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संवैधानिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता जरूरी
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वाराणसी। बीएचयू विधि संकाय में शनिवार को आयोजित विशेष व्याख्यान में वक्ताओं ने संवैधानिक कर्तव्यों पर विस्तार से चर्चा की। बतौर मुख्य वक्ता राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय लखनऊ के डीन अकादमिक प्रो. सीएम जरीवाला ने संवैधानिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता जरूरी है। इसके लिए युवाओं को आगे आने का आह्वान किया।
संवैधानिक कर्तव्यों का एक भूला अध्याय विषय पर बोलते हुए प्रो. जरीवाला ने कहा कि भारत में प्राचीन काल से ही राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों की अवधारणा थी। अधिकार और कर्तव्य अविभाज्य है। प्रो. एमके पाढ़ी ने इमैनुएल कांटे के हवाले से कर्तव्य आधारित समाज का महत्व और वर्तमान कानून के बारे में बताया। अतिथियों का स्वागत करते हुए संकाय प्रमुख प्रो. आरपी राय ने संकाय में प्रो. जरीवाला के योगदान की चर्चा की। कार्यक्रम का संचालन तान्या मिश्रा, शैल जायसवाल और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. एसके गुप्ता ने किया। इस दौरान प्रो. एके पांडेय, प्रो. वीएस मिश्र, प्रो. नसीमुल हक, प्रो. जेपी राय, प्रो. अली मेंहदी सहित कई लोग मौजूद रहे।
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संवैधानिक कर्तव्यों का एक भूला अध्याय विषय पर बोलते हुए प्रो. जरीवाला ने कहा कि भारत में प्राचीन काल से ही राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों की अवधारणा थी। अधिकार और कर्तव्य अविभाज्य है। प्रो. एमके पाढ़ी ने इमैनुएल कांटे के हवाले से कर्तव्य आधारित समाज का महत्व और वर्तमान कानून के बारे में बताया। अतिथियों का स्वागत करते हुए संकाय प्रमुख प्रो. आरपी राय ने संकाय में प्रो. जरीवाला के योगदान की चर्चा की। कार्यक्रम का संचालन तान्या मिश्रा, शैल जायसवाल और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. एसके गुप्ता ने किया। इस दौरान प्रो. एके पांडेय, प्रो. वीएस मिश्र, प्रो. नसीमुल हक, प्रो. जेपी राय, प्रो. अली मेंहदी सहित कई लोग मौजूद रहे।
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