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श्रवण कुमार त्रिनिदाद में आज भी युवाओं के आदर्श

Mon, 21 Jan 2019 02:18 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 21 Jan 2019 02:18 AM IST
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श्रवण कुमार त्रिनिदाद में आज भी युवाओं के आदर्श
वाराणसी। भारत, भारतीय संस्कृति और संस्कार प्रवासी भारतीयों के दिलों में रचते-बसते हैं। त्रेता युग के श्रवण कुमार त्रिनिदाद के युवाओं के लिए आदर्श हैं। माता-पिता की सेवा करते हुए जान देने वाले श्रवण कुमार पर आधारित लीला के मंचन के दौरान वहां हजारों लोग उमड़ते हैं।
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त्रिनिदाद के बुद्धिराम रामगुलाम 70 साल से अधिक उम्र के बाद भी पिछले 50 साल से श्रवण कुमार की लीला का मंचन कर रहे हैं। सम्मेलन के दौरान काशी में भी वह इसका मंचन करेंगे। बुद्धिराम ने बताया कि 1968 से लीला का मंचन करते आ रहे हैं। शुरूआत आल्हा-ऊदल, प्रह्लाद की लीला से की थी लेकिन धीरे-धीरे इसमें लोगों की रुचि कम होती गई। इसके बाद उन्होंने श्रवण कुमार की लीला का मंचन शुरू किया, जो अब तक जारी है। कलाकार भी इसे पूरे उत्साह से कर रहे हैं।
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वह अपनी तीसरी पीढ़ी को भी इस विरासत को संभालने के लिए तैयार कर चुके हैं। उनके पोते दीपक और विकास उनकी लीला में सहयोग करते हैं। उन्होंने कहा कि जो धर्म का पालन करता है, धर्म उसका पालन करता है। रामलीला के सवाल पर उनका कहना था कि नवरात्र के दौरान जब लीला होती है तो उसे देखने वालों का हुजूम उमड़ पड़ता है। उन्हें यह संस्कार उनकी फैजाबाद निवासी दादी रामदुलारी से मिले हैं।
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