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एकता और भाईचारे का दिया पैगाम
Updated Mon, 02 Jul 2018 12:32 AM IST
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भदोही। जनपद स्थापना दिवस के मौके पर शनिवार की रात चौरी रोड स्थित स्व. नईमउल्लाह अंसारी के अहाते में ईद मिलन समारोह और मुशायरे का आयोजन किया गया। इसमें शायरों और कवियों ने अपने कलामों से आपसी एकता और भाईचारा बढ़ाने पर जोर दिया।
मशहूर शायर शकील फूलपुरी ने देश की संस्कृति से ओतप्रोत कई रचनाएं प्रस्तुत की। मुहब्बत की जुबां से गुफ्तगू करना सिखा दूंगा, फटे दामन को हिकतम से रफू करना लिखा दूंगा। बुझाऊंगा मैं हिंदू भाइयों की प्यास जमजम से, मुसलमानों को गंगा में वजू करना सिखा दूंगा। इलाहाबाद की महक जौनपुरी ने अपनी शायरी से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि गुलबदन गुलबहार कहते हैं। मुझको फूलों का हार कहते है, मेरी करते हैं बंदगी अक्सर, मुझको गंगा की धार कहते हैं। गौहर सिकंदरपुरी ने भी अपने अशआर से अपनी शायरी का लोहा मनवाया। संचालन कैसर जौनपूरी ने किया। शायर शाबान करीमी, राजकुमार अनजाना, दिनेश पांडेय, फैज भदोहवी, सलमान व जौवाद ने भी अपने कलाम पेश किए। आयोजक कालीन निर्यातक शकील अंसारी और राशिद अंसारी ने लोगों का स्वागत किया।
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मशहूर शायर शकील फूलपुरी ने देश की संस्कृति से ओतप्रोत कई रचनाएं प्रस्तुत की। मुहब्बत की जुबां से गुफ्तगू करना सिखा दूंगा, फटे दामन को हिकतम से रफू करना लिखा दूंगा। बुझाऊंगा मैं हिंदू भाइयों की प्यास जमजम से, मुसलमानों को गंगा में वजू करना सिखा दूंगा। इलाहाबाद की महक जौनपुरी ने अपनी शायरी से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि गुलबदन गुलबहार कहते हैं। मुझको फूलों का हार कहते है, मेरी करते हैं बंदगी अक्सर, मुझको गंगा की धार कहते हैं। गौहर सिकंदरपुरी ने भी अपने अशआर से अपनी शायरी का लोहा मनवाया। संचालन कैसर जौनपूरी ने किया। शायर शाबान करीमी, राजकुमार अनजाना, दिनेश पांडेय, फैज भदोहवी, सलमान व जौवाद ने भी अपने कलाम पेश किए। आयोजक कालीन निर्यातक शकील अंसारी और राशिद अंसारी ने लोगों का स्वागत किया।
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