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Varanasi News: डूबेंगे 11 गांव... आशियाने छोड़कर जाने लगे लोग, पांच महीने बाद फिर लौटेंगेे

Thu, 29 May 2025 12:28 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 29 May 2025 12:28 AM IST
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11 villages will be submerged... People have started leaving their homes, will return after five months
लोगों को मानसून की बारिश का इंतजार है, लेकिन प्रदेश के अंतिम छोर पर बसे 11 गांवों के लोग मानसून के देर से आने की प्रार्थना कर रहे हैं। यह वह गांव हैं, जो कनहर बांध के डूब क्षेत्र में हैं। यहां के लोग आशियाना भी छोड़कर जाने लगे हैंं। यह सितंबर-अक्तूबर में पानी कम होने पर फिर वापस आएंगे।
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बारिश शुरू होते ही बांध भरने लगेगा और इन्हें अपना आशियाना छोड़कर पलायन करना होगा। वैसे तो इनके पुनर्वास के लिए अमवार में कॉलोनी बसाई गई है, लेकिन वहां बिजली, पानी, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी मुहैया नहीं कराई जा सकी हैं।
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सैकड़ों ऐसे परिवार भी हैं, जिन्हें अब तक पुनर्वास का पैकेज ही नहीं मिला है, मगर बांध भरने पर घर छोड़ने का निर्देश मिल चुका है। वह कहां जाएंगे, इसी असमंजस में हैं।
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यूपी, छत्तीसगढ़ और झारखंड की सीमा पर कनहर बांध 1976 से निर्माणाधीन है। साढ़े चार दशकों में कई पीढ़ियां बदल गई, मगर विस्थापन और पुनर्वास का विवाद नहीं सुलझ सका है।
इसके पीछे एक बड़ी वजह कार्यदाई संस्था की सुस्ती भी रही है। विस्थापित होने वाले परिवारों की संख्या 4121 है। इसमें 3675 को आवासीय प्लॉट आवंटित हो चुका है। करीब 3580 विस्थापित परिवार को पैकेज का लाभ मिल चुका है।
डूब क्षेत्र के अभी भी 468 परिवार पैकेज के इंतजार में हैं। विभाग की दलील है कि उनके पास बजट नहीं है। आने पर वह मुआवजा देंगे। दूसरी ओर यह परिवार प्लॉट और विस्थापन पैकेज के अभाव में पुरखों की भूमि छोड़कर जाने को तैयार नहीं हैं।
इस बार बांध को सारे फाटक बंद कर भरा जाएगा। इससे डूब क्षेत्र के गांवों का पूरी तरह डूबना तय है। इससे पहले इन इलाकों में रह रहे लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर जाने के लिए कहा जा रहा, मगर सुविधाओं और पैकेज के अभाव में वह कहां जाएंगे, समझ नहीं पा रहे।
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260 मीटर तक भरा जाएगा पानी
पिछली बरसात में कनहर बांध में पानी को रिजर्व लेवल (आरएल) 255 मीटर तक रोका गया था। इस वर्ष आरएल लेवल 260.212 मीटर तक पानी रोकने की तैयारी है। इसके लिए बांध के सभी फाटक बंद किए जाएंगे। पहली बरसात से ही बांध में पानी भरने लगेगा। इससे डूब क्षेत्र के कोरची, सुंदरी, भिसूर, सुगवामान, कुदरी, लांबी, रंदहटोला, बघाडू़ व छतीसगढ़ के छारा, त्रिशूली, कुसफर, धौलागिरी सहित झारखंड के अन्य गांव डूबेंगे। छत्तीसगढ़ के जंगलों से निकली कनहर नदी में पानी तेजी से आता है। वहां मानसून की दस्तक भी पहले होती है। ऐसे में बांध भरने के बाद बढ़ने वाली मुश्किलों को लेकर प्रभावित ग्रामीण सहमे हुए हैं।

पुनर्वास कॉलोनी में सुविधाएं नहीं तो रहेंगे कैसे
डूब क्षेत्र के गांव कोरची के पूर्व प्रधान गंभीरा प्रसाद का कहना है कि पुनर्वास काॅलोनी में विस्थापित परिवारों को कोई लाभ नहीं मिल रहा। सिंचाई विभाग ने पिछले साल बैठक कर आश्वासन दिया था कि काॅलोनी में सड़क, स्कूल, हैंडपंप, बिजली व पानी, मुख्यमंत्री आवास दिया जाएगा। साल भर बाद भी स्थिति जस की तस है। यहीं के पूर्व प्रधान रमेश कुमार ने बताया कि पुनर्वास काॅलोनी में सभी चीजों से वंचित कर दिया गया है। हैंडपंप खराब है तो बन नहीं रहा। अस्पताल संचालित नहीं हो रहा। बिजली व्यवस्था बदहाल है। पूरे पुनर्वास कॉलोनी में एक सामुदायिक शौचालय है, जिस पर ताला बंद है। सुंदरी के अयूब अंसारी, मकसूद ने बताया कि बांध के पहली बारिश में गांव डूबने वाला है। अच्छी सुविधा के अभाव में हम पुनर्वास कॉलोनी में तो आ गए, लेकिन यहां की दुर्व्यवस्था दूर कराने वाला कोई नहीं है।



इस वर्ष बांध के सभी फाटक बंद रहेंगे। आरएल लेवल 260.212 मीटर तक पानी रोका जाएगा। इससे अधिक लेवल होने पर ही फाटक खोला जाएगा। डूब क्षेत्र के सभी गांव इससे प्रभावित होंगे। इन गांवों को खाली करने के लिए मुनादी कराई जा रही है। शासन से बजट मिलते ही सभी छूटे विस्थापित परिवार को पैकेज का लाभ दिया जाएगा। पुनर्वास काॅलोनी में विद्युत व्यवस्था के लिए बजट दिया गया है। पानी, सड़क सहित अन्य सुविधाएं दुरुस्त किया जा रहा है। -विनोद कुमार, अधिशासी अभियंता, कनहर सिंचाई परियोजना।
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