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यूपी: इस विभाग में न मंत्री टिक पा रहे हैं न संतरी
लखनऊ/महेंद्र तिवारी
Updated Mon, 01 Jul 2013 12:25 AM IST
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उत्तर प्रदेश के खादी ग्रामोद्योग विभाग में पिछले कुछ दिनों से न तो मंत्री की कुर्सी पर कोई टिक पा रहा है और न अफसर। राज्यमंत्री को नीतिगत मामलों में निर्णय लेने का अधिकार नहीं है।
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नतीजा ये है कि तमाम विभागीय काम रुके हुए हैं। समाजवादी सरकार ने खादी संस्थाओं को आगे बढ़ाने के लिए खादी ग्रामोद्योग विभाग में कैबिनेट मंत्री की तैनाती की तो खादी ग्रामोद्योग बोर्ड में उपाध्यक्ष भी नामित किया।
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सीईओ के रूप में पूर्व में बोर्ड में काम कर चुके अफसर को जगह दी गई। मगर पिछले कुछ दिनों से विभाग में नीतिगत निर्णयों से जुड़े मंत्री और अफसर अपनी कुर्सियों पर नहीं टिक पा रहे हैं।
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सरकार बनने के डेढ़ साल के भीतर कैबिनेट मंत्री और दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री बर्खास्त हो चुके हैं। बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रमेश मिश्र भी रिटायरमेंट के चंद दिन पहले 12 जून को हटा दिए गए।
18 दिन बाद प्रमुख सचिव सत्यजीत ठाकुर को खादी बोर्ड के सीईओ की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मुख्यमंत्री रोजगार योजना की धनराशि बढ़ाने का प्रस्ताव हो या कंबल कारखानों के आधुनिकीकरण व पीपीपी के आधार पर मॉल खोलने की योजनाएं जहां की तहां ठिठकी हुई हैं। हालत यह हो गई है कि बोर्ड की बैठक भी नहीं हो रही है।
सबसे पहले बोर्ड उपाध्यक्ष बर्खास्त
समाजवादी पार्टी ने व्यवसायी से नेता बने नटवर गोयल को खादी ग्रामोद्योग बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाया था। उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त था। एक पत्रकार के साथ मारपीट के आरोप में गोयल को अक्टूबर 2012 में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद से बोर्ड में उपाध्यक्ष का पद खाली है।
कैबिनेट मंत्री भी नपे
राजाराम पांडेय खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग के कैबिनेट मंत्री होने के साथ ही नियमों के अनुसार खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के पदेन अध्यक्ष भी थे। पद पर आने के साथ ही वह विभागीय राज्यमंत्री के आरोपों से सुर्खियों में आ गए। रही कसर महिलाओं पर उनकी टिप्पणियों ने पूरी कर दी।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने पांडेय को बर्खास्त कर दिया था। खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग में सिर्फ मंत्री, दर्जा प्राप्त मंत्री ही समय के शिकार नहीं हुए, दो विभागीय प्रमुख सचिव भी बदले जा चुके हैं। नई सरकार आने पर अशोक कुमार तृतीय विभाग के प्रमुख सचिव थे। इसके बाद हरिराज किशोर को प्रमुख सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई।