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संस्कृत भाषा को लेकर भारत-नेपाल के बीच समझौता आज
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वाराणसी। संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार सहित शैक्षिक गतिविधियों के आदान प्रदान के लिए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय और नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय के बीच आज समझौता होगा। यह फैसला संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में चल रहे दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान लिया गया। बुधवार को दोनों विश्व विद्यालयों के कुलपति इस पर हस्ताक्षर करेंगे।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के योग साधना केंद्र में जैव ब्रह्मांड विज्ञान विषयक दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें भारत के अलावा चाइना और नेपाल के संस्कृत के विषय विशेषज्ञों ने चर्चा की। इसमें संस्कृत के महत्व, संस्कृत से होने वाले लाभ के साथ ही संस्कृत भाषा की जीवन में उपयोगिता के बारे में बताया गया। इसके साथ ही संस्कृत को अन्य देशों में प्रचारित प्रसारित करने के लिए भी योजना बनी। इस योजना में ही नेपाल संस्कृत विश्व विद्यालय और संपूर्णानंद विश्व विद्यालय की ओर से एक समझौता किया जा रहा है। तुलनात्मक धर्म दर्शन विभाग और कार्यक्रम के आयोजक प्रो. हरि प्रसाद अधिकारी ने बताया कि शैक्षिक आदान प्रदान और संस्कृत के बढ़ावे के लिए यह समझौता हो रहा है।
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के योग साधना केंद्र में जैव ब्रह्मांड विज्ञान विषयक दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें भारत के अलावा चाइना और नेपाल के संस्कृत के विषय विशेषज्ञों ने चर्चा की। इसमें संस्कृत के महत्व, संस्कृत से होने वाले लाभ के साथ ही संस्कृत भाषा की जीवन में उपयोगिता के बारे में बताया गया। इसके साथ ही संस्कृत को अन्य देशों में प्रचारित प्रसारित करने के लिए भी योजना बनी। इस योजना में ही नेपाल संस्कृत विश्व विद्यालय और संपूर्णानंद विश्व विद्यालय की ओर से एक समझौता किया जा रहा है। तुलनात्मक धर्म दर्शन विभाग और कार्यक्रम के आयोजक प्रो. हरि प्रसाद अधिकारी ने बताया कि शैक्षिक आदान प्रदान और संस्कृत के बढ़ावे के लिए यह समझौता हो रहा है।
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