फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   ...मेरे देश की संसद मौन है

...मेरे देश की संसद मौन है

Thu, 09 Nov 2017 02:26 AM IST
Updated Thu, 09 Nov 2017 02:26 AM IST
विज्ञापन
...मेरे देश की संसद मौन है
सेवापुरी/वाराणसी। एक आदमी रोटी बेलता है, दूसरा आदमी रोटी खाता है, तीसरा आदमी है जो न रोटी बेलता है और न ही रोटी खाता है बल्कि रोटी के साथ खेलता है, मैं पूछता हूं कि यह तीसरा आदमी कौन है मेरे देश की संसद मौन है। देश में आजादी मिलने के बाद किसी भी सरकार की व्यवस्था से धूमिल कभी खुश नहीं हुए। समकालीन युग के पुरोधा माने जाने वाले जनकवि धूमिल अपनी कविताओं में आम भाषा का प्रयोग करते थे। सत्ता के खिलाफ आवाज बुलंद कर व्यवस्था परिवर्तन करने का जज्बा इतना मजबूत था कि लोग उनकी जमात में खड़े होते चले गए।
विज्ञापन

खेवली गांव निवासी देवी शंकर सिंह, उमाकांत पांडेय, दीनानाथ पांडेय और दूधनाथ सिंह ने बताया कि सुदामा पांडेय धूमिल अमीरी और गरीबी के बीच बनी खाई को पाटकर सबको बराबर देखना चाहते थे। वह सत्ता में बैठे हुक्मरानों की नाइंसाफी फरमान से आहत रहते थे। वह गरीबों के साथ हो रहे अन्याय को अपनी कविताओं के माध्यम से समाज के पटल पर रखने का कार्य करते थे। उनकी तीखी-चुटीली और प्रखर वादी कविता से सत्ता की चूले हिल जाती थीं। इसी लिए वह सत्ताधरियों के निशाने पर रहते थे। गांव के बेचन सिंह व राजनाथ सिंह ने बताया कि धूमिल निडर व निर्भीक जनकवि थे। वे कहते थे कि कुंठा और हताशा की हर लोग बात करते हैं। लेकिन उसके कारण की तलाश कोई नहीं करता। इसकी जड़ सिर्फ सत्ता में बैठे हुक्मरान हैं। सत्ता में जाने से पहले तमाम वादे करते हैं और सत्ता में पहुंचते ही सब कुछ भूल जाते हैं। ऐसे लोगों को ही सुधारने के लिए जनकवि धूमिल ने अपनी प्रखर कविताओं के माध्यम से संघर्ष ताउम्र किया। इसी वजह से वह दुनिया के प्रख्यात कवि माने जाते हैं।
विज्ञापन

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed