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एससी-एसटी का मुकदमा रद्द
Updated Thu, 20 Sep 2018 12:37 AM IST
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एससीएसटी एक्ट के तहत दर्ज मुकदमा रद्द
इलाहाबाद। असफल प्रेम संबंध के चलते दर्ज कराया गया दुराचार और एससीएसटी एक्ट का मुकदमा हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। इस मामले में पीड़िता ने स्वयं आरोप वापस ले लिए। उसने कोर्ट से कहा कि गुस्से में आकर उसने प्राथमिकी दर्ज करा दी थी। अब वह स्वयं अपनी शिकायत वापस लेना चाहती है।
बुलंदशहर के औरंगाबाद थाने क्षेत्र निवासी बह्मपाल की याचिका पर न्यायमूर्ति एसडी सिंह ने सुनवाई की। याची के अधिवक्ता दिलीप कुमार पांडेय ने कहा कि शिकायतकर्ता लड़की का याची से एकतरफा प्रेम था। याची की शादी तय हो गई तो लड़की ने गुस्से में आकर एससीएसटी एक्ट और दुराचार की धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया। मामले में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी, जिसका अपर सत्र न्यायाधीश के यहां विचारण चल रहा है। लड़की ने पुलिस को अर्जी देकर कहा है कि वह अपने आरोप वापस ले रही है। आपसी विवाद को समझौते से सुलझा लिया गया है, इसलिए वह प्राथमिकी को बल नहीं देना चाहती है। याची ने उसके शादी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था, इसलिए गुस्से में आकर उसने प्राथमिकी दर्ज करा दी थी। कोर्ट ने सुप्रीमकोर्ट के विधि सिद्धांतों का हवाला देते हुए मुकदमे की कार्यवाही रद्द कर दी है।
इलाहाबाद। असफल प्रेम संबंध के चलते दर्ज कराया गया दुराचार और एससीएसटी एक्ट का मुकदमा हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। इस मामले में पीड़िता ने स्वयं आरोप वापस ले लिए। उसने कोर्ट से कहा कि गुस्से में आकर उसने प्राथमिकी दर्ज करा दी थी। अब वह स्वयं अपनी शिकायत वापस लेना चाहती है।
बुलंदशहर के औरंगाबाद थाने क्षेत्र निवासी बह्मपाल की याचिका पर न्यायमूर्ति एसडी सिंह ने सुनवाई की। याची के अधिवक्ता दिलीप कुमार पांडेय ने कहा कि शिकायतकर्ता लड़की का याची से एकतरफा प्रेम था। याची की शादी तय हो गई तो लड़की ने गुस्से में आकर एससीएसटी एक्ट और दुराचार की धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया। मामले में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी, जिसका अपर सत्र न्यायाधीश के यहां विचारण चल रहा है। लड़की ने पुलिस को अर्जी देकर कहा है कि वह अपने आरोप वापस ले रही है। आपसी विवाद को समझौते से सुलझा लिया गया है, इसलिए वह प्राथमिकी को बल नहीं देना चाहती है। याची ने उसके शादी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था, इसलिए गुस्से में आकर उसने प्राथमिकी दर्ज करा दी थी। कोर्ट ने सुप्रीमकोर्ट के विधि सिद्धांतों का हवाला देते हुए मुकदमे की कार्यवाही रद्द कर दी है।
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