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UPPCS 2022: पढ़ें 10 टॉपर्स की संघर्ष गाथा, फौजी की बेटी बनी टॉपर, 30 लोगों के परिवार में रह सल्तनत बनीं अफसर

Sat, 08 Apr 2023 02:28 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, उत्तर प्रदेश
अमर उजाला नेटवर्क, उत्तर प्रदेश Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Sat, 08 Apr 2023 02:28 PM IST
सार

आयोग के प्रभारी सचिव विनोद कुमार गौड़ के अनुसार पीसीएस के 30 प्रकार के पदों पर भर्ती की गई है। इनमें तीन प्रकार के 10 पदों पर चयन का आधार केवल लिखित परीक्षा है, जबकि शेष 27 प्रकार के 373 पदों पर चयन का आधार लिखित परीक्षा एवं साक्षात्कार है। पीसीएस-2022 में उपयुक्त अभ्यर्थी उपलब्ध न होने के कारण जो 19 पद खाली रह गए हैं।

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UP PCS 2022 final results announced read struggle stories of top 10 toppers
uppcs toppers - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा (पीसीएस) परीक्षा-2022 में बेटियों ने परचम लहराया है। शुक्रवार को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की ओर से जारी किए गए अंतिम चयन परिणाम में आगरा की दिव्या सिकरवार ने टॉप किया। 383 पदों के लिए हुई परीक्षा में 364 पदों पर अभ्यर्थियों को चयनित घोषित किया गया है। सभी सफल अभ्यर्थियों की अपनी ही संघर्ष की दास्तान है जो बहुत प्रेरणादायी है। पढ़ें परीक्षा में टॉप करने वाले 10 टॉपरों की कहानी...
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दिव्या सिकरवार तीसरी बार में बनीं टॉपर

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दिव्या सिकरवार - फोटो : अमर उजाला

यूपीपीएससी परीक्षा में आगरा की बेटियों ने प्रदेश में नाम रोशन किया है। ग्रामीण परिवेश की दिव्या सिकरवार ने प्रदेश में नंबर वन रैंक हासिल की है। उनको यह सफलता तीसरी बार के प्रयास में मिली है। बेटी एश्वर्य दुबे नौवीं रैंक पर रही है तो शिवम ने पहले प्रयास में डीएसपी का पद हासिल किया है। अपने होनहारों की सफलता से घरों में खुशी की लहर दौड़ गई।

प्रतिभा की राह में कोई भी बाधा आड़े नहीं आती। यह बात आगरा की बेटी दिव्या ने साबित कर दी है। एत्मादपुर के गांव गढ़ी रामी की रहने वाली दिव्या एक साधारण परिवार से हैं। उनके पिता राजपाल फौजी बीएसएफ से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। मां एक गृहणी है। दिव्या अपनी सफलता का श्रेय को देती हैं।

उनका कहना है कि मां खुद पांचवीं पास है, लेकिन उनकी पढ़ाई में कोई दिक्कत नहीं आने दी। तीसरे प्रयास में यह सफलता मिली है। आवास विकास कॉलोनी सेक्टर-7 के निवासी प्रवीण कुमार के बेटे शिवम कुमार ने परीक्षा में 89 वां स्थान पाया है। पहले प्रयास डीएसपी का पद मिला है। उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

दिव्या को मां की जिद ने बनाया डिप्टी कलेक्टर

किसी चीज को हासिल करने का जज्बा मन में हो, तो भगवान भी साथ देता है। दिव्या को परिवार का साथ मिला लेकिन सबसे अधिक मां की भूमिका रही। पांचवीं पास सरोज देवी को अपनी बेटी को कुछ बनाने की जिद थी। बेटी ने भी मां के भरोसे को ठेस नहीं पहुंचायी। प्रदेश मे टॉपर बनकर नाम रोशन किया।

गढ़ी राम एत्मादपुर की निवासी दिव्या सिकरवार बताती है कि पहली बार में मैंस क्लीयर नहीं कर सकी, तो दूसरी बार में दो नंबर से सलेक्शन रह गया। इसके बाद भी हिम्मत नहीं हारी। प्रदेश में टॉपर होने का विश्वास नहीं हो रहा है। गांव से शहर तक किसी लड़की का शिक्षा हासिल करना आसन नहीं होता है। दो बार सफलता न मिलने पर कोई दूसरी नौकरी करने की सोच रही थी लेकिन मां ने पीछे हटने से मना कर दिया।

उन्होंने सेंट जोंस डिग्री कॉलेज से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की शिक्षा हासिल की। उसके बाद यूपीपीसीएस की तैयारी शुरू की थी। ऑनलाइन परीक्षा की तैयारी की। परिवार में पिता राजपाल फौजी,दादी और दो छोटे भाई है। डिप्टी कलेक्टर बनने पर सरकार की योजनाओं का लाभ हर लाभकारी तक पहुंचाने का प्रयास करेगी। गांव की बेटी के डिप्टी कलेक्टर बनने पर हर कोई बधाई दे रहा है। पिता राजपाल भी बेटी की सफलता पर मिष्ठान का वितरण करने में लगे रहे।

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पिता के कहने पर प्रतीक्षा ने बदली राह और बनीं पीसीएस

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प्रतीक्षा पांडेय - फोटो : अमर उजाला
प्रतीक्षा पांडेय ने परीक्षा में दूसरा स्थान हासिल किया। परीक्षा में दूसरा स्थान हासिल करने वाली प्रतीक्षा पांडेय गोमतीनगर निवासी हैं। उनके पिता पीएन पांडेय सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। जबकि मां आरती पांडेय गृहिणी हैं। प्रतीक्षा ने बीवीबीपीएस विद्यालय से 10वीं और आरएलबी से 12वीं की परीक्षा 90 फीसदी नंबरों के साथ पास की है।

वर्ष 2016 में राम स्वरूप मेमोरियल कॉलेज से बीटेक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद प्रतीक्षा सिविल सेवा की तैयारी कर रही थीं।

इंजीनियर परिवार में प्रशासनिक सेवक-

प्रतीक्षा पांडेय ने बताया कि उनके घर पर उनके पिता, भाई, भाभी समेत परिवार में भी कई इंजीनियर हैं। इसीलिए वर्ष 2016 में राम स्वरूप मेमोरियल कॉलेज में बीटेक में दाखिला लिया। इसके बाद पिताजी के कहने पर प्रशासनिक सेवा में जाने के लिए प्रेरित किया। पहली बार प्री क्वालीफाई भी हुआ, लेकिन मेन्स में असफलता हाथ लगी। इसके बाद अपनी गलतियों को सुधारा तथा नये सिरे से दोबारा तैयारी शुरू की। इस बार पहली बार इंटरव्यू देने का मौका मिला और परीक्षा में दूसरा स्थान हासिल हुआ। प्रतीक्षा के अनुसार सिविल सेवा में सफलता के लिए विषय को समझना बेहद जरूरी है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बावजूद उसने परीक्षा में वैकल्पिक विषय के लिए समाजशास्त्र का चयन किया था।
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बुलंदशहर की बेटी नम्रता सिंह ने हासिल किया तीसरा स्थान

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नम्रता सिंह - फोटो : अमर उजाला

बुलंदशहर की नम्रता सिंह ने भी टॉप 10 में जगह बनाई। नम्रता सिंह ने तीसरा स्थान हासिल किया है। 383 पदों के लिए हुई परीक्षा में 364 पदों पर अभ्यर्थियों को चयनित घोषित किया गया है।

बता दें कि सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा (पीसीएस) परीक्षा-2022 में बेटियों ने परचम लहराया है। आयोग की ओर से जारी किए गए अंतिम चयन परिणाम में आगरा की दिव्या सिकरवार ने टॉप किया। लखनऊ की प्रतीक्षा पांडेय को दूसरा और बुलंदशहर की नम्रता सिंह को तीसरा स्थान मिला है।

नेहरूगंज कालोनी में निवासी नम्रता सिंह ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। उनकी इस उपलब्धी पर परिवार में जश्न का माहौल है। आसपास के लोग देर रात तक घर पर बधाई देने के लिए पहुंचते रहे। वहीं परिजनों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर जश्न मनाया। नमृता ने कहा कि उनका सपना आइएएस बनने का है। शुक्रवार को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के परिणाम के बाद नम्रता सिंह ने प्रदेश में तीसरा स्थान पाया है। 

मूलरूप से बुलंदशहर की रहने वाली हैं नम्रता

नम्रता मूलरूप से डिबाई तहसील के सतोही गांव की रहने वाली हैं। वर्तमान में वह अनूपशहर की नेहरूगंज कालोनी में रहती हैं। नमृता के पिता डा. सुरेश सिंह ग्राम्य विकास विभाग में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर इटावा जिले में तैनात हैं। वहीं नम्रता की मां प्रोफेसर चंद्रावती अनूपशहर के दुर्गा प्रसाद बलजीत सिंह स्नातकोत्तर महाविद्यालय में रसान विज्ञान की विभागाध्यक्ष के पद पर तैनात हैं। 

नम्रता तीन भाई बहनों में सबसे बड़ी हैं। दो छोटे भाई पढ़ाई कर रहे हैं। नम्रता ने अनूपशहर जेपी विद्या मंदिर से 10वीं और 12वीं की पढ़ाई की है। उन्होंने 2015 में सीबीएसई 12वीं में जिला टॉप किया था। इसके बाद एनआईटी दिल्ली से 2019 में बीटेक किया। तभी से वह सिविल की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने बताया कि वह ऑनलाइन तैयारी की है। 2021 में वह यूपीएससी में इंटरव्यू तक पहुंची। उन्होंने बताया कि उनका सपना आइएएस बनने का है। यह उनका पहला पड़ाव है। सफलता का श्रेय माता-पिता और गुरुजनों को दिया है।खेलों में है खास रूचि
नम्रता ने बताया कि वह प्रत्येक दिन सात से आठ घंटे पढ़ाई के लिए निकालती हैं। इसके अलावा वह नियमित खेल के लिए भी समय देती हैं। उन्होंने बताया कि हैंडबॉल और बैडमिंटन खेलना उनका शौक है। हैंडवाल में नेशनल स्कूल खेली हैं।

मन लगाकर करें पढ़ाई, असफलता से निराश न होंः नम्रता
नम्रता ने युवाओं को संदेश दिया है कि असफलताओं से कभी निराश नहीं होना चाहिए। यदि मन लगाकर पढ़ाई करें तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं है। पढ़ाई के साथ खेल भी जीवन के लिये आवश्यक हैं। क्योंकि खेल से शरीर और मन स्वस्थ्य रहता है। इसलिए पढ़ाई के साथ थोड़ा खेल पर भी ध्यान देना चाहिए।

देहरादून की बेटी आकांक्षा गुप्ता ने टॉप 10 में बनाई जगह, बिना कोचिंग पाई चौथी रैंक

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परिजनों के साथ आकांक्षा गुप्ता - फोटो : अमर उजाला

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने पीसीएस 2022 का अंतिम चयन परिणाम शुक्रवार देर शाम घोषित कर दिया। इसमें देहरादून की बेटी आकांक्षा गुप्ता ने भी टॉप टेन सूची में जगह बनाते हुए चौथी रैंक हासिल की। कंप्यूटर इंजीनियरिंग में स्नातक आकांक्षा पिछले छह सालों से सिविल सेवा की तैयारी कर रही थीं। पांचवें प्रयास में उन्हें यूपीपीएससी में सफलता मिली।

देहरादून के मोहल्ला मोहित नगर निवासी नरेंद्र गुप्ता टाइल्स के कारोबारी हैं। उनकी बेटी आकांक्षा बचपन से ही मेधावी रही। प्रारंभिक शिक्षा सेंट जूड स्कूल से करने के बाद उन्होंने बीटेक की पढ़ाई डीआईटी यूनिवर्सिटी से की। बीटेक करने के बाद उन्हें इंफोसिस में नौकरी करने का अवसर मिला, लेकिन नौकरी करने के बजाए उन्होंने अपनी मां सपना गुप्ता का सपना पूरा करने का निश्चय किया। उन्होंने घर पर रहकर सेल्फ स्टडी शुरू की।

सेल्फ स्टडी से पाया मुकाम
बगैर कोई कोचिंग और ट्यूशन लिए उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी। इससे पूर्व उन्होंने उत्तराखंड पीसीएस का मेंस क्वालीफाई किया, लेकिन इंटरव्यू में रह गईं। वहीं यूपीपीएससी में इंटरव्यू के करीब तक पहुंच कर रह गईं। इस बार मेहनत रंग लाई और इंटरव्यू में भी आकांक्षा को सफलता मिली। आकांक्षा ने बताया कि बचपन से उनका सपना सिविल सेवा में जाने का था, यह उनके माता-पिता के कारण पूरा हुआ है। बताया, उन्हें बतौर डिप्टी कलेक्टर नियुक्ति मिलेगी।

 

बेसिक शिक्षा अधिकारी से पीसीएस बने डॉ. कुमार गौरव

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शाहजहांपुर के बीएसए कुमार गौरव - फोटो : अमर उजाला

बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. कुमार गौरव ने पीसीएस परीक्षा की टॉप-10 रैंकिंग में पांचवां स्थान हासिल किया है। पुरुषों की रैकिंग में वह पहले स्थान पर हैं। इससे पहले वह नायब तहसीलदार और असिस्टेंट कमांडर सीआरपीएफ की परीक्षा भी पास कर चुके हैं। उनकी उपलब्धि पर परिवार के साथ ही जिले के शिक्षकों ने खुशी जताई है। 

अंबेडकरनगर जिले के रामनगर ब्लॉक के गांव उमरी भवानी निवासी सेवानिवृत्त ग्राम विकास अधिकारी चंद्र प्रकाश द्विवेदी व गृहणी शकुंतला देवी के बेटे कुमार गौरव की प्रारंभिक शिक्षा गांव में हुई। इसके बाद इंदईपुर इंटर कॉलेज से इंटरमीडियट पास करने के बाद इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया। फिर जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से परास्नातक परीक्षा पास की। दिल्ली यूनिवर्सिटी से डॉ. रत्ना के मार्गदर्शन में हिंदी साहित्य में पीएचडी करने वाले कुमार गौरव का चयन 2016 में सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडर के रूप में हो गया था। 

पीएचडी करने के दौरान नौकरी को ठुकराने वाले कुमार का नायब तहसीलदार की परीक्षा में नाम आ गया। उनके ज्वाइन करने से पहले ही पीईएस का रिजल्ट आने पर बीएसए के रूप में शाहजहांपुर में तैनाती मिल गई। उन्होंने अपनी नियुक्ति के दौरान नवाचार के जरिये विद्यालयों का शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाने की गति दी है। शुक्रवार शाम को बीएसए के पीसीएस में चयन होने की खबर के बाद परिवार के साथ जिले के शिक्षकों ने भी बधाई दी। उनकी पत्नी योगिता ओझा ने बीटेक किया है और वह एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं।

2016 की जॉब ठुकराने के बाद लगा था बेरोजगार रह जाएंगे

बीएसए कुमार गौरव की जिंदगी में कई मौके ऐसे आए, जब वह काफी मायूस हो गए। असिस्टेंट कमांडर की नौकरी पीएचडी के कारण छोड़ दी। उन्होंने बताया कि इसके बाद तीन साल तक मौका नहीं मिलने पर परेशान होते रहे। ऐसा लगा कि अब बेरोजगार रह जाएंगे। इसके बाद नौकरी से उनकी झोली भर गई। नायब तहसीलदार के बाद बीएसए बने और पीसीएस में पांचवां स्थान पाया। कुमार गौरव के अनुसार, वह पीसीएस की नौकरी को ज्वाइन करेंगे।

धैर्य और साहस व ईमानदारी का विकल्प नहीं होता है। राष्ट्रीय आंदोलन के नेता हों या बड़े आईकॉन हो, इन सभी का सर्वकालिक जवाब है कि मेहनत और ईमानदारी ही सफलता दिलाती है। कुमार गौरव, बीएसए

वॉलीबॉल की राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी हैं सल्तनत

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सल्तनत परवीन - फोटो : अमर उजाला
सल्तनत परवीन ने छठा स्थान हासिल करके लखनऊ का नाम रोशन किया। छठा स्थान हासिल करने वाली सल्तनत परवीन के पिता मो. शमीम खान अलीगंज क्षेत्र में जनरल स्टोर की दुकान चलाते हैं। उनकी मां अशिया खान गृहिणी हैं। सल्तनत ने इंटीग्रल विवि से बीटेक की पढ़ाई की है।

पढ़ाई के साथ ही सल्तनत खेल में भी अव्वल रही हैं। वह वॉलीबाल की राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी भी रह चुकी हैं।

संतुलित दृष्टिकोण के साथ तैयारी करें : मोहसिना बानो

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मोहसिना बानो - फोटो : अमर उजाला
मोहसिना बानो परीक्षा की तैयारी करनेवालों को जीवन के हर क्षेत्र में संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की सलाह देती हैं। मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ की रहनेवाली मोहसिना का यह दूसरा प्रयास था। इससे पहले वह साल 2021 में नायब तहसीलदार के पद पर चयनित हुई थीं। वह कहती हैं, गत वर्षों में पूछे गए प्रश्नों को हल करने का निरंतर अभ्यास करना चाहिए। 

शुरू से मेधावीं रहीं प्रयागराज की प्राजक्ता बनीं एसडीएम

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प्राजक्ता त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला

पीसीएस-2022 में टॉप टेन मेरिट में जगह बनाने वाली प्राजकता त्रिपाठी शुरू से ही मेधावी छात्रा रहीं हैं। इन दिनों वह भारत सरकार के गृह मंत्रालय में तैनात हैं और अब पीसीएस में आठवीं रैंक के साथ प्राजकता का चयन डिप्टी कलेक्टर के पद पर हो चुका है।

वैसे तो प्राजकता मूलत: पट्टी प्रतापगढ़ की रहने वाली हैं, लेकिन उनके पिता सुरेश चंद्र त्रिपाठी काफी पहले प्रयागराज आकर बस गए थे। सुरेश चंद्र त्रिपाठी सरकारी स्कूल में शिक्षक के पद से रिटायर हो चुके हैं और मां उर्मिला त्रिपाठी गृहणी हैं। प्राजकता के बाबा राजेश्वर सहायक त्रिपाठी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। प्राजकता ने पीसीएस परीक्षा में अपने तीसरे प्रयास में सफल हासिल की है।

उन्होंने 10वीं और 12वीं की पढ़ाई गोल्डन जुबली स्कूल से पूरी करने के बाद बीएससी की पढ़ाई सीएमपी डिग्री कॉलेज से की। इसके बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग से पीजी की पढ़ाई की और गोल्ड मेडलिस्ट रहीं। प्राजकता ने पीसीएस-2022 में वैकल्पिक विषय के रूप में समाजशास्त्र चुना था और सफलता हासिल की। प्राजकता के बड़े भाई आशीष त्रिपाठी पीएनबी अलीगढ़ में मैनेजर और बहन प्रतिभा द्विवेदी गंगा ऋषिकुलम शांतिपुरम फाफामऊ में प्रधानाचार्य हैं।

यूपीपीसीएस : एश्वर्या दुबे ने पाया नौंवा स्थान

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ऐश्वर्या दुबे - फोटो : अमर उजाला

यूपीपीसीएस में नौवीं रैंक हासिल करने वाली आगरा के मधु नगर की एश्वर्या दुबे ने कहा कि एनसीईआरटी की पुस्तकों से तैयारी में मदद मिली। सिविल सर्विसेज में जाना मेरा मकसद है, इसकी तैयारी कर रही हूं। यूपी पीसीएस में नौवीं रैंक मिलने पर अभी एसडीएम के पद पर चयन हुआ है।

पढ़ाई के लिए कम से कम 8 घंटे जरूर दें। जब तैयारी करें तो सोशल मीडिया पर समय बर्बाद न करें। पढ़ाई के लिए अपना लक्ष्य तय कर उसे पाने में जुट जाएं। इनके पिता हरेंद्र दुबे और मां रचना दुबे का कहना है कि बेटियों को मौका मिले तो वह भी मुकाम पा सकती हैं।

नलकूप चालक का बेटा बना डिप्टी कलेक्टर

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संदीप कुमार तिवारी - फोटो : अमर उजाला

प्रदेश की टॉप टेन सूची में मनकापुर के हरनाटायर गांव निवासी संदीप कुमार तिवारी ने दसवां स्थान प्राप्त किया है। इनका चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ है। संदीप के पिता नलकूप चालक हैं।

संदीप कुमार तिवारी के पिता शिवकुमार तिवारी मनकापुर में नलकूप चालक हैं। जबकि मां गृहिणी हैं। संदीप ने फोन पर बातचीत में बताया कि साल 2006 में उन्होंने एपी इंटर कॉलेज मनकापुर से हाईस्कूल किया था। तत्कालीन प्रधानाचार्य डॉ. अवध शरण मिश्र को सफलता व मार्गदर्शन का श्रेय देते हुए संदीप ने कहा कि माता-पिता, गुरुजी व मोटीवेटर अमित सिंह के दिशा-निर्देशन में वह आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं।

कंप्यूटर साइंस में बीटेक संदीप ने सरस्वती विद्या मंदिर अयोध्या से इंटरमीडिएट पास किया। पीसीएस 2021 के परिणाम में वह असिस्टेंट कमिश्नर (सहकारिता) बने थे। ज्वाइनिंग प्रक्रिया चल रही थी। इसी बीच परिणाम आया और अब डिप्टी कलेक्टर बन गए। इनका वैकल्पिक विषय दर्शनशास्त्र था। संदीप ने दिल्ली में कोचिंग की। पिता शिवकुमार तिवारी ने बताया कि संदीप की मेहनत, बजरंगबली की कृपा और पूर्वजों के आशीर्वाद से बेटे को कामयाबी मिली है।

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