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आखिर कहां गुम हो गई आडवाणी की वो गूंज
Updated Sun, 05 Nov 2017 02:26 AM IST
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वाराणसी। एक वो भी दौर था जब भाजपा के पितामह लाल कृष्ण आडवाणी जिधर चलते थे उधर आंधी चलती थी। जय-जयकार होती थी और उन्हीं की गूंज भी। तब नारा दिया जाता था- ‘गूंज रही है नभ में वाणी-आडवाणी आडवाणी...।’ वही आडवाणी शनिवार की शाम काशी में अपने 90वें जन्मदिन पर बहुत तन्हा और अकेले से थे। न पार्टी के दिग्गजों का आसपास जमावड़ा था, न कार्यकर्ताओं में मिलने की होड़। बहुत ही सादगी के साथ आडवाणी ने भोले की नगरी में अपना 90 वां जन्मदिन देव दीपावली के अवसर पर खिड़किया घाट पर मनाया। इस खास मौके पर बस वो थे और उनकी बेटी प्रतिभा। बाकी पार्टी के गिनती के पदाधिकारी, एक मंत्री और चंद लोग।
कभी उनकी एक झलक पाने और नजर-ए-इनायत के लिए कार्यकर्ता और पदाधिकारी और बड़े-बडे़ नेता धक्के खाते थे। पार्टी में न वो तैयारी दिखी न वो ललक जो कभी राममंदिर आंदोलन के समय हुआ करती थी। जन्मदिन के मौके पर देव दीपावली के समय आडवाणी शहर में रहे लेकिन उन्हें किसी बड़े आयोजन में मुख्य अतिथि तक नहीं बनाया गया। और तो और प्रदेश अध्यक्ष भी यहीं पड़ोस के ही हैं। सरकार में दो-दो मंत्री जिले से हैं। बावजूद इसके बस रस्म अदायगी भर दिखी। पार्टी की ओर से भी आडवाणी के जन्मदिन पर कोई आयोजन नहीं कराया गया। यही नहीं, संगठन और सरकार के मंत्री ने भी आडवाणी के साथ केवल प्रोटोकाल निभाया। न वो आत्मीयता दिखी और न ही वह प्रेम जो कभी चरम पर हुआ करता था। कई नेता तो उनके साथ फोटो खिंचवाने से भी परहेज करते दिखे। काशी में आठों विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है। यही नहीं मेयर पद के दावेदार भी आडवाणी के पास आशीर्वाद लेने नहीं पहुंचे।
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कभी उनकी एक झलक पाने और नजर-ए-इनायत के लिए कार्यकर्ता और पदाधिकारी और बड़े-बडे़ नेता धक्के खाते थे। पार्टी में न वो तैयारी दिखी न वो ललक जो कभी राममंदिर आंदोलन के समय हुआ करती थी। जन्मदिन के मौके पर देव दीपावली के समय आडवाणी शहर में रहे लेकिन उन्हें किसी बड़े आयोजन में मुख्य अतिथि तक नहीं बनाया गया। और तो और प्रदेश अध्यक्ष भी यहीं पड़ोस के ही हैं। सरकार में दो-दो मंत्री जिले से हैं। बावजूद इसके बस रस्म अदायगी भर दिखी। पार्टी की ओर से भी आडवाणी के जन्मदिन पर कोई आयोजन नहीं कराया गया। यही नहीं, संगठन और सरकार के मंत्री ने भी आडवाणी के साथ केवल प्रोटोकाल निभाया। न वो आत्मीयता दिखी और न ही वह प्रेम जो कभी चरम पर हुआ करता था। कई नेता तो उनके साथ फोटो खिंचवाने से भी परहेज करते दिखे। काशी में आठों विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है। यही नहीं मेयर पद के दावेदार भी आडवाणी के पास आशीर्वाद लेने नहीं पहुंचे।
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