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गंवई जीवन के रस से निर्मित है ‘रेता पड़ल हिया में’
Updated Mon, 04 Dec 2017 02:01 AM IST
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वाराणसी। ओम धीरज के गीत पारंपरिक अवधारणा को तोड़ते हैं और कविता के प्रांजल रूप को प्रस्तुत करते हैं। भोजपुरी की जो मिठास है वह सभी के अंतस को एक अलग ही अहसास कराती है। ये बातें जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने कहीं। वह रविवार को राजकीय जिला पुस्तकालय में अपर आयुक्त एवं नवगीतकार ओम धीरज के भोजपुरी काव्य संग्रह ‘रेता पड़ल हिया में’ के विमोचन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
जिला पुस्तकालय समिति और ‘कोशिश’ जौनपुर के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि हृदयेश मयंक तथा प्रो. वशिष्ठ अनूप ने कहा कि इस संग्रह के गीत हमारे ग्रामीण जीवन में रचे-बसे जीवन रस से निर्मित हैं। इनमें बिखर रहे संबंधों और मूल्यों को सहेजने की सार्थक कोशिश दिखाई पड़ती है। आज संवेदनाएं शुष्क हो रही हैं और संयुक्त परिवार जिस तरह बिखर रहे हैं, ये गीत उन संबंधों को पुन: सींचने और बुनने की प्रेरणा देने वाले हैं। कार्यक्रम का संयोजन पुस्तकालयाध्यक्ष कंचन सिंह परिहार और स्वागत प्रो. आरएन सिंह ने किया। इस अवसर पर प्रो. सुरेंद्र प्रताप, डॉ. अशोक सिंह, सुरेंद्र वाजपेयी, डॉ. उमेश प्रसाद सिंह, डॉ. शैलेष, हिमांशु उपाध्याय मौजूद रहे। इस दौरान काव्यपाठ का भी आयोजन किया गया। इसमें जौनपुर के डॉ. पीसी विश्वकर्मा, अहमद निसार, अंसार जौनपुरी, अशोक मिश्र, सभाजीत द्विवेदी प्रखर, गीता श्रीवास्तव, जनार्दन अस्थाना आदि ने काव्यपाठ किया।
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जिला पुस्तकालय समिति और ‘कोशिश’ जौनपुर के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि हृदयेश मयंक तथा प्रो. वशिष्ठ अनूप ने कहा कि इस संग्रह के गीत हमारे ग्रामीण जीवन में रचे-बसे जीवन रस से निर्मित हैं। इनमें बिखर रहे संबंधों और मूल्यों को सहेजने की सार्थक कोशिश दिखाई पड़ती है। आज संवेदनाएं शुष्क हो रही हैं और संयुक्त परिवार जिस तरह बिखर रहे हैं, ये गीत उन संबंधों को पुन: सींचने और बुनने की प्रेरणा देने वाले हैं। कार्यक्रम का संयोजन पुस्तकालयाध्यक्ष कंचन सिंह परिहार और स्वागत प्रो. आरएन सिंह ने किया। इस अवसर पर प्रो. सुरेंद्र प्रताप, डॉ. अशोक सिंह, सुरेंद्र वाजपेयी, डॉ. उमेश प्रसाद सिंह, डॉ. शैलेष, हिमांशु उपाध्याय मौजूद रहे। इस दौरान काव्यपाठ का भी आयोजन किया गया। इसमें जौनपुर के डॉ. पीसी विश्वकर्मा, अहमद निसार, अंसार जौनपुरी, अशोक मिश्र, सभाजीत द्विवेदी प्रखर, गीता श्रीवास्तव, जनार्दन अस्थाना आदि ने काव्यपाठ किया।
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