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खुलने लगीं कॉरिडोर की पुरानी फाइलें
Updated Fri, 23 Jun 2017 01:27 AM IST
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वाराणसी। गोमती रिवर फ्रंट की सीबीआई जांच की संस्तुति से वरुणा कॉरिडोर के निर्माण से जुड़े सिंचाई विभाग के अभियंताओं में खलबली मच गई है। दरअसल, गोमती रिवर फ्रंट से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं में आठ इंजीनियरों के ही खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। वरुणा कॉरिडोर के ठेके के आवंटन से लेकर गोदाम में आग लगने की घटनाओं तक तमाम अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं।
विभागीय सूत्र भी इससे इनकार नहीं कर रहे हैं कि योगी सरकार गोमती के बाद अब पूर्ववर्ती सपा सरकार के इस ड्रीम प्रोजेक्ट की सीबीआई जांच करा सकती है। ऐसा हुआ तो यहां भी कॉरिडोर के निर्माण से जुड़े अभियंताओं की गर्दन फंस सकती है। 201 करोड़ रुपये की वरुणा कॉरिडोर योजना में मिले 125 करोड़ रुपये से सिंचाई विभाग की ओर से काम कराया जा रहा है। बाकी बची धनराशि की भी डिमांड शासन से कर दी गई है। 70 फीसदी धनराशि खर्च होने के बावजूद बमुश्किल 40 फीसदी काम अब तक हो पाया है। विभागीय सूत्रों की मानें तो गोमती रिवर फ्रंट डेवलपमेंट की सीबीआई जांच के बाद से ही यहां फाइलें खंगाली जा रही हैं। अब तक जारी हुए 125 करोड़ के खर्च के ब्यौरे जुटाए जा रहे हैं।
पुरानी फाइलें दुरुस्त कराई जा रही हैं लेकिन मुश्किल यह है कि कॉरिडोर का काम जब से शुरू हुआ है तब से अब तक मुख्य अभियंता समेत अन्य महत्वपूर्ण पदों पर कई अभियंता बदल चुके हैं। उनके अलग-अलग कार्यकाल में धनराशि जारी की गई। विभागीय सूत्रों की मानें तो मौजूदा समय जिम्मेदारी संभाल रहे अभियंताओं के लिए मुश्किल यह है कि खर्च के ब्यौरे की फाइलें तो दुरुस्त हो जाएंगी लेकिन मौके पर उतना काम कहां से दिखाया जाएगा। पचड़े में फंसने के भय से कुछ अभियंता तो छुट्टी पर चले गए हैं।
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विभागीय सूत्र भी इससे इनकार नहीं कर रहे हैं कि योगी सरकार गोमती के बाद अब पूर्ववर्ती सपा सरकार के इस ड्रीम प्रोजेक्ट की सीबीआई जांच करा सकती है। ऐसा हुआ तो यहां भी कॉरिडोर के निर्माण से जुड़े अभियंताओं की गर्दन फंस सकती है। 201 करोड़ रुपये की वरुणा कॉरिडोर योजना में मिले 125 करोड़ रुपये से सिंचाई विभाग की ओर से काम कराया जा रहा है। बाकी बची धनराशि की भी डिमांड शासन से कर दी गई है। 70 फीसदी धनराशि खर्च होने के बावजूद बमुश्किल 40 फीसदी काम अब तक हो पाया है। विभागीय सूत्रों की मानें तो गोमती रिवर फ्रंट डेवलपमेंट की सीबीआई जांच के बाद से ही यहां फाइलें खंगाली जा रही हैं। अब तक जारी हुए 125 करोड़ के खर्च के ब्यौरे जुटाए जा रहे हैं।
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पुरानी फाइलें दुरुस्त कराई जा रही हैं लेकिन मुश्किल यह है कि कॉरिडोर का काम जब से शुरू हुआ है तब से अब तक मुख्य अभियंता समेत अन्य महत्वपूर्ण पदों पर कई अभियंता बदल चुके हैं। उनके अलग-अलग कार्यकाल में धनराशि जारी की गई। विभागीय सूत्रों की मानें तो मौजूदा समय जिम्मेदारी संभाल रहे अभियंताओं के लिए मुश्किल यह है कि खर्च के ब्यौरे की फाइलें तो दुरुस्त हो जाएंगी लेकिन मौके पर उतना काम कहां से दिखाया जाएगा। पचड़े में फंसने के भय से कुछ अभियंता तो छुट्टी पर चले गए हैं।
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