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सहभोज के बहाने सियासी कद बढ़ाएगा अद (एस)
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वाराणसी। उपेक्षा के मुद्दे पर भाजपा के साथ तकरार के बाद अपना दल (सोनेलाल) का नेतृत्व नई रणनीति बनाने में जुट गया है। इसके लिए सोमवार को लखनऊ में पार्टी के राष्ट्रीय, प्रांतीय पदाधिकारियों और जिला अध्यक्षों से लेकर कार्यसमिति सदस्यों को बुलाया गया है। नए साल के मौके पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और विधान परिषद सदस्य आशीष पटेल ने अपने नए सरकारी आवास में विधिवत प्रवेश के बहाने गठबंधन में सहभागिता को लेकर कार्यकर्ताओं का मन टटोलेंगे। सहभोज में सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी दलों के नेताओं को भी आमंत्रित किया है। आशीष को पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी का बंगला आवंटित हुआ है।
केंद्र और राज्य सरकार में शामिल अद (एस) और भाजपा के नेताओं के बीच सुलह के लिए बातचीत तो चल रही है। भाजपा का रवैया भी नरम है लेकिन नतीजा नहीं निकला है। इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल की मां के नेतृत्व वाले मूल अपना दल ने लोकसभा चुनाव में भाजपा से गठबंधन की पहल कर दी है। कहा है कि सम्मानजनक सीटें मिलने पर वह भाजपा से समझौता कर सकती है। दूसरी ओर भाजपा हाईकमान की ओर से दोनों पक्षों को फिलहाल शांत कर दिया गया है। सपा-बसपा गठबंधन के कारण प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार कर अद (एस) की भागीदारी बढ़ाने और लोकसभा चुनाव में दो से ज्यादा सीटें देने पर भी बातचीत चल रही है। बावजूद इसके अद (एस) अपने अगले कदम को लेकर असमंजस में है। इसीलिए बैठक बुलाई गई है। सहभोज में पार्टी कार्यकर्ताओं के बहाने विपक्ष के नेताओं को अद (एस) अपनी ताकत भी दिखाएगा, ताकि नए गठबंधन में उसकी समुचित हिस्सेदारी तय हो सके।
तीन जनवरी को नई दिल्ली में अनुप्रिया पटेल के भी सफदरजंग स्थित नए आवास में हुई बैठक में कांग्रेस के अहमद पटेल, जनार्दन द्विवेदी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, बसपा के सतीश चंद्र मिश्रा, सपा से नीरज शेखर, सुखराम यादव, विशंभर निषाद माकपा के सीताराम येचुरी, लोजपा के रामबिलास पासवान और एनसीपी के प्रफुल्ल पटेल और सुप्रिया सुले के आने से अद (एस) नेतृत्व उत्साहित है। बैठक में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय, पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र, रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा के अलावा भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री सुनील बंसल भी मौजूद रहे। दरअसल, भाजपा नीत गठबंधन में अद (एस) अपना कद बढ़ाना चाहता है। बिहार में लोजपा-जदयू के साथ भाजपा के साथ गठबंधन पार्टी के समझौते का मॉडल है। पार्टी मिर्जापुर के साथ-साथ डुमरियागंज, प्रतापगढ़, सोनभद्र और फूलपुर सीट से भी लड़ना चाहती है। फतेहपुर पर उसकी निगाह है। सूत्र कहते हैं कि यदि भाजपा के साथ ऐसा समझौता नहीं हो सका तो उसके लिए नए गठबंधन में शामिल होना आसान हो जाएगा।
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केंद्र और राज्य सरकार में शामिल अद (एस) और भाजपा के नेताओं के बीच सुलह के लिए बातचीत तो चल रही है। भाजपा का रवैया भी नरम है लेकिन नतीजा नहीं निकला है। इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल की मां के नेतृत्व वाले मूल अपना दल ने लोकसभा चुनाव में भाजपा से गठबंधन की पहल कर दी है। कहा है कि सम्मानजनक सीटें मिलने पर वह भाजपा से समझौता कर सकती है। दूसरी ओर भाजपा हाईकमान की ओर से दोनों पक्षों को फिलहाल शांत कर दिया गया है। सपा-बसपा गठबंधन के कारण प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार कर अद (एस) की भागीदारी बढ़ाने और लोकसभा चुनाव में दो से ज्यादा सीटें देने पर भी बातचीत चल रही है। बावजूद इसके अद (एस) अपने अगले कदम को लेकर असमंजस में है। इसीलिए बैठक बुलाई गई है। सहभोज में पार्टी कार्यकर्ताओं के बहाने विपक्ष के नेताओं को अद (एस) अपनी ताकत भी दिखाएगा, ताकि नए गठबंधन में उसकी समुचित हिस्सेदारी तय हो सके।
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तीन जनवरी को नई दिल्ली में अनुप्रिया पटेल के भी सफदरजंग स्थित नए आवास में हुई बैठक में कांग्रेस के अहमद पटेल, जनार्दन द्विवेदी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, बसपा के सतीश चंद्र मिश्रा, सपा से नीरज शेखर, सुखराम यादव, विशंभर निषाद माकपा के सीताराम येचुरी, लोजपा के रामबिलास पासवान और एनसीपी के प्रफुल्ल पटेल और सुप्रिया सुले के आने से अद (एस) नेतृत्व उत्साहित है। बैठक में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय, पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र, रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा के अलावा भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री सुनील बंसल भी मौजूद रहे। दरअसल, भाजपा नीत गठबंधन में अद (एस) अपना कद बढ़ाना चाहता है। बिहार में लोजपा-जदयू के साथ भाजपा के साथ गठबंधन पार्टी के समझौते का मॉडल है। पार्टी मिर्जापुर के साथ-साथ डुमरियागंज, प्रतापगढ़, सोनभद्र और फूलपुर सीट से भी लड़ना चाहती है। फतेहपुर पर उसकी निगाह है। सूत्र कहते हैं कि यदि भाजपा के साथ ऐसा समझौता नहीं हो सका तो उसके लिए नए गठबंधन में शामिल होना आसान हो जाएगा।
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