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दहशत से कुछ नहीं, रहमत से सब कुछ हासिल
Updated Mon, 30 Oct 2017 02:26 AM IST
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वाराणसी। संत मोरारी बापू ने रविवार को ‘मानस मसान’ रामकथा के नौवें और आखिरी दिन गंगा पार रेती पर उमड़े जन सैलाब के बीच राष्ट्र में शांति, समाज में दया, करुणा, प्रेम, मैत्री का संदेश दिया। कहा कि दहशत से कुछ नहीं मिलने वाला है। मेहनत से कुछ-कुछ और रहमत से सब कुछ मिल जाता है। प्रेम हमारी जरूरत है और सत्य किसी भी रूप में कही भी मिले, हमें ले लेना चाहिए।
भरत जैसी प्रेम मूर्ति, परम संत, पहुंचे हुए महापुरुषों को सुनने से ही प्रेम की प्राप्ति होती है। सत्संग को संकीर्णन नहीं बल्कि विश्व रूपेण बनाया जाना चाहिए। मैत्री का मनोरथ करें। मित्र ऐसा होना चाहिए कि सुख में पीछे और दुख में हमेशा आगे आ जाए। इसी के साथ डोमरी में सतुआ बाबा की गोशाला परिसर में आयोजित कथा का समापन हो गया। बापू के विदा होने के दौरान कथा प्रेमियों की आंखों से प्रेम के आंसू छलक पड़े। यह कथा संत कृपा सनातन संस्थान की ओर से आयोजित की गई थी।
बापू ने कहा कि भारत सबके साथ मैत्री की बात कर रहा है, लेकिन कुछ नासमझ इसे समझ ही नहीं रहे हैं। धर्म हमेशा मुस्कुराना चाहिए। एक दूसरे को आदर के साथ सुनने की आदत डालनी चाहिए। आप झुकोगे तो सामने वाला भी झुकेगा। दुनिया में हारे को कोई हरा नहीं सकता है। आखिरी दिन बापू ने अरण्यकांड, किष्किंधाकांड, सुंदरकांड, लंकाकांड और उत्तरकांड के प्रसंगों पर रोशनी डाली। कहा कि धर्म सिर्फ शाश्वत है। बाल कांड का सार सुख प्राप्ति है तो अयोध्या कांड का सार प्रेम। अरण्य कांड का सार सत्संग है तो लंका कांड का सार विजय, विवेक और विभूति। प्रलय के बाद पूर्ण और शून्य ही बचेगा। आकाश और हरिनाम पूर्ण भी है और शून्य भी।
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भरत जैसी प्रेम मूर्ति, परम संत, पहुंचे हुए महापुरुषों को सुनने से ही प्रेम की प्राप्ति होती है। सत्संग को संकीर्णन नहीं बल्कि विश्व रूपेण बनाया जाना चाहिए। मैत्री का मनोरथ करें। मित्र ऐसा होना चाहिए कि सुख में पीछे और दुख में हमेशा आगे आ जाए। इसी के साथ डोमरी में सतुआ बाबा की गोशाला परिसर में आयोजित कथा का समापन हो गया। बापू के विदा होने के दौरान कथा प्रेमियों की आंखों से प्रेम के आंसू छलक पड़े। यह कथा संत कृपा सनातन संस्थान की ओर से आयोजित की गई थी।
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बापू ने कहा कि भारत सबके साथ मैत्री की बात कर रहा है, लेकिन कुछ नासमझ इसे समझ ही नहीं रहे हैं। धर्म हमेशा मुस्कुराना चाहिए। एक दूसरे को आदर के साथ सुनने की आदत डालनी चाहिए। आप झुकोगे तो सामने वाला भी झुकेगा। दुनिया में हारे को कोई हरा नहीं सकता है। आखिरी दिन बापू ने अरण्यकांड, किष्किंधाकांड, सुंदरकांड, लंकाकांड और उत्तरकांड के प्रसंगों पर रोशनी डाली। कहा कि धर्म सिर्फ शाश्वत है। बाल कांड का सार सुख प्राप्ति है तो अयोध्या कांड का सार प्रेम। अरण्य कांड का सार सत्संग है तो लंका कांड का सार विजय, विवेक और विभूति। प्रलय के बाद पूर्ण और शून्य ही बचेगा। आकाश और हरिनाम पूर्ण भी है और शून्य भी।
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