई ने पिछले दो मार्च को नकली दवाओं की बड़ी खेप पकड़ी थी। मामले में गिरफ्तारी भी हुई। साथ ही दावा किया गया था कि गिरोह के और सदस्यों को जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। गिरोह के सदस्य अब भी पकड़ से दूर हैं। इस मामले में ड्रग विभाग ने दवाओं के 24 नमूने जांच के लिए भेजे थे। इनमें से पांच की रिपोर्ट आ गई है। पांचों नमूने फेल पाए गए हैं। इसका मतलब है कि दवाएं नकली थीं। अब 19 दवाओं के नमूनों की रिपोर्ट आनी है। ड्रग इंस्पेक्टर अमित कुमार बंसल ने बताया कि जो दवाइयां फेल मिली हैं, उसकी जानकारी संबंधित फार्मा कंपनियों को दी जा रही है। एसटीएफ को भी मामले से अवगत कराया गया है।
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जीआरपी प्रभारी निरीक्षक हेमंत कुमार सिंह के मुताबिक, ड्रग विभाग के अधिकारियों को बुलाकर इंजेक्शन सौंप दिए गए हैं। दर्द निवारक इंजेक्शन असली हैं या नकली, इसकी पुष्टि लखनऊ स्थित प्रयोगशाला में जांच से होगी। जानकारी के मुताबिक, जीआरपी को मुखबिर से सूचना मिली थी कि विभूति एक्सप्रेस से दर्द निवारक इंजेक्शन की बड़ी खेप सप्लाई की जा रही है। जीआरपी के जवान पहले से सतर्क थे, इसलिए इंजेक्शन बरामद कर लिए गए। दर्द निवारक इंजेक्शन लगाने की दवाएं 49 पेटी में रखी गई थीं। इंजेक्शन हावड़ा की एक कंपनी से मंगाए गए, जिसका ऑर्डर दुर्गाकुंड स्थित एक दुकानदार ने दिया है। इसकी बुकिंग 23 मार्च को पार्सल के माध्यम हुई थी। इसकी सूचना ड्रग विभाग के अधिकारियों को दी गई है।
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मामले की जांच जारी
मौके पर पहुंचे ड्रग इंस्पेक्टर चंद्रेश द्विवेदी व संजय दत्त ने बताया कि दर्द होने पर इस दवा का इंजेक्शन लेने पर आराम मिलता है, लेकिन अधिक डोज होने पर नशा होता है। मामले की जांच की जारी है। बरामद इंजेक्शन की कीमत करीब 11 लाख 76 हजार रुपये है।
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पांच दवाओं के नमूने जांच में फेल
एसटीएफ की वाराणसी इकाई ने पिछले दो मार्च को नकली दवाओं की बड़ी खेप पकड़ी थी। मामले में गिरफ्तारी भी हुई। साथ ही दावा किया गया था कि गिरोह के और सदस्यों को जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। गिरोह के सदस्य अब भी पकड़ से दूर हैं। इस मामले में ड्रग विभाग ने दवाओं के 24 नमूने जांच के लिए भेजे थे। इनमें से पांच की रिपोर्ट आ गई है। पांचों नमूने फेल पाए गए हैं। इसका मतलब है कि दवाएं नकली थीं। अब 19 दवाओं के नमूनों की रिपोर्ट आनी है। ड्रग इंस्पेक्टर अमित कुमार बंसल ने बताया कि जो दवाइयां फेल मिली हैं, उसकी जानकारी संबंधित फार्मा कंपनियों को दी जा रही है। एसटीएफ को भी मामले से अवगत कराया गया है।